महाअभियान: ‘श्री रामलला दर्शन योजना’ ने दी छत्तीसगढ़ के सपनों को उड़ान, बिलासपुर से 850 श्रद्धालुओं की ऐतिहासिक अयोध्या-काशी यात्रा शुरू

मुख्य अंश (Highlights)
- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की दूरदर्शी पहल: प्रदेश के 50,000 से अधिक श्रद्धालुओं को मिल चुका है रामलला के दरबार का सुलभ और भव्य सौभाग्य।
- बिलासपुर से आस्था का सैलाब: संभाग के सभी जिलों से चुने गए 850 रामभक्तों को लेकर विशेष ट्रेन अयोध्या धाम के लिए हुई रवाना।
- डबल आशीर्वाद का अनूठा संयोग: एक ही यात्रा में रामलला के अलौकिक दर्शन के साथ-साथ बाबा काशी विश्वनाथ के दरबार में हाजिरी लगाने का अवसर।
- भक्तिमय माहौल: ‘जय श्रीराम’ के जयकारों और आंसुओं के बीच जनप्रतिनिधियों और परिजनों ने दी भावुक विदाई।
रायपुर/बिलासपुर, 9 सितंबर 2026
छत्तीसगढ़ की माटी में इन दिनों भक्ति, संस्कृति और उल्लास की जो त्रिवेणी बह रही है, उसका एक और ऐतिहासिक गवाह बना बिलासपुर रेलवे स्टेशन। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी ‘श्री रामलला दर्शन योजना’ ने एक बार फिर प्रदेश के आम नागरिकों के जीवन के सबसे बड़े सपने को सच कर दिखाया है।
आज बिलासपुर रेलवे स्टेशन पर उस वक्त अद्भुत और भावनात्मक दृश्य देखने को मिला, जब बिलासपुर संभाग के विभिन्न जिलों से आए 850 श्रद्धालुओं से सजी विशेष आस्था ट्रेन को अयोध्या धाम के लिए हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया। स्टेशन परिसर पूरी तरह से राममय हो चुका था—हर तरफ गूंजते ‘जय श्रीराम’ के नारे, बुजुर्गों के चेहरों पर झलकता असीम संतोष और आंखों में खुशी के आंसू इस बात की गवाही दे रहे थे कि यह महज एक ट्रेन नहीं, बल्कि कोटि-कोटि आस्था की ‘मुक्तिगाड़ी’ थी।
जनप्रतिनिधियों ने दिखाई हरी झंडी, गूंजा पूरा रेलवे स्टेशन
सुबह से ही बिलासपुर रेलवे स्टेशन पर उत्सव जैसा माहौल था। ट्रेन के रवाना होने से पहले आयोजित गरिमामयी कार्यक्रम में क्षेत्र के प्रमुख जनप्रतिनिधियों ने अपनी उपस्थिति से इस ऐतिहासिक पल को और गरिमामय बनाया।
- प्रमुख नेतृत्व: बेलतरा विधायक श्री सुशांत शुक्ला, जिला पंचायत अध्यक्ष श्री राजेश सूर्यवंशी, और जिला पंचायत सभापति श्रीमती भारती नीरज माली ने संयुक्त रूप से ट्रेन को हरी झंडी दिखाई।
- अपनों की विदाई: ट्रेन के रवाना होने के समय परिजनों ने अपने बुजुर्गों और प्रियजनों को मंगलमय यात्रा की शुभकामनाएं दीं। कई बुजुर्ग श्रद्धालुओं ने हाथ जोड़कर नम आंखों से मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय और शासन-प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त किया, जिनके कारण उनका यह सपना साकार हो सका।
पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल का संदेश: “सनातन चेतना और संस्कृति का पुनर्जागरण”
प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने इस विशेष अवसर पर अपने संदेश में कहा कि यह योजना केवल तीर्थाटन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह छत्तीसगढ़ की जनता को उनकी मूल सांस्कृतिक और आध्यात्मिक जड़ों से मजबूती से जोड़ने का एक महाअभियान है।
“मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के कुशल नेतृत्व में हमारी सरकार प्रदेशवासियों की भावनाओं और आस्था का पूर्ण सम्मान कर रही है। अयोध्या धाम और काशी विश्वनाथ की यह पावन नगरी हमारी सनातन संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना के मुख्य केंद्र हैं। इन पवित्र स्थलों के दर्शन से श्रद्धालुओं को हमारी समृद्ध विरासत को नजदीक से महसूस करने का दुर्लभ अवसर मिल रहा है।” — श्री राजेश अग्रवाल, पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री
एक सफर, दो महातीर्थ: अयोध्या से काशी तक की अलौकिक यात्रा
इस विशेष ट्रेन से यात्रा कर रहे श्रद्धालुओं का यह सफर अपने आप में अद्वितीय है, क्योंकि उन्हें एक ही यात्रा में दो सबसे बड़े आध्यात्मिक केंद्रों का आशीर्वाद प्राप्त हो रहा है:
- अयोध्या धाम: मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री रामलला के नव्य और भव्य मंदिर के गर्भगृह में दर्शन, जहां सदियों का इंतजार खत्म होने के बाद रामलला विराजमान हैं।
- काशी विश्वनाथ धाम: मोक्षदायिनी नगरी वाराणसी में बाबा विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग के दर्शन और पावन गंगा आरती की अलोकतांत्रिक अनुभूति।
यह संयुक्त यात्रा श्रद्धालुओं के लिए मात्र धार्मिक पर्यटन नहीं, बल्कि जीवन की सबसे बड़ी आध्यात्मिक पूंजी बन रही है, जिसे वे जीवनभर अपने साथ संजोकर रखेंगे।
50,000 से अधिक नागरिकों का सपना हुआ पूरा: मील का पत्थर बनी योजना
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की यह योजना आज छत्तीसगढ़ के जन-जन के लिए विश्वास का पर्याय बन चुकी है।
- अमृत समान अवसर: इस योजना के माध्यम से अब तक 50,000 से अधिक नागरिक श्री रामलला के दर्शन का लाभ प्राप्त कर चुके हैं।
- अंतिम छोर के व्यक्ति तक पहुंच: इस योजना का सबसे बड़ा सामाजिक लाभ उन गरीब, मजदूर, और वृद्धजनों को मिल रहा है, जो अपने सीमित संसाधनों के कारण कभी अकेले अयोध्या जाने की सोच भी नहीं सकते थे। सरकार ने उनके इस असंभव प्रतीत होने वाले सपने को पूरी तरह से संभव और निःशुल्क बना दिया है।
प्रशासन और प्रबंधन की चाक-चौबंद व्यवस्था
इस महायात्रा को सुरक्षित, सुगम और आनंददायक बनाने के लिए जिला प्रशासन, छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड और आईआरसीटीसी के अधिकारी-कर्मचारी पूरी मुस्तैदी से जुटे रहे। ट्रेन में सवार यात्रियों के खान-पान, चिकित्सा, सुरक्षा और ठहरने की व्यवस्थाओं को इस प्रकार संवारा गया है कि किसी भी श्रद्धालु को असुविधा का सामना न करना पड़े।
निष्कर्ष: आस्था और विकास का अनूठा संगम
बिलासपुर से रवाना हुई यह आस्था ट्रेन यह साबित करती है कि जब सुशासन के साथ लोक-आस्था का सम्मान जुड़ता है, तो किस प्रकार समाज के हर वर्ग के चेहरे पर मुस्कान बिखर जाती है। छत्तीसगढ़ में रामराज्य की संकल्पना को साकार करती यह ‘श्री रामलला दर्शन योजना’ निरंतर आगे बढ़ रही है और प्रदेशवासियों की झोली में अनगिनत दुआएं और आशीर्वाद समेट रही है।
