राजनीति के ‘शिखर’ पर भी ‘जड़ों’ से जुड़ाव: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का भावुक थ्रोबैक पोस्ट, चार दशकों की तपस्या की दिखी झलक
‘80 के दशक में रोपा था जनसेवा का जो बीज, आज वह वटवृक्ष बन छत्तीसगढ़ को दे रहा छांव’ — सोशल मीडिया पर सीएम साय का संदेश हुआ वायरल, सादगी और संकल्प ने जीता प्रदेशवासियों का दिल।

विशेष संवाददाता, रायपुर 10 सितम्बर ।
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का एक सोशल मीडिया पोस्ट इन दिनों पूरे प्रदेश में चर्चा का केंद्र बना हुआ है। इंटरनेट पर चल रहे ‘थ्रोबैक’ (पुरानी यादों को ताजा करने) के ट्रेंड में शामिल होते हुए मुख्यमंत्री ने अपने राजनीतिक और सामाजिक जीवन के उस शुरुआती दौर को याद किया है, जहां से उनके सार्वजनिक जीवन की नींव पड़ी थी। 1980 के दशक की यादों को साझा करते हुए सीएम साय ने स्पष्ट किया कि वक्त भले ही बदल गया हो, लेकिन छत्तीसगढ़ की साढ़े तीन करोड़ जनता की सेवा करने का उनका संकल्प आज भी उतना ही अडिग है, जितना चार दशक पहले था।
मुख्यमंत्री का यह पोस्ट सिर्फ एक याद नहीं, बल्कि एक साधारण गांव के पंच से लेकर देश के सबसे तेजी से बढ़ते राज्य के मुख्यमंत्री बनने तक के एक तपस्वी राजनेता के सफरनामा की जीवंत कहानी बयां करता है।
सपने से शुरू हुआ सफर, बना जीवन का सर्वोच्च संकल्प
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बेहद दार्शनिक और भावुक शब्दों में अपनी यात्रा को रेखांकित करते हुए लिखा, “कुछ यात्राएं एक सपने के साथ शुरू होती हैं और सेवा के प्रति आजीवन प्रतिबद्धता में बदल जाती हैं। लुकिंग बैक एट द 80s (80 के दशक को मुड़कर देखना) मुझे वहां ले जाता है जहां से मेरी ‘जनसेवा’ की यात्रा शुरू हुई थी।”
उनकी इन पंक्तियों में उस दौर की सादगी और संघर्ष की महक साफ महसूस की जा सकती है, जब उन्होंने जशपुर के एक छोटे से गांव ‘बगिया’ से अपने सामाजिक जीवन की शुरुआत की थी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सीएम साय का यह संदेश आज की युवा पीढ़ी के लिए एक प्रेरणा है कि कैसे ईमानदारी और समर्पण से एक आम इंसान भी लोकतंत्र के सर्वोच्च शिखर पर पहुंच सकता है।
वक्त बदला, पीढ़ियां बदलीं, पर नहीं बदला जनता से नाता
अपने चार दशकों से अधिक के लंबे सार्वजनिक जीवन के अनुभवों को समेटते हुए मुख्यमंत्री ने आगे लिखा, “दशक बीत गए, समय बदल गया और पीढ़ियां आगे बढ़ गईं, लेकिन उद्देश्य आज भी वही है—अपने लोगों की उसी समर्पण और अटूट संकल्प के साथ सेवा करना। साल दर साल आगे बढ़ते गए, लेकिन मेरी यह प्रतिबद्धता वक्त के साथ और भी अधिक मजबूत व गहरी होती गई है।”
यह पंक्तियां दर्शाती हैं कि मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठने के बाद भी विष्णु देव साय के भीतर का वह जमीनी कार्यकर्ता आज भी उतना ही जीवंत है, जो कभी ग्रामीणों की छोटी-छोटी समस्याओं के लिए खुद उनके बीच मौजूद रहता था। आज भी उनका ‘बगिया’ स्थित निवास हर वर्ग के लिए चौबीसों घंटे खुला रहता है।
पंच से मुख्यमंत्री तक: संघर्ष और शुचिता की अनूठी मिसाल
विष्णु देव साय का यह थ्रोबैक पोस्ट उनके समर्थकों और छत्तीसगढ़ की जनता के लिए उस स्वर्णिम इतिहास को याद करने जैसा है, जिसमें उन्होंने:
- 1989: बगिया ग्राम पंचायत के निर्विरोध पंच और फिर सरपंच बनकर लोकतंत्र की बुनियादी सीढ़ी पर कदम रखा।
- 1990: अविभाजित मध्य प्रदेश में पहली बार तपकरा विधानसभा सीट से विधायक चुने गए।
- 1999 से 2014: लगातार तीन बार रायगढ़ लोकसभा क्षेत्र से सांसद रहकर राष्ट्रीय राजनीति में छत्तीसगढ़ का मान बढ़ाया।
- केंद्रीय मंत्री से मुख्यमंत्री: मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में केंद्रीय राज्य मंत्री के रूप में अपनी प्रशासनिक क्षमता साबित की और वर्तमान में छत्तीसगढ़ को सुशासन की नई दिशा दे रहे हैं।
असरदार संदेश: प्रदेशभर में जमकर हो रही सराहना
सीएम साय के इस पोस्ट के वायरल होते ही डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई है। युवाओं से लेकर बुजुर्गों तक, हर कोई उनकी इस सादगी और विनम्रता का मुरीद हो रहा है। सोशल मीडिया यूजर्स का कहना है कि जहां आज के दौर में सत्ता मिलते ही लोग अपनी जड़ें भूल जाते हैं, वहीं मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का अपनी शुरुआत को इस तरह याद करना यह साबित करता है कि वे छत्तीसगढ़ के सच्चे ‘माटी पुत्र’ हैं।
यह समाचार इस बात की तस्दीक करता है कि छत्तीसगढ़ में चल रहा सुशासन का मौजूदा दौर किसी तात्कालिक राजनीति का हिस्सा नहीं, बल्कि 40 साल की कड़ी तपस्या, अनुभव और जनता के प्रति अगाध प्रेम का प्रतिफल है।
