सशक्त बचपन, समृद्ध छत्तीसगढ़: बाल विकास और पोषण के क्षेत्र में मील का पत्थर बनता छत्तीसगढ

रायपुर, 05 अगस्त 2026 — किसी भी राष्ट्र या राज्य की वास्तविक प्रगति का पैमाना इस बात से तय होता है कि उसके बच्चे कितने स्वस्थ, सुरक्षित और शिक्षित हैं। इसी दूरदर्शी सोच को धरातल पर उतारते हुए छत्तीसगढ़ सरकार ने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के मार्गदर्शन और महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े के सक्रिय नेतृत्व में बाल कल्याण के क्षेत्र में ऐतिहासिक उपलब्धियां हासिल की हैं।
आज छत्तीसगढ़ न केवल राज्य स्तर पर, बल्कि राष्ट्रीय फलक पर बाल विकास, पोषण सुरक्षा और कुपोषण मुक्ति के मामले में एक मिसाल बनकर उभरा है। आइए डालते हैं एक नजर उन प्रमुख क्षेत्रों पर, जिन्होंने छत्तीसगढ़ को बाल विकास के क्षेत्र में सिरमौर बनाया है:
1. पोषण अभियान में राष्ट्रीय स्तर पर परचम
- राष्ट्रीय रैंकिंग में प्रथम: वित्तीय वर्ष 2024-25 में छत्तीसगढ़ राज्य प्रति आंगनबाड़ी गतिविधियों के संचालन में देश भर में प्रथम स्थान पर रहा है। इसके साथ ही, अप्रैल 2025 के पोषण पखवाड़ा में भी छत्तीसगढ़ ने राष्ट्रीय स्तर पर पहला स्थान प्राप्त कर अपनी प्रतिबद्धता साबित की है।
- व्यापक जन-भागीदारी: आंकड़ों के गवाह हैं कि सितंबर-अक्टूबर 2025 के पोषण माह के दौरान 71 हजार से अधिक और अप्रैल 2026 के पोषण पखवाड़ा में 34 लाख 93 हजार से अधिक गतिविधियां आयोजित की गईं, जो जन-सहभागिता की बड़ी मिसाल हैं।
2. कुपोषण पर प्रभावी और निर्णायक प्रहार
पोषण ट्रैकर ऐप के आधिकारिक आंकड़े बताते हैं कि बच्चों के स्वास्थ्य में उल्लेखनीय सुधार हुआ है:
- स्टंटिंग (बौनापन) में भारी कमी: दिसंबर 2023 में जहां बौनापन की दर 30.27% थी, वह घटकर जून 2026 तक 22.45% पर आ गई है।
- आयु वर्ग 0-5 वर्ष के बच्चों में स्टंटिंग, वेस्टिंग और अंडरवेट के मामलों में निरंतर गिरावट दर्ज की जा रही है, जो वैज्ञानिक मॉनिटरिंग और आंगनबाड़ी आधारित सेवाओं के असरदार संचालन का परिणाम है।
3. आधुनिक सुविधाओं से लैस हो रहे आंगनबाड़ी केंद्र
- प्रदेश में 11 हजार 490 आंगनबाड़ी केंद्रों को ‘सक्षम और आकर्षक’ बनाया जा रहा है, जहां ‘बिल्डिंग एज़ लर्निंग एड’ (BaLA) पेंटिंग और खेल-खेल में शिक्षा देने की पद्धति अपनाई जा रही है।
- मनरेगा अभिसरण के तहत 2 हजार 337 नए भवनों की स्वीकृति और पीएम जनमन व नियद नेल्ला नार 2.0 जैसी योजनाओं के जरिए दूर-दराज के इलाकों तक बाल सेवाएं पहुंचाई जा रही हैं।
- सेवा विस्तार के तहत आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं की संख्या में भी ऐतिहासिक वृद्धि की गई है, जिससे जमीनी स्तर पर सेवा की गुणवत्ता बेहतर हुई है।
4. ‘मिशन वात्सल्य’: अनाथ और निराश्रित बच्चों का सुरक्षा कवच
- विशेष देखभाल की जरूरत वाले बच्चों के लिए बाल देखरेख संस्थाओं की संख्या बढ़कर 109 हो गई है।
- मुख्यमंत्री बाल उदय योजना के तहत सैकड़ों बच्चों को मुख्यधारा से जोड़ा गया है। चाइल्ड हेल्पलाइन पर प्राप्त 1 लाख 65 हजार से अधिक कॉलों पर त्वरित कार्रवाई कर बच्चों को संकट से उबारा गया है।
- दत्तक ग्रहण (Adoption) और स्पॉन्सरशिप योजनाओं के दायरे में भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिससे बच्चों को बेहतर पारिवारिक माहौल और उज्ज्वल भविष्य मिल रहा है।
5. बाल विवाह मुक्त छत्तीसगढ़ की ओर ऐतिहासिक कदम
- सामाजिक कुप्रथा के खिलाफ छेड़ी गई मुहिम रंग ला रही है। प्रदेश में बाल विवाह प्रतिरोध अधिकारियों की संख्या बढ़ाकर 1 हजार 382 कर दी गई है।
- प्रशासनिक मुस्तैदी और जन-जागरूकता के कारण रोके गए बाल विवाहों का आंकड़ा बढ़कर 888 तक पहुंच गया है, जो हमारी बेटियों के सुरक्षित और शिक्षित भविष्य की दिशा में एक बड़ा सामाजिक परिवर्तन है।
विकसित छत्तीसगढ़ की मजबूत नींव
बाल विकास, आधुनिक आंगनबाड़ी व्यवस्था, पोषण सुधार और बाल विवाह जैसी कुप्रथाओं के उन्मूलन के लिए उठाए गए इन बहुआयामी कदमों ने छत्तीसगढ़ को एक प्रेरणादायी और आदर्श राज्य बना दिया है। जैसा कि स्पष्ट है—“सशक्त बचपन ही विकसित छत्तीसगढ़ की सबसे मजबूत नींव है”, और सरकार इसी संकल्प को साकार करने की दिशा में पूरी निष्ठा से आगे बढ़ रही है।
