रायपुर 11 सितम्बर | छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य के बुनियादी ढांचे, औद्योगिक विकास और ‘इज ऑफ डूइंग बिजनेस’ (Ease of Doing Business) को नई और अभूतपूर्व ऊंचाइयां देने की दिशा में एक बड़ा और साहसिक कदम उठाया है। आवास एवं पर्यावरण विभाग ने छत्तीसगढ़ भूमि विकास नियम, 1984 में व्यापक संशोधन का प्रारूप तैयार कर लिया है। इस बदलाव के तहत राज्य में अब पुरानी और जटिल अनुज्ञा व्यवस्था के स्थान पर ‘Negative List’ (निषिद्ध सूची) आधारित आधुनिक व्यवस्था लागू की जा रही है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत विजन@2047’ और केंद्र सरकार के डीरिगुलेशन (डिकंट्रोल) तथा अनुपालन बोझ (Compliance Burden) को कम करने के विजन के अनुरूप छत्तीसगढ़ ने देश के अग्रणी राज्यों में अपनी स्थिति दर्ज कराई है। इस नीतिगत सुधार से न केवल निवेशकों का मार्ग प्रशस्त होगा, बल्कि आम नागरिकों को भी भूमि उपयोग से जुड़ी हर उलझन से हमेशा के लिए मुक्ति मिल जाएगी।
क्या है ‘Negative List’ व्यवस्था और क्यों है यह क्रांतिकारी?
अब तक देश और राज्य के शहरी नियोजन (Town Planning) में ‘Positive List’ व्यवस्था लागू थी, यानी यह तय होता था कि किस ज़मीन पर क्या-क्या किया जा सकता है। इसके चलते तेजी से बदलती अर्थव्यवस्था, नई तकनीक, स्टार्टअप्स और आधुनिक व्यावसायिक सेवाओं के आगमन पर अक्सर कानूनी अड़चनें और लालफीताशाही आड़े आती थी।
लेकिन अब Negative List प्रणाली के तहत सरकार केवल यह स्पष्ट करेगी कि किस ज़मीन पर कौन सी गतिविधियां प्रतिबंधित (निषिद्ध) हैं।
- नया नियम: इस नेगेटिव लिस्ट में जो गतिविधियां शामिल नहीं होंगी, वे सभी स्वतः अनुमत (Permitted) मानी जाएंगी।
- भविष्य के लिए तैयार: इस लचीली व्यवस्था से न केवल वर्तमान की व्यावसायिक जरूरतें पूरी होंगी, बल्कि भविष्य में आने वाले नए सेक्टर और तकनीकी उद्योग भी बिना किसी कानूनी बाधा के स्थापित हो सकेंगे।
क्षेत्रवार स्पष्ट ‘निषिद्ध गतिविधियां’: अब नियोजन में पारदर्शिता और संतुलन
राज्य शासन ने आवासीय, वाणिज्यिक, औद्योगिक, कृषि और सार्वजनिक क्षेत्रों के लिए स्पष्ट और कड़े सुरक्षा मानकों के साथ निषिद्ध गतिविधियों की सूची तय की है:
- आवासीय क्षेत्र (सुरक्षा और पर्यावरण सर्वोपरि): रहवासी इलाकों में प्रदूषण फैलाने वाले उद्योग, बड़े कबाड़खाने, संक्रामक रोगों के अस्पताल, भारी भंडारण, जेल, तेल डिपो, गैस गोदाम, खनन और ज्वलनशील पदार्थों के व्यापार पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा, जिससे नागरिकों को स्वच्छ और सुरक्षित वातावरण मिले।
- वाणिज्यिक क्षेत्र (स्पष्ट व्यवसायिक श्रेणियां): व्यावसायिक क्षेत्रों में नारंगी, लाल एवं नीली श्रेणी के भारी उद्योगों, खतरनाक रसायनों और विस्फोटकों के भंडारण की अनुमति नहीं होगी।
- औद्योगिक क्षेत्र (कोर इंडस्ट्रियल फोकस): औद्योगिक क्षेत्रों को पूरी तरह सुरक्षित रखने के लिए वहां पूर्णतः आवासीय टाउनशिप, स्कूल, शयनागार और असंगत गतिविधियों को प्रतिबंधित किया गया है।
- कृषि और परिवहन क्षेत्र: कृषि भूमि पर बड़े मॉल, हाई-डेंसिटी आवासीय योजनाएं और भारी उद्योगों पर रोक रहेगी, हालांकि किफायती जन आवास (Affordable Housing) और एकीकृत उपनगरों को विशेष छूट दी जाएगी ताकि गरीबों के लिए घर का सपना आसान हो सके।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय और मंत्री श्री ओपी चौधरी के कड़े संकल्प
- मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने इस ऐतिहासिक कदम पर जोर देते हुए कहा कि “हमारी सरकार का मुख्य ध्येय नागरिकों, उद्यमियों और निवेशकों के लिए नियमों को सरल बनाना है। छत्तीसगढ़ में विकास के लिए एक अनुकूल, पारदर्शी और सुगम वातावरण तैयार किया जा रहा है। इस सुधार से प्रदेश में भारी मात्रा में निवेश आएगा, रोजगार के नए द्वार खुलेंगे और अधोसंरचना विकास को तीव्र गति मिलेगी।”
- आवास एवं पर्यावरण मंत्री श्री ओपी चौधरी ने स्पष्ट किया कि “हमारा उद्देश्य नियमन को पूरी तरह समाप्त करना नहीं, बल्कि उसे अधिक स्पष्ट, लचीला और परिणामोन्मुख बनाना है। नकारात्मक सूची के माध्यम से अनावश्यक नियामकीय बाधाएं समाप्त होंगी, जिससे राज्य की बदलती सामाजिक-आर्थिक जरूरतों के अनुसार भूमि का व्यावहारिक उपयोग संभव हो सकेगा।”
नागरिकों से मांगे गए सुझाव: जनभागीदारी से तय होगा भविष्य
इस महत्वपूर्ण संशोधन को अंतिम रूप देने से पहले राज्य शासन ने प्रदेश के आम नागरिकों, विशेषज्ञों, उद्योगपतियों और सभी संबंधित पक्षों से आपत्तियां एवं सुझाव आमंत्रित किए हैं। राजपत्र में प्रकाशन की तिथि से 15 दिनों की समयावधि के भीतर प्राप्त होने वाले सुझावों पर गंभीरता से विचार किया जाएगा और उसके बाद नियमों का अंतिम गजट नोटिफिकेशन जारी होगा।
यह सुधार छत्तीसगढ़ के इतिहास में मील का पत्थर साबित होगा, जो नियोजित विकास और आधुनिक अर्थव्यवस्था की आवश्यकताओं के बीच एक बेहतरीन और व्यावहारिक संतुलन स्थापित करेगा।
