तारा कोल ब्लॉक नीलामी और हसदेव-अरण्य क्षेत्र: प्रशासनिक स्थिति, वैज्ञानिक अध्ययन और पर्यावरण संरक्षण का संपूर्ण परिदृश्य

रायपुर, 13 सितंबर 2026 — छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण तारा कोल ब्लॉक के संदर्भ में राज्य खनिज विकास निगम ने वर्तमान स्थिति को पूरी तरह स्पष्ट करते हुए एक विस्तृत प्रशासनिक और नीतिगत परिप्रेक्ष्य साझा किया है। निगम ने जोर देकर कहा है कि फिलहाल इस ब्लॉक की केवल प्रतिस्पर्धात्मक नीलामी प्रक्रिया संपन्न हुई है, और धरातल पर किसी भी प्रकार का खनन कार्य आरंभ नहीं हुआ है। वास्तविक खनन गतिविधियां शुरू होने से पहले विधिक और पर्यावरणीय प्रावधानों के तहत अनेक कड़े पड़ाव पार करने होंगे।
1. नीलामी प्रक्रिया और वैधानिक अनुमतियों का अनिवार्य क्रम
तारा कोल ब्लॉक की हालिया प्रतिस्पर्धात्मक नीलामी में कुल 9 प्रतिस्पर्धी बोलियां प्राप्त हुई थीं। पारदर्शी नीलामी प्रक्रिया पूरी होने के बाद यह ब्लॉक CG Syn&Gas and Chemicals Limited के पक्ष में रहा है।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि कोल ब्लॉक की नीलामी, वन एवं पर्यावरण स्वीकृति और वास्तविक खनन की अनुमति तीनों अलग-अलग और क्रमिक चरण हैं। नीलामी में सफल होने मात्र से किसी भी कंपनी को स्वतः खनन, वन या पर्यावरण स्वीकृति का अधिकार नहीं मिल जाता। खनन शुरू करने से पहले निम्नलिखित वैधानिक अनुमतियां अनिवार्य रूप से प्राप्त करनी होंगी:
- विधिवत माइनिंग प्लान का अनुमोदन।
- खनन पट्टा (Mining Lease) का निष्पादन।
- पर्यावरण स्वीकृति (Environment Clearance)।
- वन स्वीकृति (Forest Clearance)।
- अन्य सभी आवश्यक वैधानिक अनुमतियां और अनुपालन।
इन सभी प्रक्रियाओं और अनुमोदनों के पूर्णतः संतुष्ट होने के बाद ही वास्तविक खनन गतिविधियां शुरू करने की वैधानिक अनुमति मिल सकेगी। इससे पहले क्षेत्र में एक भी वृक्ष की कटाई या वास्तविक खनन गतिविधि शुरू करने पर पूर्ण प्रतिबंध है।
2. हसदेव-अरण्य क्षेत्र: ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और पूर्ववर्ती निर्णय
हसदेव-अरण्य क्षेत्र में कोल ब्लॉकों के आवंटन और खनन से जुड़ी प्रक्रियाएं दीर्घकाल से चली आ रही हैं:
- वर्ष 2011 का आवंटन: तारा कोल ब्लॉक सबसे पहले वर्ष 2011 में छत्तीसगढ़ खनिज विकास निगम को आवंटित किया गया था, जिसे बाद में माननीय उच्चतम न्यायालय के ऐतिहासिक आदेश के परिणामस्वरूप अन्य कोल ब्लॉकों के साथ पूर्ववत निरस्त कर दिया गया था।
- पीईकेबी ब्लॉक की स्थिति: इसी अवधि में हसदेव क्षेत्र के अन्य कोल ब्लॉक विभिन्न सरकारी विद्युत उत्पादन संस्थाओं की जरूरतों से जुड़े रहे हैं। इनमें परसा ईस्ट केते बासन (पीईकेबी), राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड की विद्युत उत्पादन आवश्यकताओं के लिए आवंटित प्रमुख ब्लॉकों में शामिल रहा है।
- पूर्ववर्ती स्वीकृतियों का कालखंड: हसदेव-अरण्य क्षेत्र के कोल ब्लॉकों से संबंधित वन और पर्यावरण स्वीकृतियों की प्रक्रिया केंद्र की पूर्ववर्ती सरकारों के कार्यकाल में आगे बढ़ी थी। वर्ष 2011 में वन सलाहकार समिति की प्रतिकूल अनुशंसा के बावजूद केंद्रीय पर्यावरण एवं वन मंत्रालय के स्तर पर तारा और पीईकेबी के संबंध में वन स्वीकृति देने का निर्णय लिया गया था। पीईकेबी को जुलाई 2011 में स्टेज-1 और मार्च 2012 में स्टेज-2 फॉरेस्ट क्लीयरेंस प्राप्त हुई थी। इसी अवधि में परियोजना की पर्यावरणीय स्वीकृति की प्रक्रिया भी आगे बढ़ी थी।
3. व्यवस्था में बदलाव: प्रशासनिक और वाणिज्यिक पारदर्शिता
पूर्व की व्यवस्था और वर्तमान व्यवस्था में स्पष्ट अंतर है:
- पूर्ववर्ती व्यवस्था: इस प्रणाली में कोल ब्लॉक सरकारी कंपनियों या निर्धारित उपयोगकर्ता संस्थाओं को सीधे आवंटित किए जाते थे।
- वर्तमान व्यवस्था: अब वाणिज्यिक कोयला खनन के लिए पूरी तरह पारदर्शी प्रतिस्पर्धात्मक नीलामी प्रक्रिया अपनाई जाती है। तारा कोल ब्लॉक की मौजूदा प्रक्रिया इसी आधुनिक व्यवस्था के तहत संचालित हुई है।
4. ऊर्जा सुरक्षा, निरंतरता और राज्य के नीतिगत कदम
देश की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों, औद्योगिक विकास और विद्युत आपूर्ति की निरंतरता को बनाए रखने के लिए घरेलू कोयला संसाधनों की उपलब्धता अत्यंत महत्वपूर्ण है। हसदेव क्षेत्र में विभिन्न स्तरों पर प्रशासनिक और राजनीतिक निर्णय लिए जाते रहे हैं:
- राज्य के ऊर्जा हितों और कोयला उत्पादन की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए पूर्ववर्ती राज्य सरकार के कार्यकाल में भी वर्ष 2019 और 2021 में केंद्र सरकार से पत्राचार किया गया था।
- वर्ष 2022 में छत्तीसगढ़ विधानसभा द्वारा हसदेव क्षेत्र के कोल ब्लॉकों के संबंध में एक महत्वपूर्ण अशासकीय संकल्प भी पारित किया गया था।
- इसके अतिरिक्त, हसदेव-अरण्य क्षेत्र में कोयला संसाधनों के उपयोग का दायरा केवल तारा ब्लॉक तक सीमित नहीं है, बल्कि मोरगा कोल ब्लॉक के आवंटन का विषय भी प्रक्रियाधीन है। पूर्ववर्ती राज्य सरकार ने मदनपुर साउथ ब्लॉक (जिसे आंध्र प्रदेश मिनरल Development Corporation को आवंटित किया गया था) की तर्ज पर मोरगा कोल ब्लॉक को छत्तीसगढ़ खनिज विकास निगम के पक्ष में आवंटित करने के लिए केंद्रीय कोयला मंत्रालय से अनुरोध किया था, जिसमें यह उल्लेख था कि आवंटन के बाद पर्यावरण मंत्रालय से आवश्यक अनुमतियां प्राप्त की जाएंगी।
5. वैज्ञानिक अध्ययन और पर्यावरण संरक्षण की सर्वोच्च प्राथमिकता
भविष्य की खनन गतिविधियों के प्रभावों का आकलन करने के लिए भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद द्वारा एक विस्तृत वैज्ञानिक अध्ययन किया गया है। इस अध्ययन में जैव विविधता, वन्यजीव संरक्षण, जलग्रहण क्षेत्र (Catchment Area) और पर्यावरणीय संवेदनशीलता का गहन परीक्षण किया गया है। अध्ययन के आधार पर तारा सहित कुछ चुनिंदा कोल ब्लॉकों को कड़े पर्यावरणीय सुरक्षा उपायों और संरक्षण प्रावधानों के अधीन ही खनन के लिए विचार योग्य माना गया है।
राज्य सरकार वन संरक्षण और वृक्षारोपण को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता मानती है। फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया की रिपोर्ट-2023 के आधिकारिक आंकड़े इस बात के प्रमाण हैं कि वर्ष 2021 से 2023 के बीच छत्तीसगढ़ के वन क्षेत्राच्छादन में 683.62 वर्ग किलोमीटर की शुद्ध वृद्धि दर्ज की गई, जो देश के सभी राज्यों में सर्वाधिक है। इसके अतिरिक्त, इसी अवधि में राज्य के वनावरण में 702.75 वर्ग किलोमीटर की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि फारेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया 2021 में भी वर्ष 2019 की तुलना में करीब 106 वर्ग किलोमीटर की वृद्धि दर्ज की गई थी।
प्रशासनिक प्रतिबद्धता
राज्य खनिज विकास निगम ने पुनः स्पष्ट किया है कि तारा कोल ब्लॉक को लेकर स्थिति पूरी तरह पारदर्शी है। वर्तमान में केवल प्रतिस्पर्धात्मक नीलामी संपन्न हुई है, और किसी भी प्रकार का खनन शुरू नहीं हुआ है। सफल बोलीदाता को समस्त वैधानिक, वैज्ञानिक और पर्यावरणीय मानकों का कठोरता से पालन करना होगा। इस संपूर्ण प्रशासनिक प्रक्रिया का मूल उद्देश्य देश की ऊर्जा सुरक्षा, राज्य की विकास आवश्यकताओं, वन एवं पर्यावरण संरक्षण तथा स्थानीय नागरिकों के हितों के बीच एक आदर्श और सुदृढ़ संतुलन स्थापित करना है।
