🛡️ बेटियों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं: बीजापुर एकलव्य विद्यालय मामले पर सीएम विष्णु देव साय का कड़ा रुख, दोषियों पर तत्काल शिकंजा कसने के निर्देश!

“माता-पिता बड़े अरमानों और अटूट भरोसे के साथ अपने बच्चों को आवासीय विद्यालयों और छात्रावासों में भेजते हैं। इस पवित्र विश्वास की रक्षा करना शासन, प्रशासन और संस्था से जुड़े हर एक व्यक्ति की सर्वोपरि जिम्मेदारी है। बालिकाओं की सुरक्षा और उनकी गरिमा से खिलवाड़ करने वाले किसी भी दोषी को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।”
— श्री विष्णु देव साय, मुख्यमंत्री, छत्तीसगढ़
रायपुर, 13 सितंबर 2026:
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बालिकाओं की सुरक्षा को शासन की सर्वोच्च प्राथमिकता बनाते हुए एक बार फिर अपनी सख्त और संवेदनशील कार्यशैली का परिचय दिया है। बीजापुर जिले के प्रतिष्ठित एकलव्य आवासीय विद्यालय में छात्राओं के साथ कथित दुर्व्यवहार की गंभीर शिकायत सामने आते ही मुख्यमंत्री ने इसका स्वतः संज्ञान लिया है। उन्होंने बीजापुर जिला कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक को इस संवेदनशील मामले की तह तक जाकर निष्पक्ष जांच करने और तुरंत कठोरतम विधिसम्मत कार्रवाई करने के स्पष्ट निर्देश दिए हैं।
📌 मुख्यमंत्री के 5 महा-निर्देश: प्रशासन में हड़कंप
- शून्य सहनशीलता (Zero Tolerance): बालिकाओं के साथ दुर्व्यवहार, उत्पीड़न या उन्हें डराने-धमकाने जैसी घटनाओं पर किसी भी प्रकार की नरमी नहीं बरती जाएगी। शिकायत मिलते ही तुरंत और सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
- जवाबदेही और पारदर्शिता: यदि किसी भी स्तर पर मामले की गंभीरता को कम आंकने, शिकायत को दबाने या छिपाने का प्रयास किया गया, अथवा कर्तव्य में कोई लापरवाही पाई गई, तो सीधे तौर पर संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की जवाबदेही तय की जाएगी।
- नियमित और औचक निरीक्षण: प्रदेशभर के सभी कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक अपने-अपने जिलों में संचालित बालिका छात्रावासों, आश्रमों और आवासीय विद्यालयों का नियमित रूप से भौतिक निरीक्षण करें, जिससे सुरक्षा मानकों की जमीनी हकीकत का पता चल सके।
- प्रोटोकॉल और उपस्थिति की समीक्षा: संस्थानों में सुरक्षा संबंधी निर्धारित प्रोटोकॉल का कड़ाई से पालन हो। अधीक्षकों तथा अन्य उत्तरदायी कर्मियों की नियमित उपस्थिति, परिसरों की सुरक्षा व्यवस्था और बच्चों की समस्याओं के त्वरित निराकरण की पुख्ता व्यवस्था हो।
- भयमुक्त और संवादयुक्त वातावरण: संस्थानों में ऐसी पारदर्शी व्यवस्था विकसित की जाए जहाँ अध्ययनरत बेटियां बिना किसी भय, संकोच या दबाव के अपनी बात सीधे प्रबंधन या उच्चाधिकारियों तक पहुँचा सकें।
🔍 केवल शिकायतों का इंतजार नहीं, रोकथाम पर हो फोकस
मुख्यमंत्री श्री साय ने स्पष्ट किया है कि प्रशासन की भूमिका केवल तब तक सीमित नहीं रहनी चाहिए जब कोई अप्रिय घटना घटे या शिकायत सामने आए। इसके विपरीत, नियमित निरीक्षण, सतत संवाद और प्रभावी निगरानी के जरिए ऐसी परिस्थितियों को शुरुआत में ही भांपकर रोकने की पुख्ता व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए। विद्यालय और छात्रावास प्रबंधनों को कड़े शब्दों में चेतावनी दी गई है कि बच्चों की सुरक्षा में उदासीनता को सबसे बड़ा अपराध माना जाएगा।
🤝 काउंसलिंग और संबल का विशेष प्रावधान
प्रशासन को यह भी निर्देशित किया गया है कि यदि ऐसी किसी दुर्भाग्यपूर्ण घटना की पुष्टि होती है, तो त्वरित पुलिसिया कार्रवाई के साथ-साथ पीड़ित छात्राओं को विशेष काउंसलिंग (Counseling), चिकित्सीय सहायता और मानसिक संबल तुरंत उपलब्ध कराया जाए, ताकि वे बिना किसी मानसिक दबाव के अपनी सामान्य जीवनचर्या और पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित कर सकें।
🎯 : निर्भय होकर पढ़ेंगी बेटियां, पूरा होगा सपना
मुख्यमंत्री ने अपने संदेश के अंत में कहा कि प्रदेश की हर एक बेटी सुरक्षित माहौल में निर्भय होकर पढ़े, आगे बढ़े और अपने सपनों को ऊँचाइयाँ दे—यह हम सबकी सामूहिक नैतिक जिम्मेदारी है। इस दिशा में कोताही बरतने वाले किसी भी जिम्मेदार व्यक्ति को कानून के शिकंजे से बचने का मौका नहीं मिलेगा। राज्य सरकार बेटियों के मान-सम्मान और उनकी सुरक्षा के लिए पूरी दृढ़ता के साथ खड़ी है।
