‘जीरो टॉलरेंस’ का संकल्प, घोटालों की आंच और सियासत की कसौटी

रायपुर 17 सितम्बर।छत्तीसगढ़ के राजनीतिक विमर्श में पिछले कुछ समय से ‘घोटाला’ और ‘जेल’ दो ऐसे शब्द बन गए हैं, जो सत्ता और विपक्ष के बीच की लकीर को तय कर रहे हैं। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का हालिया बयान कि “पिछली सरकार घोटालेबाजों की सरकार थी, कई जेल में हैं और कुछ जाने की तैयारी में हैं”—महज एक राजनीतिक जुमला नहीं है, बल्कि यह राज्य की प्रशासनिक सफाई और आने वाले समय की राजनीतिक दिशा का एक सीधा घोषणापत्र है। मुख्यमंत्री के इस तीखे तेवर से साफ है कि सत्ता परिवर्तन के बाद भी भ्रष्टाचार का मुद्दा ठंडा नहीं पड़ने वाला, बल्कि यह और अधिक आक्रामक रूप अख्तियार करेगा।
छत्तीसगढ़ ने पिछले कुछ वर्षों में कथित तौर पर जिस तरह के संस्थागत भ्रष्टाचार को देखा है, उसने न केवल राज्य की आर्थिक स्थिति को चोट पहुंचाई, बल्कि इसकी साख को भी देश भर में मटियामेट किया। इस पूरे घटनाक्रम के केंद्र में तीन बड़े मामले हैं, जिनकी परतें अब जांच एजेंसियां एक-एक कर खोल रही हैं:
- शराब घोटाला (Liquor Scam): आबकारी विभाग को कथित तौर पर हाईजैक कर चलाए गए इस सिंडिकेट ने छत्तीसगढ़ को एक बड़े राजस्व घाटे में झोंका। द्वारा की गई जांच के बाद दायर फाइनल चार्जशीट और हाल ही में करीब 1,000 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्तियों की कुर्की ने यह साबित किया है कि गड़बड़ियां किस कदर गहरी थीं। कई बड़े रसूखदार नौकरशाह, राजनेता और कारोबारी इस सिंडिकेट के संचालन के आरोप में सलाखों के पीछे पहुंचे
- कोयला लेवी घोटाला (Coal Levy Scam): छत्तीसगढ़ की प्रचुर खनिज संपदा पर डाका डालते हुए प्रति टन ₹25 की अवैध वसूली का जो नेटवर्क तैयार किया गया था, वह किसी से छिपा नहीं है t. ईडी और आर्थिक अपराध शाखा (EOW) की जांच के तहत इस ₹540 करोड़ से अधिक के अवैध सिंडिकेट में शामिल कई अधिकारियों और बिचौलियों की जमानत याचिकाएं कोर्ट से लगातार खारिज होना यह बताता है कि कानून का शिकंजा कितना कस चुका है.
- सीजीपीएससी भर्ती घोटाला (CGPSC Scam): इन सबमें सबसे संवेदनशील और दर्दनाक घोटाला राज्य लोक सेवा आयोग (CGPSC) का रहा, जिसने सीधे तौर पर राज्य के होनहार युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया। नियमों को कथित रूप से ताक पर रखकर अपने चहेतों और रिश्तेदारों को डिप्टी कलेक्टर व डीएसपी जैसे उच्च पदों पर बैठाने के इस मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की चार्जशीट और ईडी द्वारा की गई गिरफ्तारियांt युवाओं के उस आक्रोश को सही ठहराती हैं जो वे सड़कों पर जता रहे थे।
जब सूबे का मुखिया सार्वजनिक मंच से यह कहता है कि ‘कुछ और लोग जेल जाने की तैयारी में हैं’, तो यह साफ संकेत देता है कि जांच की आंच अब उन सफेदपोशों और मुख्य सूत्रधारों तक पहुंचने वाली है जो अब तक खुद को सुरक्षित मान रहे थे।
इस पूरे घटनाक्रम के दो पहलू हैं। पहला पहलू प्रशासनिक शुचिता का है। छत्तीसगढ़ जैसे आदिवासी बहुल और विकासशील राज्य में जनता की गाढ़ी कमाई या युवाओं के रोजगार में भ्रष्टाचार सीधे तौर पर राज्य की रीढ़ पर हमला है। साय सरकार का ‘जीरो टॉलरेंस’ का यह रुख यदि अपने मुकाम तक पहुंचता है, तो यह भविष्य के लिए एक बड़ी नजीर बनेगा कि जनता के हक पर डाका डालने वालों का अंजाम क्या होता है।
दूसरा पहलू राजनीतिक विश्वसनीयता का है। लोकतंत्र में केवल आरोप लगाना काफी नहीं होता, बल्कि उसे तार्किक परिणति तक पहुंचाना होता है। साय सरकार ने जांच को जिस तेजी से आगे बढ़ाया है, उसने विपक्ष के खेमे में बेचैनी जरूर बढ़ा दी है। छत्तीसगढ़ की जनता इस समय कौतूहल और उम्मीद दोनों नजरों से सत्ता के इस ‘सफाई अभियान’ को देख रही है। राजनीति की बिसात बिछ चुकी है, और ‘जेल की तैयारी’ वाले इस बयान ने यह साफ कर दिया है कि आने वाले दिन प्रदेश की सियासत के लिए बेहद तपिश भरे होने वाले हैं।
