ऐतिहासिक निर्णय: EPFO की वेतन सीमा ₹15 हजार से बढ़कर हुई ₹25 हजार, देश के 51 लाख से अधिक श्रमिकों को मिलेगा सामाजिक सुरक्षा का सुरक्षा कवच
- मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति जताया आभार; कहा- ‘विकसित भारत’ के संकल्प को मिलेगी नई ताकत
- पेंशन, भविष्य निधि और बीमा के दायरे में आएंगे देश के लाखों कामगार परिवार, भविष्य होगा और अधिक सुरक्षित

रायपुर/नई दिल्ली 17 सितम्बर ।
देश के करोड़ों कामगारों के आर्थिक और सामाजिक कल्याण की दिशा में केंद्र सरकार ने एक युग बदलने वाला ऐतिहासिक निर्णय लिया है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के तहत अनिवार्य कवरेज की वेतन सीमा को ₹15,000 से बढ़ाकर ₹25,000 प्रति माह करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। सरकार के इस दूरदर्शी फैसले से देश के 51 लाख से अधिक अतिरिक्त कर्मचारी सीधे तौर पर भविष्य निधि (PF), पेंशन (EPS) और कर्मचारी जमा संबद्ध बीमा (EDLI) जैसी आवश्यक सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के दायरे में आ जाएंगे।
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने केंद्र सरकार के इस निर्णय का हृदय से स्वागत करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह निर्णय देश के श्रम बल को सशक्त करने और ‘विकसित भारत’ के संकल्प को साकार करने की दिशा में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर साबित होगा।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने अभिनंदनीय फैसले पर दी बधाई
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने सोशल मीडिया और आधिकारिक बयान के जरिए इस फैसले की सराहना करते हुए कहा, “आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा लिया गया यह निर्णय अत्यंत अभिनंदनीय है। देश के करोड़ों कामगारों की सामाजिक सुरक्षा को इससे नया विस्तार और मजबूती मिलेगी।” उन्होंने आगे कहा कि इस ऐतिहासिक कदम से न केवल 51 लाख से अधिक अतिरिक्त श्रमिकों को पेंशन और बीमा का लाभ मिलेगा, बल्कि उनके परिवारों के सुरक्षित भविष्य का आधार भी मजबूत होगा। श्रमिक कल्याण के प्रति प्रधानमंत्री मोदी की प्रतिबद्धता देश के विकास की नई इबारत लिख रही है।
12 साल बाद हुआ वेतन सीमा में ऐतिहासिक बदलाव
गौरतलब है कि EPFO की अनिवार्य कवरेज सीमा में यह बदलाव करीब एक दशक के लंबे अंतराल के बाद किया गया है। इससे पहले साल 2014 में इस सीमा को ₹6,500 से बढ़ाकर ₹15,000 किया गया था। पिछले कुछ वर्षों में देश के भीतर बढ़े वेतनमान, जीवन स्तर में सुधार और औपचारिक रोजगार (Formal Employment) के विस्तार को देखते हुए केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने इस सीमा को बढ़ाने का प्रस्ताव रखा था, जिसे केंद्रीय कैबिनेट ने तत्काल मंजूरी दे दी।
कामगारों को क्या मिलेंगे बड़े फायदे?
- बचत का बड़ा कोष: ₹15,000 से ₹25,000 के वेतन ब्रैकेट में आने वाले मध्य-कुशल (Mid-skilled) श्रमिक अब अनिवार्य रूप से पीएफ के दायरे में आएंगे, जिससे रिटायरमेंट के समय उनके पास एक बड़ा फंड होगा।
- पेंशन में भारी बढ़ोतरी: कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) में योगदान की सीमा बढ़ने से श्रमिकों को सेवानिवृत्ति के बाद हर महीने मिलने वाली पेंशन राशि में भी उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
- बढ़ा हुआ मुफ्त बीमा लाभ: EPFO सदस्यों को मिलने वाले कर्मचारी जमा संबद्ध बीमा योजना (EDLI) के तहत मिलने वाला अधिकतम जीवन बीमा कवर भी इस नई वेतन सीमा के अनुरूप बढ़ जाएगा, जिससे श्रमिक की मृत्यु की स्थिति में आश्रितों को बड़ी आर्थिक मदद मिलेगी。
मजबूत होगी भारत की सामाजिक सुरक्षा प्रणाली
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, वर्तमान में EPFO के पास लगभग 7.98 करोड़ अंशदाता सदस्य (Contributing Members) हैं और इसकी पेंशन योजना का लाभ करीब 82 लाख पेंशनभोगी उठा रहे हैं। इस नए फैसले के लागू होने के बाद औपचारिक क्षेत्र (Formal Sector) में काम करने वाले कर्मचारियों का दायरा बहुत बड़ा हो जाएगा। हालांकि, इस फैसले से नियोक्ताओं (Employers) की वैधानिक लागत में थोड़ी वृद्धि होगी, लेकिन यह कदम देश के कार्यबल को वित्तीय स्थिरता प्रदान करने के लिए बेहद जरूरी माना जा रहा था।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने विश्वास जताया है कि इस निर्णय का सीधा लाभ छत्तीसगढ़ के भी हजारों औद्योगिक, निर्माण और संगठित क्षेत्रों में काम करने वाले श्रमिकों को मिलेगा। उनके जीवन स्तर में सुधार आएगा और वे अधिक सुरक्षित महसूस कर देश की प्रगति में अपना योगदान दे सकेंगे।
