खेतों की उम्मीदों को नया जीवन: प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना बनी तरुण चंदेल का संबल
संकट के बादल और खेती की अनिश्चितता

छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले का शांत और सुदूर ग्राम बिंजली। यहाँ की सोंधी मिट्टी में अपनी मेहनत का पसीना बहाने वाले तरुण चंदेल जैसे किसान हर सुबह एक नए संघर्ष और उम्मीद के साथ अपने दिन की शुरुआत करते हैं। तरुण चंदेल के पास लगभग 4 एकड़ की कृषि भूमि है, जो उनके पाँच सदस्यों वाले परिवार के भरण-पोषण का इकलौता जरिया है।
गाँव के अधिकांश किसानों की तरह तरुण भी मौसम के रहमो-करम पर निर्भर हैं। कभी मानसून की बेरुखी, कभी बादलों की लुकाछिपी, तो कभी अचानक आने वाली प्राकृतिक आपदाएँ—खेती हमेशा से एक जुए जैसी रही है। तरुण के लिए हर फसल चक्र के साथ अनिश्चितता का एक अदृश्य खतरा जुड़ा रहता था। बीज की खरीद से लेकर खाद, जुताई, कटाई और श्रम तक—वे अपनी गाढ़ी कमाई और कर्ज का ताना-बाना बुनकर फसल तैयार करते थे। लेकिन जब प्रकृति का प्रकोप बरसता, तो महीनों की मेहनत पलभर में स्वाहा हो जाती थी।
जब आपदा ने तोड़ी रीढ़, तब आगे आया ‘सुरक्षा कवच’
वर्ष 2025-26 का फसल सीजन तरुण चंदेल के लिए किसी बड़े इम्तिहान से कम नहीं रहा। उन्होंने पूरी शिद्दत से अपनी 4 एकड़ जमीन पर फसल उगाई थी, लेकिन मौसम की मार और प्राकृतिक आपदा ने उनकी पूरी मेहनत पर पानी फेर दिया। लहलहाती फसल आँखों के सामने बर्बाद हो गई। उस पल तरुण के माथे पर चिंता की गहरी लकीरें थीं, क्योंकि परिवार की आजीविका और अगली फसल के लिए पूँजी दोनों दाँव पर लग चुकी थीं।
“खेती में आसमान की तरफ देखना हमारी मजबूरी है। जब फसल बर्बाद होती है, तो लगता है जैसे पैरों तले जमीन खिसक गई हो। समझ नहीं आता कि परिवार का पेट कैसे पालें और अगली बुआई के लिए पैसे कहाँ से लाएँ।” — तरुण चंदेल (लाभान्वित किसान)
लेकिन इस बार तस्वीर दूसरी थी। समझदारी दिखाते हुए तरुण ने पहले ही प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत अपनी फसल का बीमा करवा रखा था। आपदा की इस घड़ी में यही योजना उनके लिए एक मजबूत सुरक्षा कवच साबित हुई।
पारदर्शिता और त्वरित प्रक्रिया: खाते में पहुँचे 28 हजार रुपए
फसल के नुकसान के बाद तरुण ने बिना समय गँवाए नियमानुसार बीमा दावा प्रस्तुत किया। कृषि विभाग और बीमा कंपनी के मैदानी अमले ने त्वरित कार्रवाई करते हुए पारदर्शी तरीके से फसल क्षति का आकलन किया।
कुछ ही समय बाद, 28 हजार रुपए की बीमा दावा राशि सीधे तरुण चंदेल के बैंक खाते में ट्रांसफर कर दी गई। इतनी कम अवधि में मिली इस बड़ी आर्थिक मदद ने उनके संकट के बादलों को छँटा दिया।
- आर्थिक दबाव से मुक्ति: इस राशि ने उनके सिर से कर्ज और उधारी का भारी बोझ कम कर दिया।
- अगली फसल की तैयारी: तरुण अब बिना किसी मानसिक तनाव के आगामी कृषि सत्र की तैयारियों में जुट गए हैं।
- बढ़ा हुआ आत्मविश्वास: आपदा के भंवर से निकले तरुण का कृषि कार्य के प्रति खोया हुआ विश्वास फिर से लौट आया है।
‘सेवा संकल्प अभियान’: जन-जन तक पहुँच रही शासन की कल्याणकारी योजनाएँ
वर्तमान में छत्तीसगढ़ शासन द्वारा 17 सितंबर से 17 अक्टूबर 2026 तक ‘सेवा संकल्प अभियान’ चलाया जा रहा है। इस महाअभियान का मुख्य उद्देश्य सरकार की हर जनकल्याणकारी योजना को समाज के अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति तक पहुँचाना है।
नारायणपुर अंचल में इस अभियान के तहत किसानों को कृषि जोखिमों से बचाने, उन्हें प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना से जोड़ने और जागरूक करने का सघन कार्य किया जा रहा है। तरुण चंदेल की सफलता की यह दास्तान इस बात का सबसे बड़ा उदाहरण है कि कैसे प्रशासनिक सजगता और सही योजनाएँ धरातल पर चमत्कारिक परिणाम दे सकती हैं।
उम्मीदों को मिली नई उड़ान
आज तरुण चंदेल का चेहरा एक अलग ही संतोष और आत्मविश्वास से चमक रहा है। वे गर्व से कहते हैं कि शासन की इस योजना ने उन्हें टूटने नहीं दिया, बल्कि एक नई शुरुआत करने का संबल दिया है।
ग्राम बिंजली से उठी तरुण चंदेल की यह कहानी छत्तीसगढ़ के हर उस किसान के लिए प्रेरणा है, जो प्रकृति की मार से निराश होकर हार मान बैठते हैं। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना ने साबित कर दिया है कि यदि सही समय पर सुरक्षा का चक्र मिल जाए, तो अन्नदाता की उम्मीदों को कभी भी टूटने से बचाया जा सकता है।
