डिजिटल पंख: क्रेडिट बैंक और डिजीलॉकर से गढ़ी ‘कहानी बदलाव की’, पूरा हुआ ‘सेवा का संकल्प’
लेखक: विष्णु प्रसाद वर्मा (सहायक संचालक) स्थान एवं दिनांक: रायपुर, 19 सितंबर 2026

: शिक्षा के गलियारों में डिजिटल क्रांति
राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के अंतर्गत केंद्र सरकार एवं छत्तीसगढ़ शासन के उच्च शिक्षा विभाग के यशस्वी समन्वय से शुरू हुई ‘एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट’ (ABC) और डिजीलॉकर एकीकरण योजना ने आज राज्य के शैक्षणिक परिदृश्य को पूरी तरह से बदल कर रख दिया है। सत्र 2023-24 से अंकुरित हुई यह डिजिटल व्यवस्था वर्ष 2026 में आकर अपने पूर्ण परिपक्व और विराट स्वरूप को प्राप्त कर चुकी है, जिससे छत्तीसगढ़ के 6.5 लाख से अधिक छात्र-छात्राओं का भविष्य आज सुरक्षित, पारदर्शी और अत्यंत सुगम हो चुका है।
यह पहल महज़ एक तकनीकी उन्नयन नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ के सुदूर वनांचल से लेकर महानगरों तक सुशासन, पारदर्शिता और ‘सेवा आपके द्वार’ की लोक-कल्याणकारी अवधारणा को चरितार्थ करने का जीवंत प्रमाण है।
डिजिटल लॉकर: अब दस्तावेज खोने का डर खत्म, आत्मनिर्भर हुआ युवा
पारंपरिक शिक्षा प्रणाली में अंकसूचियों, डिग्रियों और माइग्रेशन प्रमाण पत्रों को संभालकर रखना और जरूरत पड़ने पर उनका सत्यापन करवाना विद्यार्थियों के लिए किसी संघर्ष से कम नहीं था। लेकिन अब ‘नेशनल एकेडमिक डिपॉजिटरी’ (NAD) और डिजीलॉकर के सहज एकीकरण ने इस पूरी व्यवस्था को कागज़ के बोझ से मुक्त कर दिया है।
- तत्काल उपलब्धता: राज्य के विश्वविद्यालयों से जुड़े छात्रों की डिग्रियां और अंकसूचियां अब सीधे उनके डिजीलॉकर में सुरक्षित डिजिटल फॉर्मेट में उपलब्ध हो रही हैं।
- कानूनी मान्यता: आईटी अधिनियम के तहत ये डिजिटल दस्तावेज मूल हार्ड कॉपी के पूरी तरह समकक्ष और कानूनी रूप से मान्य हैं।
- समय और श्रम की बचत: नौकरियों के लिए आवेदन करना हो, उच्च शिक्षा हेतु प्रवेश लेना हो या दस्तावेजों का सत्यापन कराना हो—युवाओं को अब विश्वविद्यालयों या कॉलेजों के चक्कर काटने से मुक्ति मिल गई है। दस्तावेजों के गुम होने या आग-पानी से खराब होने का जोखिम अब शून्य हो चुका है।
विद्यार्थियों के जीवन में ‘कहानी बदलाव की’: शून्य नहीं, अब हर प्रयास का मोल
इस परिवर्तनकारी योजना का सबसे बड़ा और क्रांतिकारी पहलू ‘मल्टीपल एंट्री एंड एग्जिट’ (प्रवेश और निकास के बहुविकल्पीय अवसर) का प्रावधान है। पहले यदि किसी छात्र को पारिवारिक, आर्थिक या अन्य व्यक्तिगत कारणोंवश बीच में ही अपनी पढ़ाई छोड़नी पड़ती थी, तो उसकी वर्षों की मेहनत और परीक्षा परिणाम ‘शून्य’ मान लिए जाते थे।
- क्रेडिट बैंक की सुरक्षा: आज स्थिति बिल्कुल बदल चुकी है। मान लीजिए बस्तर या दंतेवाड़ा का कोई छात्र दो वर्ष की पढ़ाई के बाद किन्हीं कारणों से कॉलेज नहीं जा पाता है, तो उसके द्वारा अर्जित सभी अकादमिक क्रेडिट उसकी यूनिक ‘ABC ID’ में सुरक्षित रूप से जमा हो जाते हैं।
- शिक्षा की निरंतरता: कुछ वर्षों बाद जब परिस्थितियां अनुकूल होती हैं, तो वह छात्र रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग या देश के किसी भी अन्य प्रतिष्ठित केंद्रीय व राज्य विश्वविद्यालय में अपनी पढ़ाई को नए सिरे से शुरू न करके, सीधे अगले वर्ष में प्रवेश पा सकता है।
- सपनों को नई उड़ान: इस व्यवस्था ने यह सुनिश्चित कर दिया है कि किसी भी परिस्थिति में युवा की मेहनत बेकार न जाए और आर्थिक तंगी या भौगोलिक दूरियां उसके सपनों की उड़ान को रोक न सकें।
शत-प्रतिशत केंद्रीय सहयोग: सुकमा से सरगुजा तक डिजिटल सशक्तिकरण
इस व्यापक अभियान की सफलता के पीछे केंद्र सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) और शिक्षा मंत्रालय की दूरदर्शिता निहित है। शत-प्रतिशत तकनीकी एवं वित्तीय सहायता के परिणामस्वरूप राज्य को यह अत्याधुनिक डिजिटल बुनियादी ढांचा पूरी तरह निःशुल्क प्राप्त हुआ है।
- व्यापक पहुंच: पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय (रायपुर), अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय (बिलासपुर), शहीद महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय (बस्तर) सहित राज्य के सभी 33 जिलों के शासकीय और निजी महाविद्यालय इस नेटवर्क से सुदृढ़ रूप से जुड़ चुके हैं।
- डिजिटल फासले का अंत: बस्तर के सुदूर वनांचल सुकमा, बीजापुर से लेकर उत्तर छत्तीसगढ़ के सरगुजा और जशपुर तक के आदिवासी बहुविध छात्रों को देशव्यापी स्तर पर क्रेडिट ट्रांसफर की सुविधा मिल रही है। इससे शहरी और ग्रामीण शिक्षा के बीच की खाई हमेशा के लिए पट चुकी है।
सेवा का संकल्प और विकसित छत्तीसगढ़ का निर्माण
“डिजिटल पंख” केवल एक योजना का नाम नहीं है, बल्कि यह छत्तीसगढ़ के लाखों विद्यार्थियों के पंखों को मिला वह आत्मविश्वास है जिसके सहारे वे आज वैश्विक प्रतिस्पर्धा में खड़े होने का सामर्थ्य रखते हैं। शिक्षा के क्षेत्र में उठाया गया यह कदम राज्य को ‘डिजिटल इंडिया’ के सपने के साथ कदमताल करने की शक्ति दे रहा है।
क्रेडिट बैंक और डिजीलॉकर की यह सफल गाथा यह सिद्ध करती है कि जब सुशासन, तकनीक और युवाओं की मेहनत एक दिशा में मिलती हैं, तो बदलाव केवल कल्पना नहीं, बल्कि एक हकीकत बन जाता है। छत्तीसगढ़ के युवाओं के लिए यह वास्तव में एक स्वर्णिम युग की शुरुआत है, जहाँ हर युवा का भविष्य सुरक्षित है और हर संकल्प पूरा हो रहा है।
: इस अभियान से जुड़ी अपनी यूनिक एकेडमिक क्रेडिट आईडी (ABC ID) और डिजीलॉकर सेवाओं की अधिक जानकारी के लिए अपने संबंधित महाविद्यालय के प्रशासनिक कक्ष या आधिकारिक पोर्टल
abc.gov.inपर संपर्क करें।
