रायपुर, 6 अगस्त 2026 — विश्व आदिवासी दिवस (ट्राइबल डे) के पावन अवसर पर आगामी 09 अगस्त से 11 अगस्त 2026 तक राजधानी रायपुर में छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को समर्पित एक भव्य तीन दिवसीय फोटो प्रदर्शनी का आयोजन किया जा रहा है। “छत्तीसगढ़ की अद्भुत एवं विविध जनजातीय संस्कृति” विषय पर आधारित यह अनूठी प्रदर्शनी नालंदा परिसर के पास, जी.ई. रोड स्थित कला केंद्र परिसर में आयोजित होगी, जो प्रतिदिन दोपहर 12:00 बजे से शाम 7:00 बजे तक कला प्रेमियों और आम नागरिकों के लिए खुली रहेगी।

गरिमामयी उपस्थिति
यह प्रतिष्ठित आयोजन छत्तीसगढ़ जन विकास एवं सशक्तिकरण सहयोग संस्था, क्लाउड, संस्कृति विभाग तथा सहयोगी संस्थाओं — ग्रेसियस ग्रुप ऑफ नर्सिंग कॉलेज एवं कला केंद्र रायपुर के संयुक्त तत्वावधान में संपन्न हो रहा है।
प्रदर्शनी का औपचारिक शुभारंभ 09 अगस्त को ट्राइबल डे के अवसर पर होगा, जिसमें प्रदेश के कई जाने-माने विशिष्ट अतिथि अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराएंगे:
- डॉ. संजय कन्नौजे (आई.ए.एस.) – संचालक, संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग
- श्री प्रभात मिश्रा – अध्यक्ष, राजभाषा आयोग
- श्री उमेश मिश्रा – उप संचालक, संस्कृति विभाग
- डॉ. अभिलाषा बेहर – सचिव, राजभाषा आयोग
- डॉ. आशुतोष शुक्ला – डायरेक्टर, ग्रेसियस ग्रुप ऑफ नर्सिंग कॉलेज
दुर्लभ छायाचित्रों के जरिए दिखेगी जनजातीय जीवन की सजीव झलक
इस बहुप्रतीक्षित फोटो प्रदर्शनी का मुख्य उद्देश्य छत्तीसगढ़ की प्राचीन और समृद्ध जनजातीय संस्कृति, उनकी अनूठी लोक परंपराओं, पारंपरिक रीति-रिवाजों, लोककलाओं, पारंपरिक वेशभूषा, उत्सवों और जीवनशैली को आम जनता, विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों के रूबरू कराना है।
प्रदर्शनी में प्रदर्शित होने वाले दुर्लभ एवं आकर्षक छायाचित्रों के माध्यम से बस्तर से लेकर सरगुजा तक फैली जनजातियों की विशिष्ट पहचान, उनके रहन-सहन और प्रकृति के साथ उनके अनूठे व गहरे सहजीवी संबंधों को बेहद करीब से महसूस किया जा सकेगा।
सांस्कृतिक संरक्षण की दिशा में एक ऐतिहासिक और सराहनीय पहल
आयोजकों का मानना है कि यह आयोजन राज्य की बहुरंगी सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण, संवर्धन और इसे आने वाली भावी पीढ़ी तक सुरक्षित रूप से हस्तांतरित करने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा।
आयोजक संस्थाओं ने प्रदेश के समस्त कला एवं संस्कृति प्रेमियों, विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं, कलाकारों और फोटोग्राफी के शौकीनों से अपील की है कि वे अधिक से अधिक संख्या में इस प्रदर्शनी में पहुँचकर छत्तीसगढ़ की गौरवशाली जनजातीय विरासत का अवलोकन करें और इस ऐतिहासिक आयोजन को सफल बनाएं।
