ममता शर्मसार: सरगुजा के दरिमा में खेत में लावारिस मिली नवजात, ग्रामीणों ने बचाई जान; मुख्यमंत्री ने दिए वीआईपी इलाज और पुख्ता संरक्षण के निर्देश
दिल दहला देने वाली घटना: कड़कड़ाती ठंड और खुले आसमान के नीचे तड़प रही थी मासूम, चीख सुनकर दौड़े ग्रामीण, अस्पताल में भर्ती

विशेष संवाददाता, रायपुर/अम्बिकापुर
01 अक्टूबर 2026
छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले के दरिमा क्षेत्र से ममता को शर्मसार कर देने वाली एक बेहद दर्दनाक घटना सामने आई है, जिसने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। यहां एक बेबस और नवजात बच्ची खुले खेत में लावारिस और असहाय अवस्था में पड़ी हुई मिली। इस मासूम को कड़कड़ाती सुबह (या मौसम के अनुकूल) खुले आसमान के नीचे लावारिस छोड़ दिया गया था। बच्ची की रोने की आवाज सुनकर पास से गुजर रहे ग्रामीणों की नजर उस पर पड़ी, जिसके बाद तत्परता दिखाते हुए ग्रामीणों ने मानवता की मिसाल पेश की और उसे तत्काल सुरक्षित स्थान पर लाकर इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया।
इस संवेदनशील मामले की जानकारी मिलते ही शासन-प्रशासन पूरी तरह हरकत में आ गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए उच्च स्तरीय निर्देश जारी किए गए हैं कि बच्ची के स्वास्थ्य की नियमित और कड़ी निगरानी की जाए। डॉक्टरों की टीम को निर्देशित किया गया है कि चिकित्सकीय आवश्यकता के अनुरूप सभी जरूरी जीवनरक्षक सुविधाएं और बेहतरीन इलाज तत्काल बिना किसी देरी के उपलब्ध कराया जाए।
ग्रामीण बने देवदूत: चीख सुनकर पहुंचे, खुद के कपड़ों में लपेटकर बचाई जान
स्थानीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, दरिमा क्षेत्र के एक सूने खेत के पास से जब कुछ ग्रामीण गुजर रहे थे, तब उन्हें किसी नवजात के बिलखने की आवाज सुनाई दी। जब ग्रामीण आवाज की दिशा में बढ़े, तो खेत के बीचों-बीच बिना कपड़ों के एक नवजात बच्ची तड़पती हुई पाई गई। बच्ची की हालत देखकर ग्रामीणों का कलेजा मुंह को आ गया।
बिना एक पल गंवाए, ग्रामीणों ने संवेदनशीलता दिखाई और अपने कपड़ों में मासूम को लपेटकर उसे गर्माहट दी। इसके बाद तुरंत स्थानीय स्वास्थ्य केंद्र और पुलिस को सूचना दी गई। ग्रामीणों की इस त्वरित सूझबूझ और मानवता के कारण ही आज इस मासूम की सांसें चल रही हैं।
प्रशासनिक अमले को कड़े निर्देश: इलाज से लेकर पालन-पोषण तक संवेदनशीलता बरतने की हिदायत
इस घटना पर दुख और चिंता व्यक्त करते हुए संबंधित विभागों को कड़े और संवेदनशील रुख अपनाने के निर्देश दिए गए हैं। उच्च अधिकारियों ने स्पष्ट कहा है, “नवजात बच्ची का इस तरह असहाय अवस्था में मिलना बेहद पीड़ादायक और विचलित करने वाला है। स्वास्थ्य विभाग बच्ची की सेहत की चौबीसों घंटे निगरानी करे। उसे ठीक करने के लिए जो भी चिकित्सकीय सुविधाएं जरूरी हैं, वे तत्काल दी जाएं।”
इसके साथ ही, महिला एवं बाल विकास विभाग तथा बाल संरक्षण इकाई (Child Welfare Committee) को भी इस मामले में पूरी जिम्मेदारी और संवेदनशीलता के साथ आगे की कानूनी और पालन-पोषण से संबंधित प्रक्रिया पूरी करने को कहा गया है। प्रशासन ने यह सुनिश्चित करने का संकल्प लिया है कि इस बच्ची के भविष्य, शिक्षा और सुरक्षा की जिम्मेदारी में कोई कमी नहीं आने दी जाएगी।
पुलिस जुटी जांच में, ‘कलयुगी’ माता-पिता की तलाश तेज
इधर, घटना की सूचना मिलते ही दरिमा थाना पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस आसपास के गांवों के स्वास्थ्य केंद्रों, मितानीनों और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं से संपर्क कर रही है ताकि हाल ही में हुए प्रसव (Deliveries) का रिकॉर्ड खंगाला जा सके। पुलिस का कहना है कि मासूम को इस तरह मौत के मुंह में धकेलने वाले दोषियों को कतई बख्शा नहीं जाएगा और जल्द ही उन्हें सलाखों के पीछे भेजा जाएगा।
कहाँ खो गई इंसानियत?
सरगुजा के दरिमा की इस घटना ने एक बार फिर समाज के सामने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक तरफ जहां लोग संतान के लिए दर-दर भटकते हैं, वहीं दूसरी तरफ एक मासूम फूल जैसी बच्ची को इस तरह मरने के लिए खेत में छोड़ देना क्रूरता की पराकाष्ठा है। सलाम है दरिमा के उन ग्रामीणों को जिन्होंने समय रहते देवदूत बनकर इस बच्ची को नया जीवन दिया। अब समाज और सरकार दोनों का फर्ज है कि इस ‘प्रदेश की बेटी’ को वो सम्मान और सुरक्षित भविष्य मिले, जिसकी वह हकदार है।
