छत्तीसगढ़ में भारी बारिश से हाहाकार: 17 जिलों के 550 से अधिक गांव बाढ़ की चपेट में, 22,000 लोग प्रभावित
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का बड़ा फैसला: प्रभावितों को तुरंत राहत देने के लिए युद्ध स्तर पर सर्वे शुरू करने के निर्देश
आरबीसी 6-4 के तहत मिलेगी तत्काल आर्थिक सहायता, बस्तर और सुकमा में CM ने खुद किया जमीनी दौरा

विशेष मुख्य संवाददाता
रायपुर, 1 अक्टूबर।
छत्तीसगढ़ में पिछले तीन-चार दिनों से हो रही मूसलाधार बारिश ने प्रदेश के एक बड़े हिस्से में भारी तबाही मचाई है। राज्य के 17 जिलों के 550 से अधिक गांव इस वक्त बाढ़ और जलभराव की सीधी चपेट में हैं, जिससे 22,000 से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं। इस प्राकृतिक आपदा में अब तक 8 लोगों की जान जाने और 172 मवेशियों की हानि होने की दुखद पुष्टि हुई है। नदी-नाले उफान पर होने के कारण सैकड़ों गांवों का संपर्क जिला मुख्यालयों से पूरी तरह कट गया है।
इस भयावह स्थिति को देखते हुए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय पूरी तरह एक्शन मोड में हैं। उन्होंने आपदा प्रभावित क्षेत्रों का खुद हवाई व जमीनी दौरा कर स्थिति का जायजा लिया है। मुख्यमंत्री ने सभी जिला कलेक्टरों को सख्त लहजे में निर्देश दिया है कि बिना किसी देरी के राजस्व पुस्तक परिपत्र (आरबीसी 6-4) के तहत नुकसान का त्वरित सर्वे कराया जाए और प्रभावितों के खातों में तत्काल मुआवजा राशि ट्रांसफर की जाए। साथ ही, जिन परिवारों का घरेलू सामान पूरी तरह नष्ट हो गया है, उन्हें मुख्यमंत्री राहत कोष से 10,000 रुपये अतिरिक्त देने की घोषणा की गई है।
ये 17 जिले सबसे ज्यादा प्रभावित, नदियां खतरे के निशान के पार
बाढ़ का सबसे भीषण रूप दक्षिण और मध्य छत्तीसगढ़ में देखने को मिला है। प्रभावित होने वाले मुख्य 17 जिलों में शामिल हैं:
- बस्तर संभाग: बस्तर, सुकमा, दंतेवाड़ा, बीजापुर और कांकेर।
- रायपुर एवं दुर्ग संभाग: रायपुर, दुर्ग, बालोद, धमतरी, गरियाबंद, महासमुंद, बेमेतरा, कबीरधाम और राजनांदगांव।
- बिलासपुर संभाग: मुंगेली, सारंगढ़-बिलाईगढ़ और जांजगीर-चांपा।
इंद्रावती, शबरी, शिवनाथ, महानदी और खारून नदियां इस समय उफान पर हैं। सुकमा में शबरी नदी के बढ़ते जलस्तर के कारण कोंटा नगर पालिका के चार वार्ड पूरी तरह जलमग्न हो चुके हैं, जबकि बस्तर में इंद्रावती नदी का पानी खेतों और बस्तियों में घुसने से हजारों एकड़ फसल तबाह हो गई है।
NDRF और SDRF का महा-रेस्क्यू: 16,000 से अधिक लोग सुरक्षित निकाले गए
बाढ़ में फंसे लोगों को बचाने के लिए राज्य आपदा मोचन बल (SDRF), राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) और नगर सेना के जवान पिछले 72 से 96 घंटों से बिना थके युद्ध स्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन चला रहे हैं।
- 16,000 से ज्यादा लोगों का रेस्क्यू: अब तक अत्यंत संवेदनशील इलाकों से 16,000 से अधिक नागरिकों को सुरक्षित निकालकर राहत शिविरों में पहुंचाया गया है। बस्तर के कुछ सुदूर क्षेत्रों में फंसे लोगों को निकालने के लिए हेलीकॉप्टरों की भी मदद ली गई है।
- राजधानी रायपुर में तैनाती: रायपुर के तटीय गांवों और निचले शहरी इलाकों जैसे भाठागांव, चंदनीडीह, दतरेंगा और काठाडीह में टीमों ने नावों के जरिए अभियान चलाकर सैकड़ों लोगों को निकाला। दतरेंगा के आयुष नर्सिंग कॉलेज में फंसी 22 छात्राओं को जवानों ने सुरक्षित रेस्क्यू किया।
- दुर्ग और धमतरी में साहसिक रेस्क्यू: दुर्ग जिले के परसदा में उफनती नदी के बीच घने अंधेरे में जवानों ने 55 से अधिक ग्रामीणों को बाहर निकाला। वहीं धमतरी के लोमश ऋषि आश्रम में फंसे 9 लोगों को पुलिस और स्थानीय प्रशासन की मदद से सुरक्षित निकाला गया।
जमीनी रिपोर्ट: राहत शिविर बने सहारा, फसलें पूरी तरह बर्बाद
बाढ़ पीड़ितों के ठहरने और भोजन के लिए शासन द्वारा प्रदेश भर में 173 अस्थायी राहत शिविर स्थापित किए गए हैं। अकेले सुकमा जिले में ही 19 राहत शिविर सक्रिय हैं, जहां 3,000 से अधिक लोगों के लिए शुद्ध पेयजल, भोजन और दवाओं का प्रबंध किया गया है। [1, 2]
तबाही का मंजर: जगदलपुर के डोंगाघाट जैसी निचली बस्तियों में पानी भरने से लोगों के घर डूब गए हैं। पीड़ितों का कहना है कि बाढ़ के तेज बहाव में उनके घर के बर्तन, कपड़े, अनाज और बच्चों की कॉपियां-किताबें तक बह गईं। किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें हैं क्योंकि धान की लहलहाती फसलें कई दिनों से पानी में डूबी हुई हैं।
कलेक्टरों को ‘आरबीसी 6-4’ के तहत सख्त हिदायत
मुख्यमंत्री ने साफ किया है कि जैसे ही बाढ़ का पानी उतरेगा, पटवारी और राजस्व अधिकारियों की टीमें खेतों और मकानों का भौतिक सर्वे करेंगी। आरबीसी 6-4 के नियमों के मुताबिक मकान क्षति, फसल बर्बादी और पशुहानि का तत्काल मूल्यांकन कर राहत राशि सीधे पीड़ितों के बैंक खातों में भेजी जाएगी। मौसम विभाग की चेतावनी के मद्देनजर आपदा प्रबंधन विभाग और राज्य स्तरीय बाढ़ नियंत्रण कक्ष से प्रदेश की सभी प्रमुख नदियों और बांधों के जलस्तर पर 24 घंटे नजर रखी जा रही है।
