बस्तर के युवाओं में टैलेंट की कमी नहीं, बस सही मंच और अवसर की थी दरकार: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय
“अलग राज्य की मांग करने वाले विकास विरोधी, हमारी सरकार बस्तर के युवाओं को देगी वैश्विक पहचान” — मुख्यमंत्री
शिक्षा, खेल और कौशल विकास के क्षेत्र में नई पहल, अबूझमाड़ और बीजापुर के दूरस्थ अंचलों तक पहुंचेंगी सरकारी योजनाएं

विशेष संवाददाता, रायपुर (1 अक्टूबर)।
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने बस्तर क्षेत्र की असीमित क्षमता और वहां की युवा प्रतिभाओं को लेकर एक बड़ा और ऐतिहासिक बयान दिया है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा, “बस्तर क्षेत्र में टैलेंट बहुत है। वहां प्रतिभा की कोई कमी नहीं है, आवश्यकता केवल अवसर और उचित मंच उपलब्ध कराने की थी।” राज्य सरकार अब बस्तर के युवाओं की इसी छिपी हुई प्रतिभा को तराशने और उन्हें राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने के लिए एक वृहद कार्ययोजना पर काम कर रही है।
रायपुर में आयोजित एक उच्च स्तरीय समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने बस्तर के सर्वांगीण विकास का खाका खींचते हुए कहा कि लंबे समय तक उपेक्षित रहे इस अंचल के युवाओं में अद्भुत क्षमताएं हैं। चाहे खेल का मैदान हो, शिक्षा का क्षेत्र हो या फिर पारंपरिक कला और संस्कृति, बस्तर के युवाओं ने हमेशा अपनी छाप छोड़ी है। अब सरकार का पूरा ध्यान उन्हें सही मार्गदर्शन और विश्वस्तरीय इंफ्रास्ट्रक्चर देने पर है।
अलग राज्य की मांग पर कड़ा रुख: विकास विरोधी तत्वों को करारा जवाब
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने हाल ही में उठने वाली ‘अलग बस्तर राज्य’ की मांग पर बेहद कड़ा और स्पष्ट रुख अपनाया है। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि अलग राज्य की मांग करने वाले लोग ‘विकास विरोधी बातें’ कर रहे हैं। बस्तर को विभाजित करने के बजाय, उसकी समस्याओं की जड़ पर प्रहार करना जरूरी है। सरकार बस्तर में सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा और सरकारी योजनाओं की पहुंच को ऐतिहासिक स्तर पर बढ़ाने के लिए दिन-रात प्रयास कर रही है।
मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि बस्तर का विकास छत्तीसगढ़ के भीतर रहकर ही पूरी ताकत के साथ किया जा रहा है, ताकि वहां के आदिवासियों और युवाओं का भविष्य सुरक्षित और समृद्ध हो सके।
शिक्षा और बुनियादी ढांचे में क्रांतिकारी बदलाव
बस्तर के बच्चों को शिक्षा के बेहतर अवसर देने के लिए साय सरकार ने बड़े कदम उठाए हैं:
- बंद स्कूलों को दोबारा खोलना: सरकार ने बस्तर संभाग में पूर्व में बंद हो चुके 421 स्कूलों को फिर से बहाल किया है, जिससे हजारों आदिवासी बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ा जा सका है।
- न्यू एजुकेशन सिटीज का निर्माण: दंतेवाड़ा के सफल एजुकेशन कॉम्प्लेक्स की तर्ज पर अब ओरछा और जगरगुंडा जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में अत्याधुनिक ‘एजुकेशन सिटीज’ (Education Cities) विकसित की जा रही हैं।
- कनेक्टिविटी में तेजी: ₹3,513 करोड़ की लागत वाली जगदलपुर–रावघाट रेल लाइन परियोजना, रायपुर-विशाखापत्तनम एक्सप्रेसवे और जगदलपुर एयरपोर्ट के विस्तार से बस्तर अब सीधे देश के बड़े आर्थिक केंद्रों से जुड़ रहा है।
ट्राइबल टूरिज्म और रोजगार का नया हब बन रहा बस्तर
मुख्यमंत्री के नेतृत्व में बस्तर को एक अग्रणी ट्राइबल टूरिज्म डेस्टिनेशन (Tribal Tourism Destination) के रूप में तब्दील किया जा रहा है। स्थानीय संस्कृति, प्रकृति और होमस्टे (Homestays) मॉडल को बढ़ावा देकर स्थानीय युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ा जा रहा है, ताकि उन्हें अपनी प्रतिभा दिखाने के लिए अपने घर से दूर न जाना पड़े।
इसके साथ ही, मुख्यमंत्री छत्तीसगढ़ की औद्योगिक नीति 2024-30 के जरिए एआई डेटा सेंटर पार्क, इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर जैसे उभरते क्षेत्रों में निवेश ला रहे हैं, जिसका सीधा लाभ बस्तर के तकनीकी रूप से दक्ष युवाओं को भी मिलेगा।
मुख्यमंत्री का संकल्प: बस्तर को बनाएंगे देश का गौरव
समाचार के अंत में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने दृढ़ संकल्प दोहराते हुए कहा कि बस्तर का युवा अब बंदूक और हिंसा के साए से बाहर निकलकर कंप्यूटर, खेलकूद और स्वरोजगार के क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है। सरकार हर उस युवा के साथ खड़ी है जिसके पास कोई हुनर है। बस्तर को सिर्फ छत्तीसगढ़ का ही नहीं, बल्कि पूरे देश का एक प्रमुख टैलेंट हब बनाना हमारी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
