भारतीय रेलवे का डिजिटल सफर: ‘कतार से क्लिक तक’, जानिए कैसे बदली यात्री आरक्षण की व्यवस्था

नई दिल्ली 8 अगस्त : भारतीय रेलवे ने अपनी यात्री आरक्षण व्यवस्था में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर पार कर लिया है। दशकों पहले लंबी कतारों से शुरू हुआ सफर आज मोबाइल स्क्रीन के एक ‘क्लिक’ तक पहुंच गया है। आधुनिक तकनीक और डिजिटल इंडिया की पहल ने दुनिया की इस सबसे बड़ी सार्वजनिक आरक्षण प्रणालियों में से एक को पूरी तरह बदल दिया है। वर्तमान में, भारतीय रेलवे का यात्री आरक्षण सिस्टम (PRS) तकनीक, पारदर्शिता और गति का एक बेजोड़ उदाहरण बन चुका है।
चार दशकों का स्वर्णिम सफर: 1986 से 2026 तक
भारतीय रेलवे (IR) दुनिया के सबसे बड़े रेल नेटवर्क्स में से एक है, जो प्रतिदिन करोड़ों यात्रियों को उनके गंतव्य तक पहुंचाता है। इस विशाल नेटवर्क की रीढ़ है—यात्री आरक्षण प्रणाली (PRS)।

- 1986: भारत में पीआरएस की शुरुआत हुई, जिसने मैन्युअल रजिस्टरों और काउंटरों की जगह कम्प्यूटरीकृत रेलवे आरक्षण की नींव रखी।
- 1990 का दशक: पीआरएस नेटवर्क का विस्तार विभिन्न रेलवे जोन में हुआ, जिससे एक इंटरकनेक्टेड राष्ट्रव्यापी नेटवर्क के माध्यम से टिकट बुकिंग संभव हुई।
- 2002: इंटरनेट-आधारित टिकट बुकिंग की शुरुआत हुई, जिससे सेवाएं काउंटरों से निकलकर सीधे कंप्यूटर स्क्रीन तक पहुंच गईं।
- 2014: ऑनलाइन बुकिंग क्षमता और यात्री अनुभव को और बेहतर बनाने के लिए ‘अगली पीढ़ी की ई-टिकटिंग (NGET)’ प्रणाली शुरू की गई।
- 2025-2026: ‘रेलवन’ ऐप का लॉन्च और अगली पीढ़ी (Next-Gen) के क्लाउड-आधारित पीआरएस में ट्रेनों का चरणबद्ध स्थानांतरण शुरू हुआ, जो रेलवे के डिजिटल आधुनिकीकरण का एक नया युग है।
आंकड़ों के आईने में डिजिटल रेलवे
यात्री तेजी से डिजिटल सेवाओं को अपना रहे हैं, जिसके आंकड़े इसके गवाह हैं:
- जून 2025 से जून 2026 के बीच यात्रियों ने पीआरएस के माध्यम से कुल 65.08 करोड़ आरक्षित टिकट बुक किए।
- इनमें से 57.90 करोड़ टिकट (89%) पूरी तरह ऑनलाइन बुक किए गए।
- वर्तमान में पीआरएस के माध्यम से हर दिन 20.5 लाख से अधिक यात्री सेवाएं प्राप्त कर रहे हैं।
- कुल पीआरएस लेनदेन का लगभग 73 प्रतिशत हिस्सा कैशलेस है।
अगली पीढ़ी का पीआरएस: और अधिक तेज और सुरक्षित
बढ़ती मांग और पीक ऑवर्स (विशेषकर तत्काल बुकिंग के दौरान) के दबाव से निपटने के लिए भारतीय रेलवे पीआरएस को क्लाउड-आधारित अगली पीढ़ी के बुनियादी ढांचे में अपग्रेड कर रहा है।
नई प्रणाली की प्रमुख विशेषताएं:
- सुपरफास्ट बुकिंग: मौजूदा सेटअप की 32,000 टिकट प्रति मिनट की क्षमता के मुकाबले अब प्रति मिनट 1.5 लाख से अधिक टिकट बुक हो सकेंगे।
- त्वरित पूछताछ: पूछताछ की क्षमता 4 लाख प्रति मिनट से बढ़कर 40 लाख प्रति मिनट हो जाएगी।
- पारदर्शिता और सुरक्षा: दलालों और ऑटोमेटेड बॉट के दुरुपयोग को रोकने के लिए आधार-प्रमाणीकृत तत्काल बुकिंग और OTP-आधारित सत्यापन लागू किया गया है।
- सुगम अग्रिम बुकिंग: यात्रियों की मांग को ध्यान में रखते हुए अग्रिम आरक्षण अवधि (ARP) को 120 दिन से घटाकर 60 दिन कर दिया गया है।
‘रेलवन’ और CRIS का कमाल: हर जरूरत का एक समाधान
भारतीय रेलवे के तकनीकी विंग रेलवे सूचना प्रणाली केंद्र (CRIS) ने ऐसे कई अत्याधुनिक डिजिटल प्लेटफॉर्म विकसित किए हैं जिन्होंने यात्रियों का सफर बेहद आसान बना दिया है:
- रेलवन (RailOne): जुलाई 2025 में लॉन्च किया गया यह एकीकृत मोबाइल ऐप एंड्रॉइड और आईओएस पर 4.55 करोड़ से अधिक बार डाउनलोड किया जा चुका है। इसकी सबसे बड़ी खासियत AI-आधारित प्रतीक्षा सूची (Waiting List) पुष्टिकरण भविष्यवाणी है, जिसकी सटीकता अब बढ़कर 94% हो गई है।
- UTS (अनारक्षित टिकट प्रणाली): अनारक्षित यात्रा के लिए पेपरलेस और मोबाइल टिकटिंग की सुविधा।
- NTES (राष्ट्रीय ट्रेन पूछताछ प्रणाली): ट्रेनों के चलने की लाइव स्थिति और समय की सटीक जानकारी।
- रेलवे मदद (RailMadad): शिकायतों और फीडबैक के लिए एक मजबूत मंच, जहां पिछले तीन वर्षों (2025-2026) में 99.98% शिकायतों का सफल समाधान किया गया है।
- कोचमित्र (Coachमित्र): यात्रा के दौरान ट्रेन में हाउसकीपिंग और अन्य सुविधाओं के त्वरित अनुरोध के लिए।
भविष्य के लिए तैयार भारतीय रेलवे
कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), मशीन लर्निंग (ML), बिग डेटा एनालिटिक्स और क्लाउड कंप्यूटिंग जैसी आधुनिक तकनीकों को अपनाकर भारतीय रेलवे यह सुनिश्चित कर रहा है कि यात्रियों को भविष्य में और अधिक सुरक्षित, तेज और बाधा-रहित सेवाएं मिल सकें। ‘कतार से क्लिक तक’ की यह यात्रा इस बात का प्रमाण है कि कैसे दूरदर्शी सोच और तकनीकी नवोन्मेष ने देश की जीवन रेखा को एक नए मुकाम पर पहुंचा दिया है।
