बंदूक छोड़ थामा आंचल: बस्तर की आत्मसमर्पित बेटियों ने रैंप पर बिखेरा जलवा, सीएम साय और डॉ. रमन ने बढ़ाया हौसला

रायपुर 9 अगस्त । छत्तीसगढ़ के इतिहास में विकास की एक ऐसी सुनहरी इबारत लिखी गई है, जिसने बस्तर के जंगलों की खौफनाक दास्तान को हमेशा के लिए बदल दिया। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के सुशासन में ग्रामोद्योग विभाग की एक अभूतपूर्व पहल के तहत, सुकमा के चिंतलनार की 10 पुनर्वासित (आत्मसमर्पित) बेटियों ने राजधानी रायपुर के पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में आयोजित ‘राष्ट्रीय हाथकरघा दिवस’ पर रैंप वॉक कर सबको हैरान कर दिया। कभी हाथों में बंदूक थामने को मजबूर हुईं इन बेटियों ने जब मिस इंडिया ईस्ट सुश्री अनुष्का सोन के साथ छत्तीसगढ़ के पारंपरिक हथकरघा परिधानों में कदम से कदम मिलाए, तो पूरा हॉल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।

मुख्यधारा का नया सवेरा: हिंसा के अंधेरे से सम्मान की रोशनी तक
यह कोई आम फैशन शो नहीं था, बल्कि बस्तर में आ रहे युगांतरकारी बदलाव की एक जीवंत तस्वीर थी। यह प्रदर्शन गवाह था कि कैसे भय का माहौल अब अटूट विश्वास में बदल रहा है और भटका हुआ जीवन अब एक सम्मानजनक भविष्य की ओर कदम बढ़ा चुका है। छत्तीसगढ़ में यह पहला ऐतिहासिक मौका था, जब इन बेटियों को समाज की मुख्यधारा से जोड़कर सीधे राजधानी के इतने बड़े और प्रतिष्ठित मंच पर खड़ा किया गया।
मुख्यमंत्री और विधानसभा अध्यक्ष ने मंच पर पहुंचकर थपथपाई पीठ
इन बेटियों के भीतर झलकता गजब का आत्मविश्वास देख मुख्य अतिथि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय और विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह भावुक और गदगद हो उठे। दोनों शीर्ष नेताओं ने न सिर्फ इस पहल की दिल खोलकर तारीफ की, बल्कि खुद मंच पर जाकर इन जांबाज बेटियों से आत्मीय मुलाकात की। उन्होंने बेटियों की पीठ थपथपाकर उनका हौसला बढ़ाया और उज्जवल भविष्य की शुभकामनाएं दीं।
रैंप पर बदलाव की मिसाल बनीं ये 10 बेटियां:
पारंपरिक हथकरघा परिधानों को एक नए गौरव के साथ देश के सामने पेश करने वाली इन बहादुर बेटियों में शामिल हैं:
- श्रीमती पुनेम देवे
- श्रीमती माड़वी देवे
- श्रीमती माड़वी माल्ले
- श्रीमती मिडियम गांगी
- कुमारी माड़वी नान्दनी
- कुमारी डोंडी रामे
- कुमारी माड़काम भीमे
- कुमारी पोड़ियाम राजे
- कुमारी पुनेम ज्योति
- कुमारी हिड़मे मारकाम
ग्रामोद्योग विभाग की इस दूरदर्शी सोच ने साबित कर दिया है कि सुशासन और सही संबल मिले तो बस्तर की बेटियां किसी भी मंच पर देश का नाम रोशन कर सकती हैं। यह नया छत्तीसगढ़ है, जहां गोलियों की गूंज पर अब हथकरघा के धागों और विकास के गीतों की जीत हो रही है।
