बस्तर में चार दशक बाद लोकतंत्र की बड़ी जीत: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय
‘नक्सलवाद से मुक्ति का उत्सव मनाए कांग्रेस, इतिहास में पहली बार 90 से अधिक गांवों में फहराया जाएगा तिरंगा’

रायपुर 9 अगस्त । छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए कहा है कि विपक्ष के पास अब कोई मुद्दा नहीं बचा है। मुख्यमंत्री ने बस्तर में दशकों पुराने नक्सलवाद के खात्मे और वहां हो रहे ऐतिहासिक बदलावों को रेखांकित करते हुए कहा कि बस्तर को चार दशकों के दंश से मुक्ति मिली है। इस स्वतंत्रता दिवस पर बस्तर के 90 से अधिक गांवों में इतिहास में पहली बार शान से तिरंगा फहराया जाएगा। मुख्यमंत्री ने दोटूक शब्दों में कहा कि यह दलगत राजनीति से ऊपर उठकर हर नागरिक के लिए गौरव और खुशियां मनाने का ऐतिहासिक पल है।
विपक्ष दिशाहीन, सुरक्षा बलों का बढ़े हौसला
मुख्यमंत्री साय ने कांग्रेस की बयानबाजी पर निशाना साधते हुए कहा कि जब बस्तर जैसा संवेदनशील क्षेत्र विकास और शांति की मुख्यधारा से जुड़ रहा है, तो विपक्ष को इसमें खोट ढूंढने के बजाय खुश होना चाहिए। उन्होंने कहा, “कांग्रेस के पास आज कोई ठोस मुद्दा नहीं है। चार दशकों से भी ज्यादा समय तक बस्तर नक्सलवाद की आग में झुलसता रहा। आज जब हमारी सरकार और सुरक्षाबलों के कड़े संकल्प से बस्तर नक्सलवाद से मुक्त हो रहा है, तो विपक्ष को भी इस राष्ट्रीय गौरव का स्वागत करना चाहिए।”
विकास की नई सुबह: बुलेट पर भारी पड़ा बैलेट और राष्ट्रवाद
मुख्यमंत्री ने बस्तर के सुदूर अंचलों में आए जमीनी बदलाव का जिक्र करते हुए कहा कि जिन गांवों में कभी नक्सलियों के डर से काले झंडे फहराए जाते थे या लोग तिरंगे से दूर रहने को मजबूर थे, वहां आज लोकतंत्र की नई सुबह हुई है। इस बार स्वतंत्रता दिवस पर 90 से अधिक गांवों के ग्रामीण पहली बार देश के राष्ट्रीय ध्वज को सलामी देंगे। यह बस्तर के आदिवासियों के जीवन में सुरक्षा, शिक्षा और विकास के नए युग की शुरुआत है
मुख्य बिंदु Bullet Points):
- ऐतिहासिक बदलाव: बस्तर के 90 से अधिक सुदूर और संवेदनशील गांवों में आजादी के बाद पहली बार फहराया जाएगा तिरंगा।
- विपक्ष पर प्रहार: मुख्यमंत्री ने कहा- मुद्दों से भटक चुकी है कांग्रेस, राष्ट्रीय गौरव के क्षणों पर भी कर रही है राजनीति।
- चार दशक का दंश खत्म: डबल इंजन सरकार की नीतियों और सुरक्षाबलों के साहस से बस्तर को मिली नक्सलवाद से मुक्ति।
- शांति और विकास की जीत: मुख्यमंत्री ने बस्तर की जनता और जवानों के संघर्ष को किया सलाम, बताया इसे पूरे प्रदेश की सामूहिक जीत।
विशेष टिप्पणी
बस्तर में तिरंगा: सिर्फ रस्म नहीं, संप्रभुता और विश्वास की पुनर्बहाली
चार दशकों से अधिक समय तक लाल आतंक की विभीषिका झेलने वाले बस्तर के 90 से अधिक गांवों में पहली बार तिरंगा फहराने का निर्णय केवल एक सरकारी आयोजन या रस्म अदायगी नहीं है। यह भारतीय लोकतंत्र की संप्रभुता, सुरक्षाबलों के अदम्य साहस और सुदूर अंचलों में रहने वाले आदिवासियों के अटूट विश्वास की पुनर्बहाली का ऐतिहासिक दस्तावेज है। जब मुख्यमंत्री विष्णु देव साय विपक्ष को राजनीति से ऊपर उठकर इस क्षण का स्वागत करने की नसीहत देते हैं, तो उनका इशारा सीधे तौर पर राष्ट्रीय गौरव के मुद्दों पर एकमत होने की ओर होता है।
बस्तर के इन अंदरूनी इलाकों में दशकों तक बंदूक की नोक पर समानांतर सरकार चलाने की कोशिशें की गईं, जहां विकास की रोशनी को पहुंचने से रोका गया। आज यदि वहां ‘जन-गण-मन’ की गूंज सुनाई देने वाली है, तो इसका सीधा अर्थ है कि बुलेट पर बैलेट और राष्ट्रवाद की जीत हुई है। सरकार की ‘नियद नेल्लानार’ (आपका अच्छा गांव) जैसी जमीनी योजनाओं और सुरक्षाबलों के ‘फॉरवर्ड ऑपरेटिंग बेस’ ने मिलकर नक्सलियों को बैकफुट पर धकेला है। विपक्ष का काम सरकार की नीतियों की समीक्षा करना जरूर है, लेकिन जब बस्तर का आम आदिवासी मुख्यधारा से जुड़कर देश का पर्व मनाने जा रहा हो, तब हर दल की ओर से केवल उत्साहवर्धन और बधाई के स्वर ही गूंजने चाहिए। यह समय बस्तर की इस नई सुबह का जश्न मनाने और विकास की इस रफ्तार को और तेज करने का है।
