बस्तर दशहरे में रचेगा नया इतिहास: मुरिया दरबार की गवाह बनेंगी महामहिम राष्ट्रपति, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने जताया आभार
75 दिनों तक चलने वाले विश्व के सबसे लंबे लोक-पर्व बस्तर दशहरा में पहली बार देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद का होगा पदार्पण; आदिम संस्कृति और लोकतंत्र के अनूठे संगम ‘मुरिया दरबार’ की भव्यता बढ़ेगी।
विशेष संवाददाता,23 अक्टूबर रायपुर/जगदलपुर
छत्तीसगढ़ की पावन धरा और देश की आदिम संस्कृति के हृदय स्थल बस्तर में एक नया स्वर्णिम इतिहास रचने जा रहा है। विश्व के सबसे लंबे समय (75 दिनों) तक मनाए जाने वाले ऐतिहासिक बस्तर दशहरा पर्व के सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव ‘मुरिया दरबार’ में देश की महामहिम राष्ट्रपति शामिल होने जा रही हैं। भारतीय लोकतंत्र और बस्तर की सदियों पुरानी जनजातीय लोकतांत्रिक परंपरा के इस अभूतपूर्व मिलन पर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने महामहिम राष्ट्रपति महोदया का कोटि-कोटि अभिनंदन और आभार व्यक्त किया है।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने सोशल मीडिया और आधिकारिक माध्यमों से हर्ष व्यक्त करते हुए कहा— “बस्तर में विश्व का सबसे लंबा दशहरा पर्व मनाया जाता है, जिसमें मुरिया दरबार का भी आयोजन होता है। पहली बार देश की महामहिम राष्ट्रपति महोदया मुरिया दरबार में शामिल हो रही हैं, उनका बस्तर की 30 लाख जनता और पूरे छत्तीसगढ़ की ओर से बहुत अभिनंदन है।”
मुरिया दरबार: आदिम लोकतंत्र का जीवित जीवंत दस्तावेज
बस्तर दशहरा का ‘मुरिया दरबार’ कोई साधारण आयोजन नहीं है, बल्कि यह राजा और प्रजा के बीच सीधे संवाद की एक अनूठी परंपरा है, जो 14वीं शताब्दी (काकतीय राजवंश के काल) से निरंतर चली आ रही है। इस दरबार में बस्तर के माझी, चालकी, मेंबर्स और जनजातीय समाज के मुखिया एकत्रित होते हैं। वे प्रशासन और सरकार के सामने अपनी समस्याएं, हक और विकास की बातें रखते हैं।
आजादी के बाद इस परंपरा को लोकतांत्रिक स्वरूप मिला, जहां सूबे के मुख्यमंत्री या राजनेता जनता के बीच बैठकर उनकी बातें सुनते हैं। लेकिन यह इतिहास में पहली बार हो रहा है जब देश की प्रथम नागरिक और सर्वोच्च संवैधानिक प्रमुख स्वयं आदिवासियों के इस सबसे बड़े ‘मुरिया दरबार’ की गवाह बनेंगी।
बस्तर के लिए गौरव का क्षण, वैश्विक पटल पर चमकेगी संस्कृति
राजनीतिक और सांस्कृतिक विश्लेषकों का मानना है कि महामहिम राष्ट्रपति का यह दौरा केवल एक राजकीय प्रवास नहीं है, बल्कि यह बस्तर की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, अटूट परंपराओं और आदिम अस्मिता को वैश्विक पहचान दिलाने वाला कदम है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार इस ऐतिहासिक दौरे को भव्य और यादगार बनाने के लिए दिन-रात तैयारियों में जुटी हुई है।
बस्तर की लोक संस्कृति, मांदरी की थाप, और दशहरे की दिव्य रस्मों के बीच महामहिम राष्ट्रपति का आगमन छत्तीसगढ़ के जनजातीय समाज के प्रति केंद्र और राज्य सरकार के गहरे सम्मान को प्रदर्शित करता है।
(Highlights):
- ऐतिहासिक क्षण: बस्तर दशहरे के इतिहास में पहली बार देश के राष्ट्रपति ‘मुरिया दरबार’ की बढ़ाएंगे शोभा।
- मुख्यमंत्री की कृतज्ञता: श्री विष्णु देव साय ने राष्ट्रपति महोदया का छत्तीसगढ़ की माटी पर किया आत्मीय स्वागत।
- अटूट परंपरा: 75 दिनों का विश्व प्रसिद्ध लोक-उत्सव, जहां अस्त्र-शस्त्र नहीं, बल्कि प्रकृति और संस्कृति की होती है पूजा।
- बस्तर में उत्साह: महामहिम के आगमन को लेकर बस्तर के आदिवासियों और ग्रामीणों में भारी उत्साह का माहौल।
