मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का कांग्रेस पर अब तक का सबसे बड़ा हमला:
“55-60 साल राज करने वाली कांग्रेस बताए—वोट बैंक के अलावा जनजातीय समाज को क्या दिया?”
- सीएम साय की तीखी ललकार: कांग्रेस ने आदिवासियों का केवल राजनीतिक इस्तेमाल किया, हक़ और विकास से रखा महतूर।
- बदला सियासी नैरेटिव: मुख्यमंत्री बोले— “जनजातीय समाज अब जाग चुका है, दशकों के शोषण का हिसाब मांग रहा है।”
- असरकारक प्रहार: ‘जल, जंगल, ज़मीन’ के नाम पर छलावा करने वालों के चेहरे से साय ने खींचा पर्दा।

विशेष संवाददाता, रायपुर 23 अक्टूबर
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कांग्रेस की पारंपरिक राजनीति की जड़ों पर प्रहार करते हुए एक बेहद आक्रामक और सीधा सवाल दागा है। मुख्यमंत्री ने कांग्रेस को कटघरे में खड़ा करते हुए पूछा है कि देश और प्रदेश में 55 से 60 सालों तक एकछत्र राज करने वाली कांग्रेस जनता को जवाब दे कि उसने इस दीर्घकाल में जनजातीय समाज के वास्तविक उत्थान के लिए क्या किया? सीएम साय ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने हमेशा आदिवासी समाज को केवल एक ‘वोट बैंक’ के रूप में देखा और चुनाव खत्म होते ही उन्हें उनके हाल पर छोड़ दिया।
वोट की राजनीति बनाम वास्तविक विकास
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, जो स्वयं जनजातीय समाज का प्रतिनिधित्व करते हैं और आदिवासियों के बीच एक बेहद लोकप्रिय व संवेदनशील चेहरे के रूप में जाने जाते हैं, का यह बयान प्रदेश की सियासत में एक नया उबाल ले आया है। मुख्यमंत्री ने कड़े लहजे में कहा, “जिस कांग्रेस ने जनजाति समाज का हमेशा शोषण किया, वह आज किस मुंह से आदिवासियों के हित की बात करती है? पांच दशकों से ज्यादा समय तक सत्ता की मलाई चाटने वाली कांग्रेस स्पष्ट करे कि उन्होंने जनजातीय क्षेत्रों में बुनियादी ढांचा, शिक्षा और स्वास्थ्य के लिए क्या ठोस कदम उठाए?”
बयान के पीछे का दमदार राजनीतिक संदेश
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सीएम साय का यह बयान केवल एक तात्कालिक टिप्पणी नहीं है, बल्कि यह कांग्रेस के उस नैरेटिव को ध्वस्त करने की सोची-समझी रणनीति है जिसमें वह खुद को आदिवासियों का हितैषी बताती रही है।
- पहचान का संकट: साय ने सीधे आदिवासियों की अस्मिता और उनके अधिकारों की बात कर कांग्रेस को रक्षात्मक मुद्रा में ला दिया है।
- जवाबदेही तय करना: 60 साल के शासनकाल का हिसाब मांगकर मुख्यमंत्री ने यह साफ कर दिया है कि भाजपा सरकार अब पुरानी सरकारों की नाकामियों को जनता के सामने उजागर करने से पीछे नहीं हटेगी।
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"कांग्रेस ने जनजातीय समाज के भोलेपन का फायदा उठाकर दशकों तक सिर्फ
अपनी सत्ता की रोटियां सेंकीं। लेकिन अब वक्त बदल चुका है। जनजातीय
समाज अपने अधिकारों के प्रति जागरूक है और वह कांग्रेस के 55-60 साल के
अंधकारमय राज का पाई-पाई का हिसाब मांग रहा है।"
— श्री विष्णु देव साय, मुख्यमंत्री (छत्तीसगढ़)
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भाजपा सरकार की उपलब्धियों से की तुलना
मुख्यमंत्री के इस तीखे हमले के बाद गलियारों में यह चर्चा तेज है कि जहां कांग्रेस ने आदिवासियों को सिर्फ वादों के जाल में फंसाए रखा, वहीं भाजपा की डबल इंजन सरकार ने जनजातीय गौरव दिवस की शुरुआत की, भगवान बिरसा मुंडा के योगदान को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई और देश के सर्वोच्च पद (राष्ट्रपति) पर एक जनजातीय महिला (श्रीमती द्रौपदी मुर्मू) को आसीन कर इतिहास रचा। मुख्यमंत्री साय ने संकेत दिया कि उनकी सरकार आदिवासियों के आर्थिक, सामाजिक और शैक्षणिक सशक्तिकरण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
कांग्रेस खेमे में खलबली
मुख्यमंत्री के इस ‘शानदार और जानदार’ प्रहार ने विपक्षी दल कांग्रेस के भीतर हलचल पैदा कर दी है। आदिवासियों के नाम पर राजनीति करने वाली कांग्रेस के पास अब इस 60 साल के कार्यकाल के सवाल का कोई सीधा जवाब नहीं सूझ रहा है। साय के इस बयान ने यह साफ कर दिया है कि छत्तीसगढ़ में अब राजनीति का केंद्र बिंदु वास्तविक विकास और जनजातीय अस्मिता होगा, न कि खोखले राजनीतिक वादे।
संपादकीय टिप्पणी :
‘साय’ का तीर, निशाने पर तीरंदाज!
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का स्वभाव अमूमन शांत और गंभीर रहता है, लेकिन जब वे बोलते हैं तो उनके शब्दों में जमीन की हकीकत और समाज का दर्द साफ झलकता है। कांग्रेस पर उनका यह हमला इस बात का प्रमाण है कि वे छत्तीसगढ़ के आदिवासी बाहुल्य क्षेत्रों में कांग्रेस के बचे-कुचे प्रभाव को भी पूरी तरह समाप्त करने के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहे हैं। यह बयान आने वाले दिनों में प्रदेश की राजनीति की दिशा तय करेगा।
