कांग्रेस और इंडी गठबंधन के भ्रमजाल के खिलाफ बीजेपी का हल्लाबोल, सीएम साय बोले— ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’

जशपुर, 4 नवंबर (विशेष संवाददाता)।
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने विपक्ष पर तीखा हमला बोलते हुए देश और प्रदेश की जनता को भ्रम और अराजकता की राजनीति से सावधान रहने का आह्वान किया है। जशपुर में आयोजित विशाल ‘लोकतंत्र बचाओ – अराजकता हटाओ’ पदयात्रा के अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस और इंडी (I.N.D.I.A.) गठबंधन के नेता पिछले कुछ समय से ‘एसआईआर’ (SIR) के मुद्दे पर पूरे देश में झूठ का मायाजाल बुन रहे हैं। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि विपक्षी दलों का एकमात्र मकसद लोगों के बीच डर पैदा करना और समाज में अस्थिरता फैलाना है, जिसके खिलाफ अब भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने हर जिले में जन-जागरूकता का महाअभियान छेड़ दिया है।
एसआईआर (SIR) पर फैलाया जा रहा है अफवाहों का बाजार
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने जशपुर की इस पदयात्रा के दौरान कांग्रेस की नीतियो पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने कहा, “पिछले कुछ दिनों से एसआईआर को लेकर जिस तरह से कांग्रेस और इंडी गठबंधन के लोग पूरे देश में आम जनता के बीच भ्रम पैदा करने का काम कर रहे हैं, वह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। विकास विरोधी ताकतें जनता को गुमराह कर देश में अराजकता का माहौल बनाना चाहती हैं।” सीएम साय ने जोर देकर कहा कि इस भ्रामक प्रचार की हकीकत को जनता के सामने लाना और लोकतंत्र की रक्षा करना उनकी सरकार और संगठन की पहली प्राथमिकता है।
अराजकता के खिलाफ हर जिले में मचेगा शंखनाद
जशपुर से शुरू हुआ यह जनाक्रोश और जागरूकता की लहर अब थमने वाली नहीं है। मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि विपक्ष के इस राष्ट्रविरोधी और विकास विरोधी एजेंडे को बेनकाब करने के लिए छत्तीसगढ़ के प्रत्येक जिले में ‘लोकतंत्र बचाओ – अराजकता हटाओ’ कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। इस अभियान के तहत बीजेपी के कार्यकर्ता गाँव-गाँव, घर-घर जाकर जनता को विपक्ष के सफ़ेद झूठ से वाकिफ कराएंगे और उन्हें बताएंगे कि कैसे देश को अस्थिर करने की साजिश रची जा रही है।
पदयात्रा में उमड़ा जनसैलाब, ‘साय-साय’ गूंजा जशपुर
जशपुर में आयोजित इस पदयात्रा में मुख्यमंत्री के साथ हज़ारों की संख्या में स्थानीय नागरिक, युवा, महिलाएं और वरिष्ठ नेता सड़कों पर उतरे। हाथों में तख्तियां और लोकतंत्र की रक्षा के नारे लगाते कार्यकर्ताओं के जोश ने यह साबित कर दिया कि छत्तीसगढ़ की जनता झूठे बहकावे में आने वाली नहीं है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सीएम साय का यह सीधा और आक्रामक रुख आगामी दिनों में राज्य की राजनीति में विपक्ष के बचे-खुचे आधार को भी हिलाकर रख देगा। मुख्यमंत्री ने जनता से अपील की कि वे किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान न दें और देश के विकास में अपनी सकारात्मक भूमिका निभाते रहें।
संपादकीय: राजनीति में ‘भ्रम’ बनाम ‘जागरूकता’ की लड़ाई
लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत उसकी जनता और जनता का भरोसा होती है। जब इस भरोसे को राजनीतिक लाभ के लिए मोहरा बनाया जाने लगे, तो राजनीति जनसेवा न रहकर केवल सत्ता संघर्ष का अखाड़ा बन जाती है। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने जशपुर की ‘लोकतंत्र बचाओ – अराजकता हटाओ’ पदयात्रा के मंच से जिस तरह कांग्रेस और इंडी गठबंधन पर देश में ‘एसआईआर’ (SIR) के नाम पर भ्रम और अराजकता फैलाने का आरोप लगाया है, वह देश की वर्तमान राजनीतिक दिशा पर एक गंभीर बहस को जन्म देता है।
मुख्यमंत्री का यह कहना कि विपक्ष जनता के बीच डर और अस्थिरता का माहौल पैदा कर रहा है, सत्ता पक्ष की उस चिंता को दर्शाता है जहाँ नीतियों से ज्यादा अफवाहें सुर्खियां बनने लगती हैं। लोकतंत्र में विपक्ष का काम नीतियों की आलोचना करना और सरकार को घेरना जरूर है, लेकिन जब आलोचना का आधार तर्कों के बजाय केवल जनता में संशय पैदा करना हो जाए, तो वह स्वस्थ लोकतंत्र के लिए शुभ संकेत नहीं माना जा सकता। ‘एसआईआर’ जैसे तकनीकी या नीतिगत विषयों पर अगर देश के आम नागरिकों के बीच असमंजस की स्थिति बन रही है, तो राजनीतिक दलों की यह जिम्मेदारी बनती है कि वे राजनीति से ऊपर उठकर तथ्यों को सामने रखें।
इस परिदृश्य में, सत्ताधारी दल द्वारा हर जिले में जागरूकता अभियान चलाने का निर्णय स्वागत योग्य है। लोकतंत्र को अराजकता से बचाने का सबसे बेहतरीन माध्यम ‘जन-जागरण’ ही है। जब सरकार और संगठन खुद सड़क पर उतरकर जनता के बीच जाकर मुद्दों की हकीकत स्पष्ट करते हैं, तो अफवाहों का बाजार अपने आप ठंडा होने लगता है। जशपुर की पदयात्रा में उमड़ा जनसैलाब इस बात का गवाह है कि जनता अब केवल बयानों पर नहीं, बल्कि सीधे संवाद पर भरोसा करना चाहती है।
विपक्ष के लिए भी यह आत्ममंथन का समय है। केवल सनसनीखेज राजनीति या जनता की आशंकाओं को हवा देकर अल्पकालिक राजनीतिक लाभ तो कमाया जा सकता है, लेकिन दीर्घकालिक विश्वसनीयता खोने का खतरा हमेशा बना रहता है। भारतीय लोकतंत्र अब इतना परिपक्व हो चुका है कि वह विकास और भ्रम के बीच का अंतर बखूबी समझता है। उम्मीद की जानी चाहिए कि ‘लोकतंत्र बचाओ – अराजकता हटाओ’ जैसे अभियान न केवल छत्तीसगढ़ में राजनीतिक शुचिता की एक नई मिसाल पेश करेंगे, बल्कि राजनीति के केंद्र में ‘भ्रम’ की जगह ‘ठोस तथ्यों’ को स्थापित करने में भी मददगार साबित होंगे।
