छत्तीसगढ़ में गूंजे देशभक्ति के सुर: रायपुर में आयोजित ‘आजादी की धुन’ समारोह में एक साथ गरजे 100 युवा कलाकारों के लाइव बैंड
रायपुर, 13 अगस्त 2026 — स्वतंत्रता दिवस के पूर्व रायपुर का पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम मंगलवार शाम देशभक्ति के जादुई और रोमांचक माहौल से सराबोर नजर आया। संस्कृति विभाग के तत्वावधान में आयोजित ‘आजादी की धुन’ समारोह में जब प्रदेश के विभिन्न अंचलों से आए 100 युवा कलाकारों ने एक साथ विभिन्न वाद्ययंत्रों पर लाइव बैंड की प्रस्तुति दी, तो पूरा सभागार भारत माता के जयकारों और राष्ट्रप्रेम की लहरों में डूब गया। समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने युवा कलाकारों की इस ऐतिहासिक और अनूठी प्रस्तुति का जमकर उत्साहवर्धन किया।

इतिहास का गौरव, वर्तमान का कर्तव्य और भविष्य का संकल्प: मुख्यमंत्री साय
समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि ‘आजादी की धुन’ केवल एक सांस्कृतिक आयोजन नहीं, बल्कि स्वतंत्रता सेनानियों के महान त्याग, तपस्या और बलिदान को कृतज्ञतापूर्वक स्मरण करने का एक स्वर्णिम अवसर है।
मुख्यमंत्री ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि यह आयोजन हमें तीन अहम संदेश देता है:
- इतिहास का गौरव: अपने पूर्वजों के संघर्ष और देश की आजादी की अमर गाथाओं को याद करना।
- वर्तमान का कर्तव्य: स्वतंत्र राष्ट्र के नागरिक के रूप में अपने दायित्वों का निष्ठा से निर्वहन करना।
- भविष्य का संकल्प: वर्ष 2047 तक भारत को एक ‘विकसित राष्ट्र’ बनाने के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के सपने को पूरा करना।
उन्होंने गर्व के साथ कहा कि छत्तीसगढ़ में पहली बार 100 युवा कलाकारों द्वारा एक साथ अलग-अलग वाद्ययंत्रों पर देशभक्ति की धुनों की यह सामूहिक प्रस्तुति एक अभूतपूर्व और अनूठा प्रयास है, जो युवाओं के भीतर राष्ट्र के प्रति अटूट निष्ठा को मजबूत करता है।
संगीत में है राष्ट्र को एक सूत्र में पिरोने की अद्भुत शक्ति
संगीत की ताकत को रेखांकित करते हुए मुख्यमंत्री साय ने कहा कि भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के दौरान भी गीत, संगीत, कविताओं और नारों ने सोए हुए देश को जगाने का काम किया था। कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी देशभक्ति के इन सुरों ने क्रांतिकारियों का मनोबल ऊंचा रखा और करोड़ों भारतवासियों को स्वाधीनता के एकमात्र लक्ष्य के लिए एकजुट किया। आज भी जब देश के कोने-कोने में देशभक्ति की धुनें गूंजती हैं, तो हर भारतीय के दिल में राष्ट्र के प्रति समर्पण का भाव स्वतः जाग उठता है।
अमर सेनानियों और छत्तीसगढ़ के वीर सपूतों को नमन
मुख्यमंत्री ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी, नेताजी सुभाष चंद्र बोस, सरदार वल्लभभाई पटेल, वीर सावरकर और बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर सहित देश के तमाम अमर सेनानियों के संघर्षों को याद किया। उन्होंने कहा कि आज हम जिस खुली हवा में सांस ले रहे हैं और अपने सपनों को पंख दे रहे हैं, उसकी नींव में अनगिनत स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों का खून, पसीना और सर्वोच्च बलिदान शामिल है।
छत्तीसगढ़ की माटी के गौरवशाली योगदान को याद करते हुए मुख्यमंत्री ने विशेष तौर पर उल्लेख किया:
- अमर शहीद वीर नारायण सिंह: जिन्होंने गरीबों और जरूरतमंदों के हक की खातिर ब्रिटिश हुकूमत को सीधी चुनौती दी और मातृभूमि के लिए अपना बलिदान दे दिया।
- बस्तर के जननायक वीर गुण्डाधुर: जिन्होंने भूमकाल आंदोलन का नेतृत्व कर अंग्रेजी शासन के खिलाफ आदिवासी समाज की बुलंद आवाज को पूरी ताकत दी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इन महान सेनानियों का शौर्य और पराक्रम छत्तीसगढ़ की वह अमूल्य विरासत है, जिस पर हर छत्तीसगढ़वासी को गर्व है।
‘विकसित भारत’ और ‘विकसित छत्तीसगढ़’ का सामूहिक संकल्प
प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के वर्ष 2047 के ‘विकसित भारत’ विजन का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री साय ने स्पष्ट किया कि यह केवल सरकारों का लक्ष्य नहीं है, बल्कि देश के 140 करोड़ नागरिकों का साझा संकल्प है।
उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार भी ‘विकसित भारत’ के निर्माण में ‘विकसित छत्तीसगढ़’ की मजबूत भूमिका सुनिश्चित करने के लिए पूरी ईमानदारी से काम कर रही है। सरकार का स्पष्ट उद्देश्य है कि विकास की रोशनी राज्य के अंतिम छोर के गांव, हर गरीब परिवार और हर एक व्यक्ति तक पहुंचे। मुख्यमंत्री ने युवाओं से आह्वान किया कि वे ‘राष्ट्र प्रथम’ की भावना को सर्वोपरि रखते हुए अपने कर्तव्यों का निर्वहन करें और देश-प्रदेश के विकास में सक्रिय भागीदारी निभाएं।
हरेली पर्व और स्वतंत्रता दिवस की अग्रिम शुभकामनाएं
समारोह के दौरान मुख्यमंत्री ने उपस्थित सभी कलाकारों, गणमान्य नागरिकों और प्रदेशवासियों को छत्तीसगढ़ के पारंपरिक हरेली पर्व की बधाई दी तथा आगामी स्वतंत्रता दिवस की अग्रिम शुभकामनाएं प्रेषित कीं।
इस भव्य और गरिमामयी आयोजन में छत्तीसगढ़ फिल्म विकास निगम की अध्यक्ष सुश्री मोना सेन, छत्तीसगढ़ साहित्य अकादमी के अध्यक्ष श्री शशांक शर्मा, स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड के उपाध्यक्ष श्री अंजय शुक्ला, स्काउट-गाइड के चेयरमैन श्री इंद्रजीत सिंह खालसा सहित अन्य जनप्रतिनिधि, बड़ी संख्या में कलाप्रेमी और युवा उपस्थित रहे।
