छत्तीसगढ़ में तंबाकू पर कसेगा कानूनी शिकंजा: कोटपा के कड़े प्रावधानों से बनेगा ‘तंबाकू मुक्त छत्तीसगढ़’, स्वास्थ्य विभाग ने बनाई ठोस रणनीति

रायपुर, 13 अगस्त 2026 — छत्तीसगढ़ में तंबाकू के जाल से नई पीढ़ी को बचाने और इसके घातक दुष्प्रभावों पर प्रभावी लगाम लगाने के लिए राज्य सरकार ने कमर कस ली है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा तंबाकू नियंत्रण कानून (कोटपा) के कड़े क्रियान्वयन को अब जनांदोलन और बहुक्षेत्रीय समन्वय के रूप में आगे बढ़ाया जा रहा है। इसी कड़ी में गुरुवार को स्वास्थ्य भवन, नवा रायपुर में एक दिवसीय उच्चस्तरीय ‘उन्मुखीकरण सह प्रशिक्षण कार्यशाला’ का आयोजन किया गया।
यह कार्यशाला इस बात का स्पष्ट संदेश है कि राज्य सरकार तंबाकू के अवैध प्रसार और इसके सेवन को रोकने के लिए अब किसी भी तरह की ढिलाई के मूड में नहीं है।
कार्यशाला के मुख्य बिंदु और रणनीतियां
- अपर संचालक की दो टूक: कार्यशाला की अध्यक्षता करते हुए स्वास्थ्य सेवाएं के अपर संचालक श्री इंद्रजीत बर्मन ने दो टूक शब्दों में कहा कि राज्य में तंबाकू के उपयोग को न्यूनतम स्तर पर लाने के लिए केवल जागरूकता ही काफी नहीं है, बल्कि वैधानिक प्रावधानों को मैदानी स्तर पर पूरी सख्ती से लागू करना होगा।
- नाबालिगों की सुरक्षा पर विशेष फोकस: कार्यशाला के दौरान सबसे बड़ा जोर इस बात पर रहा कि स्कूल-कॉलेजों और शिक्षण संस्थानों के आसपास तंबाकू उत्पादों की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए, ताकि बच्चों और किशोरों को इस जहर से सुरक्षित रखा जा सके।
- विशेषज्ञों का मार्गदर्शन: मुंबई से विशेष रूप से पहुंचीं ‘वाइटल स्ट्रैटजीज’ की मुख्य वक्ता डॉ. चंद्रावली मदान ने तंबाकू के सेवन से शरीर पर पड़ने वाले दुष्परिणामों को रेखांकित किया। वहीं, डॉ. हंसा कंडू ने विभिन्न विभागों के बीच तालमेल (बहुक्षेत्रीय सहभागिता) को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
इन तीन संकल्पों पर रहेगा विशेष जोर
स्वास्थ्य विभाग ने राज्य को तंबाकू मुक्त बनाने के लिए त्रि-स्तरीय रणनीति पर काम करना शुरू कर दिया है:
- तंबाकू मुक्त शैक्षणिक संस्थान: स्कूलों और कॉलेजों के 100 गज के दायरे में तंबाकू उत्पादों की बिक्री पर कड़ा प्रतिबंध और निगरानी।
- तंबाकू मुक्त गांव और समुदाय: ग्रामीण स्तर पर जनभागीदारी बढ़ाकर लोगों को इसके नुकसान के प्रति जागरूक करना।
- कड़ी मैदानी निगरानी: कोटपा अधिनियम (Cigarettes and Other Tobacco Products Act – COTPA) के नियमों का उल्लंघन करने वालों पर ताबड़तोड़ जुर्माने और कानूनी कार्रवाई।
कार्यशाला में इनकी रही सक्रिय भागीदारी
इस महत्वपूर्ण प्रशिक्षण कार्यक्रम में राज्यभर से आए प्रमुख अधिकारियों और हितधारकों ने हिस्सा लिया, जिनमें प्रमुख रूप से शामिल थे:
- जिला नोडल अधिकारी (एनटीसीपी) एवं जिला सलाहकार
- दंत शल्य चिकित्सक और डेंटिस्ट्स
- खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग के प्रतिनिधि
- विभिन्न जिलों से आए सामाजिक कार्यकर्ता और गैर-सरकारी संगठन (NGO) के सहयोगी
व्यापक जनभागीदारी से ही संभव होगा बदलाव
स्वास्थ्य विभाग का स्पष्ट मानना है कि महकमे की सख्ती के साथ-साथ जब तक आम जनता और सामाजिक संस्थाएं इस अभियान से नहीं जुड़ेंगी, तब तक पूर्ण सफलता मिलना मुश्किल है। कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य मैदानी स्तर पर अधिकारियों की क्षमता को बढ़ाना और आपूर्ति श्रृंखला को ध्वस्त करना है, ताकि छत्तीसगढ़ आने वाले समय में एक स्वस्थ, तंबाकू-मुक्त और प्रेरणादायक राज्य के रूप में अपनी एक नई पहचान बना सके।
