रायपुर, 17 अगस्त 2026 — सत्ता और सियासत की चकाचौंध से कोसों दूर, अपनी माटी, संस्कृति और पुरखों की विरासत से जुड़ाव की एक अत्यंत प्रेरणादायी और अनूठी तस्वीर छत्तीसगढ़ से सामने आई है। प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय अपनी व्यस्त दिनचर्या और राजकीय जिम्मेदारियों के बीच वक्त निकालकर अपने गृहग्राम बगिया (जिला जशपुर) पहुंचे। यहां उन्होंने ठेठ किसान की भूमिका निभाते हुए सुबह-सुबह खेतों का रुख किया और पारंपरिक रूप से बैलों की जोड़ी के साथ हल चलाकर धान की ‘बियासी’ की। खेत की सोंधी खुशबू के बीच मुख्यमंत्री का यह रूप इस बात का जीवंत प्रमाण है कि शीर्ष पद पर आसीन होने के बावजूद उनका दिल आज भी छत्तीसगढ़ के गांवों और खेतों में बसता है।

हल की मूठ थामते ही जीवंत हो उठीं बचपन की सुनहरी यादें
जैसे ही मुख्यमंत्री श्री साय ने हरे-भरे खेत में उतरकर हल की मूठ अपने हाथों में थाली, उनके चेहरे पर एक सहज अपनापन और आत्मिक संतोष साफ झलक रहा था। उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि —

“अपने गांव, अपनी माटी और अपने खेत से जुड़ाव का सुख अलौकिक और अकल्पनीय होता है। हल की मूठ थामते ही खेती-किसानी से जुड़ी बचपन और जवानी की पुरानी स्मृतियां एक बार फिर से जीवंत हो उठती हैं। खेतों के बीच बिताए ये पल मन को असीम सुकून देने के साथ-साथ एक नई सकारात्मक ऊर्जा से भर देते हैं।”
“किसानी मेरे लिए सिर्फ आजीविका नहीं, जीवन का मुख्य संस्कार है”
एक साधारण किसान परिवार में जन्मे और पले-बढ़े मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने बड़े ही आत्मीय भाव से कहा कि वे स्वयं अन्नदाता परिवार से ताल्लुक रखते हैं और उन्होंने बहुत करीब से किसानी की हर बारीकी को जिया है। उनके लिए खेती-किसानी केवल जीवनयापन का जरिया भर नहीं है, बल्कि यह उनके जीवन का सबसे बड़ा संस्कार है।

उन्होंने कहा कि गांवों और खेतों की पगडंडियों ने ही उन्हें श्रम का वास्तविक सम्मान करना, प्रकृति के साथ तालमेल बिठाकर जीवन जीना और अपनी मूल जड़ों से हमेशा जुड़े रहना सिखाया है। छत्तीसगढ़ की असली आत्मा यहां की उर्वरा माटी, पसीना बहाने वाले मेहनतकश किसानों और समृद्ध ग्रामीण परंपराओं में बसती है।
आधुनिकता की दौड़ में अपनी जड़ों को थामे रखना जरूरी
आज के इस अति-आधुनिक और भागदौड़ भरे दौर में अपनी परंपराओं से कटने की प्रवृत्ति पर बात करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी जड़ें ही हमारी असली ताकत हैं। खेती हमें जीवन में कठोर परिश्रम, संयम, धैर्य और प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता का अनमोल पाठ पढ़ाती है। किसान केवल अपने खेत में फसल नहीं उगाता, बल्कि अपने श्रम और पसीने से पूरे समाज के जीवन को संबल और छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था को मजबूती देता है।
इस दौरान उन्होंने प्रदेश के समस्त अन्नदाताओं के अथक पुरुषार्थ को नमन किया और ईश्वर से उनके जीवन में खुशहाली तथा खेतों में बंपर फसल होने की मंगलकामना की।
सादगी और माटी से जुड़ाव की जीवंत मिसाल
राजनीतिक ऊंचाइयों और व्यस्ततम सार्वजनिक जीवन के बीच भी मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय का अपनी माटी के प्रति यह अगाध प्रेम प्रदेश की जनता के बीच चर्चा का केंद्र बना हुआ है। बगिया के खेतों में बैलों के साथ उनकी यह सहजता यह साबित करती है कि वे दिल से आज भी एक ठेठ ग्रामीण और किसान हैं। उनका यह आत्मीय अंदाज छत्तीसगढ़ की संस्कृति और किसान-हितैषी प्रतिबद्धता का सबसे सशक्त और प्रेरणादायक प्रतीक है।
