विकसित भारत-रोजगार और आजीविका गारंटी मिशन (वीबी – जीरामजी): 20 अगस्त की ग्राम सभाओं में वित्तीय वर्ष 2026-27 के विकास कार्यों पर होगी मुहर

रायपुर, 17 अगस्त 2026: छत्तीसगढ़ के ग्रामीण क्षेत्रों में विकास और रोजगार के नए द्वार खोलने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए, आगामी 20 अगस्त, 2026 को राज्यभर की ग्राम सभाओं में विकसित भारत-रोजगार और आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण) (वीबी – जीरामजी) के तहत वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए प्रस्तावित विकास कार्यों का अनुमोदन किया जाएगा। इस महत्वपूर्ण पहल का मुख्य उद्देश्य ग्रामीणों की सीधी सहभागिता से गांवों की रूपरेखा तैयार करना और रोजगार के साथ-साथ बुनियादी अधोसंरचना को मजबूत करना है।
अब गांवों के विकास की कमान खुद ग्रामीणों के हाथ
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय द्वारा स्पष्ट किया जा चुका है कि वीबी – जीरामजी के अंतर्गत सभी विकास कार्यों का चयन पूरी तरह से ग्राम सभा की स्वीकृति के आधार पर ही किया जाएगा। चालू वित्तीय वर्ष में मनरेगा और वीबी – जीरामजी के माध्यम से राज्य को लगभग 6 हजार 855 करोड़ रुपए प्राप्त होने वाले हैं, जो ग्रामीण रोजगार और विकास के इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा वित्तीय निवेश है। इस महत्वाकांक्षी योजना के लिए वर्ष 2026-27 में 5,591.42 करोड़ रुपए का प्रस्तावित बजट रखा गया है, जिसमें से केंद्र सरकार द्वारा प्रथम किस्त के रूप में 1,538 करोड़ रुपए से अधिक की वित्तीय स्वीकृति पहले ही प्राप्त हो चुकी है।
318 प्रकार के अनुमेय कार्यों में से होगी प्राथमिकताओं की चुनरी
योजना के तहत कुल 318 प्रकार के अनुमेय कार्यों को चार प्रमुख श्रेणियों में बांटा गया है, ताकि हर क्षेत्र की स्थानीय आवश्यकता के अनुसार काम कराए जा सकें:
- जल संरक्षण एवं जल संवर्धन: (107 कार्य) – तालाब, चेकडैम, रिचार्ज संरचनाएं, सिंचाई विस्तार, भू-जल व मृदा संरक्षण और व्यापक वृक्षारोपण।
- ग्रामीण अधोसंरचना: (90 कार्य) – सड़कें, पुलिया, पंचायत भवन, आंगनबाड़ी केंद्र, स्कूल कक्ष, ग्रामीण पुस्तकालय, ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन और मुक्तिधाम निर्माण।
- आजीविका संवर्धन: (86 कार्य) – ग्रामीण आजीविका को बढ़ावा देने वाली गतिविधियों से जुड़े कार्य।
- जलवायु अनुकूलन एवं आपदा प्रबंधन: (35 कार्य) – पर्यावरण और जलवायु संतुलन से जुड़े विशेष उपाय।
‘मेरी बेटी, मेरा अभिमान’ अभियान का विशेष फोकस
ग्रामीण विकास को नई गति देने के उद्देश्य से प्रारंभ किए गए ‘मेरी बेटी, मेरा अभिमान’ अभियान (जो 15 अगस्त, 2026 से 26 जनवरी, 2027 तक संचालित हो रहा है) के अंतर्गत प्रत्येक गांव में मुक्तिधाम, प्रतीक्षालय और शासकीय विद्यालयों में बालिकाओं के लिए विशेष शौचालय निर्माण जैसे कार्य प्राथमिकता से कराए जा रहे हैं। इन सभी कार्यों का चयन भी ग्राम पंचायत और ग्राम सभा की अनुशंसा के आधार पर ही सुनिश्चित किया जा रहा है।
2 अक्टूबर से तैयार होगी ‘विकसित ग्राम पंचायत योजना’ (वीजीपीपी)
20 अगस्त की ग्राम सभाओं में ग्रामीणों को विकसित ग्राम पंचायत योजना (वीजीपीपी) के संबंध में विस्तृत जानकारी दी जाएगी। आगामी 2 अक्टूबर, 2026 से ग्राम सभा एवं स्थानीय समुदाय की अनुशंसाओं के आधार पर वीजीपीपी तैयार करने की प्रक्रिया का विधिवत शुभारंभ होगा। यह योजना ग्राम पंचायत विकास योजना (जीपीडीपी) के अनुरूप तैयार की जाएगी, जिसके लिए 20 अगस्त की सभा में ग्रामीणों से बहुमूल्य सुझाव और प्राथमिकताएं आमंत्रित की जा रही हैं।
पारदर्शिता, समयबद्धता और रोजगार सृजन पर जोर
- त्वरित स्वीकृति और क्रियान्वयन: ग्राम सभाओं से अनुमोदित कार्यों को बिना किसी विलंब के प्रशासनिक स्वीकृति दिलाकर धरातल पर उतारने के निर्देश दिए गए हैं।
- समय पर मजदूरी भुगतान: श्रमिकों की मांग के अनुरूप कार्य उपलब्धता और समय पर मजदूरी भुगतान के साथ-साथ कार्यों की उच्च गुणवत्ता सुनिश्चित की जाएगी।
- कृषि कार्यों का संरक्षण: कृषि सीजन के दौरान श्रमिकों की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखने के लिए वर्ष में 60 दिनों तक योजना के कार्य बंद रखने का प्रावधान भी रखा गया है, ताकि खेती-किसानी प्रभावित न हो।
विकसित और आत्मनिर्भर गांवों का संकल्प
वीबी – जीरामजी मिशन का मूल ध्येय केवल रोजगार मुहैया कराना भर नहीं है, बल्कि जल संरक्षण, स्वच्छता, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, सशक्त अधोसंरचना और आजीविका के साधनों को संबल देकर हर गांव को विकसित एवं आत्मनिर्भर बनाना है।
राज्य शासन ने सभी ग्राम पंचायतों से अपील की है कि 20 अगस्त की ग्राम सभा में अधिक से अधिक ग्रामीणों की उपस्थिति सुनिश्चित करें और स्थानीय मांग के आधार पर ज्यादा से ज्यादा पात्र विकास कार्यों का प्रस्ताव पारित करवाकर त्वरित क्रियान्वयन के मार्ग पर आगे बढ़ें।
