रायपुर 17 अगस्त।छत्तीसगढ़: बस्तर-सरगुजा में डेयरी विकास को लगेंगे पंख, सीधे महिलाओं के बैंक खातों में जाएगी दूध की कमाई
- मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हुई बड़ी बैठक, दुग्ध उत्पादकों की आय बढ़ाने पर जोर
- बस्तर की स्थानीय नस्ल की गायों का सुधरेगा स्वास्थ्य, सरगुजा में बढ़ेगा दूध का कलेक्शन
- 45 कलेक्शन सेंटर्स से जुड़ीं 1500 से अधिक महिलाएं, मिल रहा सीधा आर्थिक लाभ

आदिवासी अंचलों की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की तैयारी
बस्तर संभाग के सात जिलों में रहने वाले ग्रामीण और अनुसूचित जनजाति (आदिवासी) परिवार बड़े पैमाने पर पशुपालन करते हैं। यहां की करीब 88 फीसदी गायें स्थानीय नस्ल की हैं। सरकार अब इन गायों की दूध देने की क्षमता बढ़ाने के लिए काम करेगी। इसके लिए पशुओं को अच्छा चारा (पशु पोषण), बेहतर इलाज (पशु स्वास्थ्य) और वैज्ञानिक तरीके से देखरेख की सुविधा दी जाएगी।
सरगुजा में महिलाएं संभाल रहीं कमान
राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) की मदद से सरगुजा संभाग में दूध को सुरक्षित रखने के लिए नए चिलिंग सेंटर (दूध ठंडा करने के केंद्र) शुरू किए गए हैं।
- जशपुर में: 2 हजार लीटर क्षमता का केंद्र (जून 2025 से शुरू)
- बलरामपुर में: 5 हजार लीटर क्षमता का केंद्र (जून 2025 से शुरू)
- मौजूदा स्थिति: वर्तमान में 45 दूध कलेक्शन केंद्रों के जरिए हर दिन लगभग 3,500 लीटर दूध इकट्ठा किया जा रहा है। इससे 1,500 से ज्यादा महिला दूध उत्पादक जुड़ी हुई हैं।
बिचौलियों का खेल खत्म, सीधे खाते में पैसा
इस पूरी योजना की सबसे अच्छी बात यह है कि दूध बेचने वाले ग्रामीणों को उनके पैसों के लिए भटकना नहीं पड़ता। दूध की कीमत का भुगतान सीधे महिलाओं के बैंक खातों में किया जा रहा है। इस पारदर्शी (साफ-सुथरी) व्यवस्था से ग्रामीण महिलाओं को हर महीने तय कमाई हो रही है और वे आर्थिक रूप से मजबूत हो रही हैं।
बैठक में शामिल हुए ये बड़े अधिकारी
राज्य सहकारी डेयरी फेडरेशन लिमिटेड की इस बैठक में पिछली प्रगतियों की समीक्षा की गई। बैठक में अनुसूचित जनजाति विकास विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा, कृषि विभाग के सचिव सिद्धार्थ कोमल परदेशी, वित्त एवं जनसंपर्क विभाग के सचिव डॉ. रोहित यादव और सहकारिता आयुक्त रमेश कुमार शर्मा सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
