रायपुर, 04 अगस्त: विकसित भारत के संकल्प को धरातल पर उतारने और ग्रामीण भारत को आर्थिक रूप से स्वावलंबी बनाने की दिशा में छत्तीसगढ़ में एक अहम कदम उठाया गया है। ठाकुर प्यारेलाल राज्य पंचायत एवं ग्रामीण विकास संस्थान (एसआईआरडी), निमोरा (रायपुर) में ‘विकसित भारत-रोजगार और आजीविका के लिए गारंटी मिशन (ग्रामीण) (वीबी जीरामजी) अधिनियम, 2025’ के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर तीन दिवसीय राज्यस्तरीय कार्यशाला जारी है। 3 से 5 अगस्त तक आयोजित इस महत्वपूर्ण प्रशिक्षण कार्यक्रम में राज्यभर से आए जिला पंचायत सदस्य और विभिन्न स्थायी समितियों के सभापति पूरी ऊर्जा के साथ हिस्सा ले रहे हैं।

मुख्य आकर्षण: 125 दिन का रोजगार और 300 रुपए प्रतिदिन मजदूरी
कार्यशाला को संबोधित करते हुए विकसित भारत-जीरामजी योजना के आयुक्त श्री तारन प्रकाश सिन्हा ने कहा कि प्रधानमंत्री के ‘विजन @ 2047’ के सपनों को साकार करने में त्रि-स्तरीय पंचायती राज के प्रतिनिधियों की भूमिका रीढ़ की हड्डी के समान है। उन्होंने अधिनियम के प्रमुख प्रावधानों पर प्रकाश डालते हुए दो सबसे बड़े बदलावों की जानकारी दी:
- रोजगार की गारंटी: अब हर पात्र ग्रामीण परिवार को साल में 125 दिनों के रोजगार की गारंटी मिलेगी।
- सम्मानजनक मजदूरी: कामगारों के लिए मजदूरी दर बढ़ाकर 300 रुपए प्रतिदिन निर्धारित की गई है।
- ग्राम सभा की सर्वोच्चता: योजना के तहत होने वाले तमाम विकास कार्यों का चयन और अनुमोदन सीधे ग्राम सभा के माध्यम से होगा, जिससे पूरी प्रक्रिया में पूर्ण पारदर्शिता और जनभागीदारी सुनिश्चित हो सकेगी।
तीन संभागों के प्रतिनिधियों ने लिया हिस्सा, मिला व्यावहारिक प्रशिक्षण
प्रशिक्षण के दूसरे दिन सरगुजा, रायपुर और बस्तर संभाग के जिला पंचायत सदस्यों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। संयुक्त आयुक्त श्री रामधन श्रीवास, एसआईआरडी के संकाय सदस्य श्री आनंद रघुवंशी और अन्य मास्टर ट्रेनर्स ने जनप्रतिनिधियों को अधिनियम की हर बारीक से बारीक बारीकी समझाई।
मास्टर ट्रेनर्स द्वारा जनप्रतिनिधियों को जिन प्रमुख विषयों पर विशेष व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है, उनमें शामिल हैं:
- विकसित ग्राम पंचायत योजना का निर्माण और उसका सही क्रियान्वयन।
- पात्र परिवारों का सुगम पंजीयन और ग्रामीण रोजगार कार्ड का वितरण।
- प्रभावी निगरानी, सख्त पर्यवेक्षण व्यवस्था और पारदर्शी शिकायत निवारण प्रणाली।
- अन्य ग्रामीण विकास योजनाओं के साथ अभिसरण (Convergence)।
- वित्तीय प्रबंधन, जवाबदेही और सामाजिक अंकेक्षण (Social Audit)।
- प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन और सतत आजीविका संवर्धन के नए आयाम।
सतत और जवाबदेह ग्रामीण विकास को मिलेगी नई रफ्तार
इस तीन दिवसीय कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य जिला पंचायत के इन शीर्ष जनप्रतिनिधियों को सशक्त, दक्ष और नेतृत्व के गुणों से परिपूर्ण करना है, ताकि वे अपने गृह जिलों और क्षेत्रों में इस कानून का शत-प्रतिशत और असरदार क्रियान्वयन करवा सकें। इस पहल से न केवल ग्रामीण क्षेत्रों में बेरोजगारी पर लगाम कसेगी, बल्कि ग्राम सभाएं और अधिक मजबूत, पारदर्शी तथा जवाबदेह बनकर उभरेंगी, जिससे छत्तीसगढ़ के गांवों में सतत विकास की बयार बहेगी।
