छत्तीसगढ़ में हरित क्रांति, सुशासन और वन प्रबंधन: वन मंत्री श्री केदार कश्यप की प्रेस वार्ता

नवीन रायपुर (अटल नगर) स्थित छत्तीसगढ़ संवाद के ऑडिटोरियम में वन एवं जलवायु परिवर्तन, परिवहन, सहकारिता तथा संसदीय कार्य मंत्री श्री केदार कश्यप ने एक उच्चस्तरीय पत्रकारवार्ता को संबोधित करते हुए राज्य सरकार की दो वर्षों की ऐतिहासिक उपलब्धियों, अभिनव योजनाओं और भविष्य के रोडमैप का विस्तृत खाका खींचा।
🌳 शासन का विजन: हरियाली के साथ वनों पर आश्रित समुदायों की आर्थिक समृद्धि
- व्यापक परिभाषा: मंत्री श्री कश्यप ने स्पष्ट किया कि सरकार के लिए वन संरक्षण का अर्थ केवल पेड़ों की सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके साथ वनवासियों की समृद्धि, जनजातीय संस्कृति का संरक्षण, किसानों की आय में वृद्धि, युवाओं के लिए रोजगार और आधुनिक तकनीक से बेहतर वन प्रबंधन हमारी सर्वोच्च प्राथमिकताओं का हिस्सा है।
- किसान वृक्ष मित्र योजना: वृक्षारोपण को किसानों की आय से जोड़ने वाली इस अनूठी योजना के तहत पात्र नागरिकों को 5 एकड़ तक 100 प्रतिशत और उससे अधिक क्षेत्र पर 50 प्रतिशत वित्तीय अनुदान दिया जा रहा है। पिछले दो वर्षों में 36,896 हितग्राहियों द्वारा 62,441 एकड़ कृषि भूमि में 3.67 करोड़ से अधिक पौधे रोपे गए हैं।
🪵 वनोपज, तेन्दुपत्ता और महिला सशक्तिकरण के नए आयाम
- देश में सर्वाधिक तेन्दुपत्ता दर: छत्तीसगढ़ में तेन्दुपत्ता संग्रहण दर 5,500 रुपए प्रति मानक बोरा है, जो देश में सर्वाधिक है। वर्ष 2025 में 11.44 लाख परिवारों द्वारा 13.85 लाख मानक बोरा तेन्दुपत्ता संग्रहित किया गया, जिसका 757 करोड़ रुपए ऑनलाइन भुगतान किया गया।
- चरण पादुक्का और लाभांश वितरण: वर्ष 2024 में 12.40 लाख महिला संग्राहकों को चरण पादुक्का बांटी गई, तथा वर्ष 2026 में 12.38 लाख पुरुष संग्राहकों को इसका वितरण प्रस्तावित है। समर्थन मूल्य पर 36,580 क्विंटल वनोपज की खरीदी पर 16.66 करोड़ रुपए का अतिरिक्त ऑनलाइन भुगतान किया गया है।
- महिला स्व-सहायता समूह: प्रधानमंत्री जनजाति विकास मिशन एवं पीएम जनमन योजना के तहत लघु वधुनोंपज के संग्रहण और प्रसंस्करण से 6 हजार से अधिक महिला स्व-सहायता समूहों की 70 हजार से अधिक महिलाएं प्रत्यक्ष तौर पर लाभान्वित हुई हैं।
🐅 वन्यजीव संरक्षण में ऐतिहासिक वृद्धि और बस्तर में शांतिपूर्ण विकास
- बाघों की संख्या में 94 प्रतिशत की छलांग: वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में मील का पत्थर साबित करते हुए वर्ष 2022 में प्रदेश में 18 बाघ थे, जिनकी संख्या बढ़कर वर्ष 2026 में 35 हो गई है। 12,829.387 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र वाला गुरुघासीदास-तमोर पिंगला देश का तीसरा सबसे बड़ा टाइगर रिजर्व बना है।
- बस्तर में विकास की नई धारा: बस्तर अंचल के माओवादी प्रभावित क्षेत्रों की सुरक्षा व्यवस्था में उल्लेखनीय सुधार आया है। इसके परिणामस्वरूप वन विभाग ने अति-संवेदनशील क्षेत्रों में भी वानिकी और विदोहन कार्य पुनः प्रारंभ कर दिए हैं, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन और पलायन रोकने में मदद मिल रही है।
💻 तकनीक आधारित पारदर्शी वन प्रशासन और त्वरित सेवाएं
- एंड-टू-एंड डिजिटाइजेशन: वन विभाग के अंतर्गत होने वाली भुगतान प्रक्रिया को पूरी तरह से डिजिटल कर दिया गया है, जिसे भारतीय रिजर्व बैंक के ई-कुबेर और ई-कोष प्लेटफॉर्म के साथ सफलतापूर्वक एकीकृत किया गया है।
- अग्नि सुरक्षा और घटता रिस्पॉन्स टाइम: जंगलों को आग से सुरक्षित रखने के लिए अत्याधुनिक ‘फॉरेस्ट फायर अलर्ट एवं मॉनिटरिंग सिस्टम’ संचालित किया जा रहा है, जिससे आपातकालीन स्थिति में रिस्पॉन्स टाइम 1-2 घंटे से घटकर मात्र 5-10 मिनट रह गया है।
निष्कर्ष: ‘हरित छत्तीसगढ़, समृद्ध छत्तीसगढ़’ के मूल संकल्प के साथ राज्य सरकार ने पर्यावरण संरक्षण, आदिवासियों के कल्याण, आधुनिक तकनीक और पारदर्शी सुशासन का एक बेहतरीन समन्वय प्रस्तुत किया है।
