छत्तीसगढ़ के सिंधी संत और समाजसेवक करेंगे शंकराचार्य से मुलाकात: सनातन वैदिक धर्म और विश्वगुरु भारत के संकल्प पर होगी विशेष चर्चा

रायपुर, 2 सितम्बर 2026 — छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर और आसपास के जिलों से जुड़े प्रमुख सिंधी संत और करीब सौ महिला-पुरुष समाज सेवक आगामी 6 सितंबर को बेमेतरा जिले के ऐतिहासिक ग्राम सलधा में एक उच्चस्तरीय बैठक में सम्मिलित होंगे। यह बैठक ज्योतिर्मठ के ज्योतिष पीठाधीश्वर शंकराचार्य पूज्यपाद स्वामीश्री अविमुक्तेश्वरानन्द सरस्वती जी महाराज के सान्निध्य में उनके चल रहे पावन चातुर्मास व्रत महोत्सव के दौरान आयोजित की जा रही है।
इस महत्वपूर्ण समागम का मुख्य उद्देश्य देश में सनातन वैदिक सिद्धांतों पर आधारित धर्म का शासन स्थापित करना और भारत को पुनः समूचे विश्व का कल्याण करने में समर्थ ‘विश्वगुरु’ के रूप में प्रतिष्ठित करना है। साथ ही, इस राष्ट्रीय एवं आध्यात्मिक अभियान में सिंधी समाज की सक्रिय और कारगर भूमिका पर भी विस्तार से मंथन किया जाएगा।
साईं जलकुमार मसन्द साहिब के नेतृत्व में हो रहा आयोजन
इस उच्चस्तरीय बैठक के प्रमुख आयोजक स्थानीय मसन्द सेवाश्रम के पीठाधीश एवं सिंधी समाज के प्रख्यात राष्ट्रभक्त संत साईं जलकुमार मसन्द साहिब हैं।
संत साईं मसन्द साहिब की राष्ट्रव्यापी धार्मिक एवं सामाजिक सेवाओं का दायरा अत्यंत व्यापक है। उल्लेखनीय है कि पूज्यपाद शंकराचार्य स्वामीश्री अविमुक्तेश्वरानन्द सरस्वती जी महाराज द्वारा साईं मसन्द साहिब को प्रयागराज में संपन्न पिछले कुंभ मेले में 108 देशों के अंतर्राष्ट्रीय हिंदू संगठन ‘परम धर्म संसद 1008’ का संगठन मंत्री नियुक्त किया गया था। इसके अतिरिक्त, शंकराचार्य जी के मुंबई चातुर्मास व्रत महोत्सव के दौरान देश भर में चलाए जा रहे ‘गौमाता राष्ट्रमाता अभियान’ के अंतर्गत उन्हें ‘गौ संसद’ का सचेतक भी मनोनीत किया गया है।
बारह वर्षों से चल रहा है धर्मराज्य और विश्वगुरु का राष्ट्रव्यापी अभियान
विगत 12 वर्षों से संत साईं मसन्द देश के प्रतिष्ठित शंकराचार्यों और महान संतों के आशीर्वाद व सहयोग से सनातन संस्कृति के संवर्द्धन में निरंतर जुटे हुए हैं। उनका यह अभियान देश में सनातन वैदिक सिद्धांतों के आधार पर धर्म का शासन स्थापित कर भारत को पुनः विश्वगुरु बनाने के संकल्प पर केंद्रित है।
इस विषय पर अपने विचार साझा करते हुए उन्होंने रेखांकित किया कि देश की स्वतंत्रता का हमारा मूल उद्देश्य वस्तुतः यही महान लक्ष्य रहा है। इसका अकाट्य प्रमाण हमारे देश के महान स्वतंत्रता सेनानियों और पुरोधाओं—लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक और महर्षि अरविंद द्वारा उन दिनों दिए गए ओजस्वी व्याख्यानों के अभिलेखों में स्पष्ट रूप से दर्ज है। उन्होंने कहा था कि हमें अपनी स्वाधीनता के इस आध्यात्मिक और सांस्कृतिक लक्ष्य को हर हाल में प्राप्त करना ही होगा।
इस आयोजन को लेकर रायपुर सहित पूरे छत्तीसगढ़ के सिंधी समाज और धर्मप्रेमियों में अभूतपूर्व उत्साह का माहौल है। 6 सितंबर को होने वाली इस बैठक से सनातन संस्कृति के प्रचार-प्रसार और राष्ट्र निर्माण की दिशा में एक नया मील का पत्थर स्थापित होने की पूर्ण संभावना है।
