रायपुर, 04 अगस्त, 2026
दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे का रायपुर रेल मंडल यांत्रिक (कैरेज एवं वैगन) विभाग के दम पर नित नए आयाम गढ़ रहा है। मालगाड़ियों के सुरक्षित अनुरक्षण, अत्याधुनिक तकनीकी नवाचार, पर्यावरण संरक्षण और उत्कृष्ट यात्री सुविधाओं के मोर्चे पर मंडल ने ऐसा दमदार प्रदर्शन किया है कि इसने भारतीय रेल में अपनी एक मिसाल कायम की है। विभाग के इन असाधारण प्रयासों से न केवल रेल परिचालन की सुरक्षा और दक्षता में जबरदस्त उछाल आया है, बल्कि रेलवे के राजस्व में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

लक्ष्य से आगे की छलांग: आरओएच (ROH) और मालगाड़ियों का बेदाग संचालन
वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान मुख्यालय द्वारा निर्धारित 1200 वैगन प्रति माह के कठिन लक्ष्य को पीछे छोड़ते हुए रायपुर मंडल ने 1255 वैगनों का रिपेयर ओवरहॉल (ROH) प्रति माह पूरा कर ऐतिहासिक सफलता हासिल की।
- रेक का मजबूत नेटवर्क: वर्तमान में मंडल के अंतर्गत 401 सीसी रेक और 102 ईयूआर रेक का कुशल अनुरक्षण किया जा रहा है।
- विशिष्ट पहचान: भिलाई स्थित ExYd/BIA डिपो भारतीय रेल का इलाका और एकमात्र ऐसा डिपो है जहाँ ईयूआर रेक का केंद्रीकृत (सेंट्रलाइज्ड) अनुरक्षण किया जाता है।
- सुरक्षित परिवहन: इसी अवधि में विभाग ने 10,607 मालगाड़ियों का सफल परीक्षण (सीसी, इंटेंसिव, री-वैलिडेशन एवं पीईई) कर यह सुनिश्चित किया कि मालगाड़ियों का पहिया बिना किसी रुकावट के सरपट दौड़े।

तकनीकी उन्नयन और सुरक्षा के अत्याधुनिक कवच
रायपुर रेल मंडल ने सुरक्षा और तकनीक के मामले में कोई कसर नहीं छोड़ी है:
- देश का उन्नत वे-ब्रिज: भानुप्रतापपुर गुड्स शेड में 12 मई 2026 को नए इलेक्ट्रॉनिक इन-मोशन वे-ब्रिज (EIMWB) का शुभारंभ किया गया। यह रायपुर मंडल का पहला ऐसा वे-ब्रिज है जिसमें व्हील-वाइज लोड मापन (पहिए के हिसाब से भार मापने) की आधुनिक सुविधा उपलब्ध है।
- HABD कवच: रेल संरक्षा को किलेबंदी जैसा मजबूत बनाने के लिए हाथबंद, भाटापारा, भिलाई नगर परसदा गेट, निपानिया, सी-कैबिन और डी-कैबिन समेत कुल 18 हॉट एक्सल बॉक्स डिटेक्टर (HABD) युद्धस्तर पर संचालित किए जा रहे हैं। ये अत्याधुनिक सेंसर चलती ट्रेन में अत्यधिक गर्म होने वाले एक्सल बॉक्स का पहले ही पता लगाकर भीषण रेल दुर्घटनाओं को टालने में रामवाण साबित हुए हैं।
राष्ट्रीय पटल पर डंका: रायपुर मंडल को मिला ‘मेजर शील्ड’ का ताज
विभाग के उत्कृष्ट कामकाज और अनुशासन का लोहा राष्ट्रीय स्तर पर भी माना गया है। 70वें विशिष्ट रेल सेवा पुरस्कार एवं रेल सेवा पुरस्कार एफिशिएंसी शील्ड समारोह में रायपुर मंडल के यांत्रिक विभाग को प्रतिष्ठित ‘मेजर शील्ड’ से सम्मानित किया गया।
इसके साथ ही:
- आरओएच डिपो पीपीयार्ड-भिलाई को सर्वश्रेष्ठ मेजर डिपो का खिताब मिला।
- कोचिंग डिपो दुर्ग को सर्वश्रेष्ठ मीडियम डिपो के पुरस्कार से नवाजा गया।
देसी जुगाड़ और नवाचार: दुर्ग कोचिंग डिपो का ‘FIBA डिवाइस टेस्टिंग गैजेट’
स्वदेशी नवाचार को बढ़ावा देते हुए रायपुर मंडल ने दो बड़े चमत्कारी आविष्कार किए हैं:
- इन-हाउस स्क्रू जैक: बीओबीआरएन (BOBRN) वैगनों के दरवाजों की मरम्मत के लिए विभाग ने खुद का स्क्रू जैक विकसित किया है, जिससे आरओएच और सिक लाइन के काम बेहद आसान हो गए हैं।
- दुर्ग कोचिंग डिपो का क्रांतिकारी FIBA गैजेट: आधुनिक एलएचबी कोचों में लगने वाला फेल्युर इंडिकेशन ब्रेक Application (FIBA) डिवाइस ट्रेन की सुरक्षा के लिए बेहद अहम होता है। अब तक इस डिवाइस का परीक्षण करने के लिए कोच से इसे खोलना पड़ता था, जिसमें 2 से 3 कर्मचारियों को 1 से 2 घंटे का समय गंवाना पड़ता था।
- समाधान: दुर्ग डिपो के कार्मिकों ने पूरी तरह अप्रयुक्त व रिलीज्ड (कबाड़) सामग्रियों का इस्तेमाल करते हुए पोर्टेबल “FIBA डिवाइस टेस्टिंग गैजेट” का इन-हाउस निर्माण कर डाला है।
- फायदा: अब पिट लाइन, आईओएच या सिक लाइन पर न्यूमैटिक सप्लाई के जरिए मात्र एक कर्मचारी इस डिवाइस का परीक्षण झटपट और बेहद आसानी से कर सकता है। समय और श्रम दोनों की भारी बचत हो रही है।
पर्यावरण संरक्षण और यात्री संतुष्टि में भी अव्वल
यांत्रिक विभाग ने केवल मशीनों और ट्रेनों तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि पर्यावरण एवं हाउसकीपिंग प्रबंधन (EnHM) के तहत बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण, प्रदूषण नियंत्रण और प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन जैसे अभियानों को अमलीजामा पहनाया। इसके साथ ही, ‘रेल मदद’ पोर्टल पर यात्रियों की शिकायतों का त्वरित और संतोषजनक समाधान कर रेलयात्रियों का दिल जीता है।
निष्कर्ष: संरक्षा, तकनीक, नवाचार और सेवा का ऐसा बेजोड़ तालमेल ही रायपुर रेल मंडल को भारतीय रेल का सिरमौर बनाता है। यहाँ का हर एक कर्मचारी अपनी मेहनत से तरक्की की नई इबारत लिख रहा है।
