छत्तीसगढ़ में खेती बनेगी लाभ का सौदा: सिंचाई विस्तार, फसल विविधिकरण और आधुनिक तकनीक पर विशेष जोर – मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

रायपुर 4 अगस्त : मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने राजधानी रायपुर में आयोजित ‘किसान और किसानी-प्रोत्साहन तथा परिणाम’ विषयक संवाद कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि खेती केवल आजीविका का साधन नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की संस्कृति, अर्थव्यवस्था और सामाजिक जीवन का आधार है। राज्य सरकार किसानों की समृद्धि को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए खेती को आधुनिक, टिकाऊ और अधिक लाभकारी बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने उत्कृष्ट खेती, नवाचार और कृषि क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले राज्यभर के प्रगतिशील किसानों को सम्मानित किया।

कार्यक्रम में कृषि विशेषज्ञों, जनप्रतिनिधियों, उद्योग जगत के दिग्गजों और बड़ी संख्या में किसानों की गरिमामयी उपस्थिति रही।
किसानों के कल्याण और कृषि उन्नति से जुड़े प्रमुख बिंदु
- धान की रिकॉर्ड खरीदी और समर्थन मूल्य: मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ देश के उन अग्रणी राज्यों में शामिल है जहाँ किसानों को धान का सर्वाधिक मूल्य मिल रहा है। सरकार द्वारा किसानों से 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से 21 क्विंटल प्रति एकड़ तक धान की खरीदी की जा रही है। साथ ही, पिछले दो वर्षों के लंबित बकाया बोनस का भी भुगतान किया गया है। पिछले खरीफ विपणन सीजन में लगभग 25 लाख किसानों से 141 लाख मीट्रिक टन धान की रिकॉर्ड खरीदी हुई है।
- फसल विविधिकरण के लिए प्रोत्साहन: धान की पारंपरिक खेती के साथ-साथ किसानों को दलहन, तिलहन, मक्का और कोदो-कुटकी जैसी अन्य लाभदायक फसलों की ओर प्रेरित करने के लिए कृषक उन्नति योजना के तहत 15 हजार रुपये प्रति एकड़ आदान सहायता प्रदान करने का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा बागवानी, पशुपालन, डेयरी, मत्स्य पालन और लघु वनोपज आधारित उद्यमों को बढ़ावा दिया जा रहा है।
- सिंचाई सुविधाओं का वृहद विस्तार: खेतों तक पानी पहुँचाने के लिए नई सिंचाई परियोजनाओं, बैराजों और नहरों के नेटवर्क को मजबूत किया जा रहा है। बस्तर की इंद्रावती नदी पर मटनार और देऊरगांव में लगभग 2 हजार करोड़ रुपये की लागत से बैराज निर्माण तथा सिकासार-कोडार नहर लिंकिंग परियोजना के लिए लगभग 3 हजार करोड़ रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति दी गई है। इसके अतिरिक्त, सिंचाई परियोजनाओं के सुधार हेतु 2800 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं।
- नवाचार और आधुनिक तकनीक: प्रदेश में कृषि यंत्रीकरण को बढ़ावा देने के लिए अनुदान पर आधुनिक कृषि उपकरण और सोलर सिंचाई पंप दिए जा रहे हैं। महिलाएँ ‘ड्रोन दीदी’ के रूप में नैनो डीएपी का छिड़काव कर आत्मनिर्भर बन रही हैं, और शिक्षित युवा भी आधुनिक कृषि उद्यमों से जुड़ रहे हैं।
- बस्तर में विकास और रोजगार: नक्सल प्रभाव घटने के बाद बस्तर में ‘नियद नेल्लानार’ और ‘सेवाडेरा’ योजनाओं के जरिए स्थानीय स्तर पर रोजगार और विकास के नए रास्ते खुले हैं।

कार्यक्रम में उद्योग मंत्री श्री लखनलाल देवांगन, राज्य गौसेवा आयोग के उपाध्यक्ष श्री राजीव लोचन जी महाराज, ‘नईदुनिया’ समाचार पत्र के संपादक श्री सतीश चंद्र श्रीवास्तव सहित कई गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
