‘पंजाब में हुई फजीहत, ‘गो बैक’ के लगे नारे… अब असम की जमीं समझें बघेल’: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का विध्वंसक हमला
बड़ा राजनीतिक धमाका: पूर्व सीएम भूपेश बघेल के नए प्रभार पर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री का तीखा तंज; बोले— पूरी दुनिया जानती है कांग्रेस में नियुक्तियों का काला सच, पंजाब की नाकामी के बाद असम खदेड़े गए बघेल
विशेष राजनीतिक ब्यूरो, रायपुर 7 सितम्बर ।
छत्तीसगढ़ की सियासत में एक बार फिर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और मौजूदा मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के बीच सीधी सियासी जंग छिड़ गई है। कांग्रेस आलाकमान द्वारा भूपेश बघेल को पंजाब के प्रभार से मुक्त कर असम का नया प्रभारी बनाए जाने के फैसले पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने अब तक का सबसे तीखा और करारा हमला बोला है। सीएम साय ने इस संगठनात्मक फेरबदल को बघेल की ‘राजनीतिक विफलता का इनाम’ बताते हुए कांग्रेस के आंतरिक लोकतंत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने दोटूक लहजे में कहा, “अब किस तरह से भूपेश बघेल जी की नियुक्ति हो रही है, यह पूरी दुनिया बहुत अच्छी तरह से जानती है। बघेल जी पहले पंजाब के प्रभारी थे, तो वहाँ पर उनके खिलाफ ‘गो बैक’ (वापस जाओ) के पोस्टर चिपकाए गए और उन्हें अपनों का ही भारी विरोध झेलना पड़ा था। आज पंजाब में असफल होने के बाद उन्हें असम जाना पड़ा है, तो इस कड़वी राजनीतिक हकीकत को वे खुद भी अच्छी तरह से समझ लें।”
पंजाब में बगावत: ‘राजा-बघेल हटाओ, कांग्रेस बचाओ’ के लगे थे पोस्टर
मुख्यमंत्री साय ने जिस पंजाब विवाद का जिक्र किया, उसने कांग्रेस की अंदरूनी कलह को राष्ट्रीय स्तर पर उजागर कर दिया था। दरअसल, पंजाब का प्रभारी रहते हुए भूपेश बघेल वहां के स्थानीय नेताओं और प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग के गुटों के बीच मची रार को शांत करने में पूरी तरह नाकाम साबित हुए थे। पंजाब के श्री मुक्तसर साहिब और अन्य प्रमुख इलाकों में बघेल के दौरों से ठीक पहले सड़कों पर ‘गो बैक बघेल’ और ‘राजा-बघेल हटाओ, कांग्रेस बचाओ’ के काले पोस्टर चस्पा कर दिए गए थे। पार्टी कार्यकर्ताओं ने खुलेआम बघेल पर पक्षपात करने और पंजाब कांग्रेस को गर्त में धकेलने के आरोप लगाए थे। मुख्यमंत्री साय ने इसी दुखती रग पर हाथ रखते हुए बघेल को आईना दिखाया है।
साय के हमले के राजनीतिक मायने: कांग्रेस में बघेल का कद घटा या बढ़ा?
राजनीतिक पंडितों का मानना है कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस बयान के जरिए एक तीर से कई निशाने साधे हैं:
- राष्ट्रीय विफलता को किया उजागर: साय ने यह साफ कर दिया कि भूपेश बघेल छत्तीसगढ़ के बाहर संगठन चलाने में पूरी तरह फ्लॉप रहे हैं।
- कार्यकर्ताओं के असंतोष पर चोट: ‘गो बैक’ के नारों की याद दिलाकर साय ने यह साबित करने की कोशिश की कि बघेल को पंजाब के कांग्रेसी कार्यकर्ताओं ने ही नकार दिया था।
- असम के लिए चेतावनी: साय का यह कहना कि ‘बघेल असम की जमीं को अच्छी तरह समझ लें’, सीधे तौर पर यह संकेत है कि असम में भी बघेल के लिए राह आसान नहीं होने वाली है, जहां भाजपा बेहद मजबूत स्थिति में है।
बैकफुट पर कांग्रेस, बीजेपी आक्रामक
भूपेश बघेल को पंजाब से हटाकर असम भेजे जाने को जहां कांग्रेस एक सामान्य संगठनात्मक प्रक्रिया बता रही है, वहीं मुख्यमंत्री साय के इस बड़े हमले ने कांग्रेस के दावों की हवा निकाल दी है। छत्तीसगढ़ बीजेपी अब इस मुद्दे को लेकर हमलावर है और इसे बघेल की ‘पदोन्नति नहीं बल्कि राजनीतिक डिमोशन (पदावनति)’ करार दे रही है। मुख्यमंत्री साय के इस बयान के बाद प्रदेश का सियासी पारा पूरी तरह से गरमा गया है और सोशल मीडिया से लेकर गलियारों तक सिर्फ इसी बयान की गूंज है।
साय की दोटूक नसीहत (Quote High Block)
“पंजाब में अपनों के ही विरोध की आग में झुलसने के बाद भूपेश बघेल जी को वहां से हटना पड़ा है। अब कांग्रेस ने उन्हें असम का रास्ता दिखाया है। बेहतर होगा कि बघेल जी इस राजनीतिक बदलाव और अपनी घटती साख को अच्छी तरह समझ लें।”
— विष्णु देव साय, मुख्यमंत्री, छत्तीसगढ़
पंजाब की वो नाकामी, जो बघेल का पीछा नहीं छोड़ रही…
भूपेश बघेल को जब पंजाब की कमान सौंपी गई थी, तब उम्मीद थी कि वे छत्तीसगढ़ मॉडल की तरह वहां पार्टी को एकजुट करेंगे। लेकिन पूर्व सीएम चरणजीत सिंह चन्नी और राजा वड़िंग गुट की गुटबाजी को संभालने के चक्कर में वे खुद विवादों में घिर गए। नतीजतन, पंजाब की सड़कों पर उनके खिलाफ पोस्टर युद्ध छिड़ गया, जिसने आलाकमान को उन्हें वहां से हटाने पर मजबूर कर दिया।
