“हुनर को मिला बिहान का साथ, लखपति दीदी बनीं मरवाही की रानू कैवर्त: सिलाई से लेकर हैचरी तक, ऐसे लिखी आत्मनिर्भरता की स्वर्णिम कहानी”

रायपुर, 8 सितंबर 2026 — छत्तीसगढ़ के सुदूर ग्रामीण अंचलों में आज महिला सशक्तिकरण की एक ऐसी बयार बह रही है, जो पारंपरिक रूढ़ियों को पीछे छोड़ते हुए महिलाओं को आर्थिक मोर्चे पर देश की मुख्यधारा से जोड़ रही है। गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के मरवाही विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत अंडी की रहने वाली श्रीमती रानू कैवर्त की यह गाथा केवल एक समाचार नहीं, बल्कि हर उस ग्रामीण महिला के लिए एक खुली किताब है जो अपने दम पर आसमान छूना चाहती है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) और महतारी वंदन योजना के संबल ने रानू की जिंदगी में ऐसा क्रांतिकारी बदलाव लाया है कि आज वे पूरे छत्तीसगढ़ में ‘लखपति दीदी’ की प्रेरणादायक मिसाल बन चुकी हैं।
तंगहाली से निकलकर आर्थिक स्वावलंबन का सफर
कभी दो जून की रोटी और परिवार की छोटी-छोटी जरूरतों को पूरा करने के लिए कड़ा संघर्ष करने वाली रानू कैवर्त आज आर्थिक रूप से पूरी तरह मजबूत हैं। शिव गुरु महिला स्व-सहायता समूह की सचिव के रूप में उन्होंने जब कदम रखा, तो उन्हें अपनी छिपी हुई नेतृत्व क्षमता और व्यावसायिक कौशल को तराशने का सही मंच मिला। समूह से मिले कुशल मार्गदर्शन, वित्तीय साक्षरता और आत्मविश्वास के बूते उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। उनके इन अथक प्रयासों और व्यावसायिक सूझबूझ का नतीजा यह है कि आज उनकी वार्षिक आय 2 से 3 लाख रुपये के आंकड़े को पार कर चुकी है और वे आत्मनिर्भरता की एक बुलंद मीनार बन चुकी हैं।
बहुआयामी आजीविका: एक साथ कई मोर्चों पर सफलता के झंडे
रानू कैवर्त की सफलता का सबसे बड़ा रहस्य यह है कि उन्होंने किसी एक पारंपरिक व्यवसाय पर निर्भर रहने की बजाय ‘डाइवर्सिफाइड बिजनेस मॉडल’ (विविध व्यावसायिक मॉडल) को अपनाया। उन्होंने स्थानीय बाजार की मांग और अपनी क्षमताओं का सटीक आकलन करते हुए निम्नलिखित गतिविधियों को एक साथ सफलतापूर्वक संचालित किया:
- वस्त्र और सिलाई का हब: सिलाई कार्य और कपड़ों की दुकान के जरिए उन्होंने अपने पारंपरिक हुनर को आधुनिक बाजार से जोड़ा, जिससे महिलाओं के फैशन और वस्त्र संबंधी जरूरतों को स्थानीय स्तर पर पूरा किया जाने लगा।
- किराना स्टोर से दैनिक संबल: गांव में ही किराना दुकान का संचालन कर उन्होंने दैनिक उपभोग की वस्तुओं की आपूर्ति का जरिया बनाया, जिससे रोजाना के नकदी प्रवाह (Cash Flow) को मजबूती मिली।
- आधुनिक पशु-पक्षी पालन व हैचरी: पारंपरिक कृषि से आगे बढ़कर उन्होंने बटेर पालन, उन्नत देशी मुर्गी पालन और आधुनिक हैचरी (Hatchery) जैसी उच्च आय वाली व्यावसायिक गतिविधियों को अपनाया। इस अनूठी पहल ने उनके व्यापार को एक नया और बड़ा आयाम दिया।
‘बिहान’ का साथ और ‘महतारी वंदन’ का कवच
रानू अपनी इस अपार सफलता का पूरा श्रेय शासन की योजनाओं और ‘बिहान’ मिशन को देती हैं। उनका स्पष्ट मानना है कि यदि स्व-सहायता समूह के माध्यम से उन्हें आर्थिक सहायता, समय पर प्रशिक्षण और बिजनेस मैनेजमेंट का पाठ न पढ़ाया गया होता, तो शायद यह मुकाम पाना मुश्किल होता।
इसके साथ ही, छत्तीसगढ़ शासन की महत्वाकांक्षी महतारी वंदन योजना के तहत मिलने वाली नियमित मासिक आर्थिक सहायता उनके लिए एक अतिरिक्त सुरक्षा कवच साबित हुई है। इस राशि ने उन्हें घरेलू वित्तीय प्रबंधन में स्थिरता दी, जिससे वे बिना किसी मानसिक दबाव के अपने बड़े व्यावसायिक निर्णयों और विस्तार पर पूरा ध्यान केंद्रित कर पाईं।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की नीतियों का दिखा असर
अपनी इस शानदार उपलब्धि से अभिभूत होकर रानू कैवर्त ने छत्तीसगढ़ के यशस्वी मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति अपनी गहरी कृतज्ञता और आभार व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार की दूरदर्शी नीतियों, महिला-हितैषी योजनाओं और ‘बिहान’ जैसे सशक्त अभियानों ने ग्रामीण महिलाओं के जीवन में जो उजाला बिखेरा है, उसने न केवल परिवारों की दशा बदली है, बल्कि समाज में महिलाओं का मान-सम्मान भी कई गुना बढ़ा दिया है।
बदल रही है ग्रामीण छत्तीसगढ़ की तस्वीर
रानू कैवर्त की यह सफलता इस बात का अकाट्य प्रमाण है कि जब सरकारी योजनाओं का सही क्रियान्वयन हो, स्व-सहायता समूहों की सामूहिक शक्ति का साथ मिले और महिलाओं की उद्यमशीलता व मेहनत जुड़ जाए, तो बदलाव की इबारत खुद-ब-खुद लिखी जाती है। रानू के ये कदम आज छत्तीसगढ़ की उन तमाम महिलाओं को झकझोर रहे हैं जो अपने हुनर को पहचानना चाहती हैं। यह कहानी चीख-चीख कर यह संदेश दे रही है कि यदि हौसले बुलंद हों, तो ग्रामीण परिवेश की सीमाएं कभी भी तरक्की की राह में रुकावट नहीं बन सकतीं।
