बस्तर के कृषि क्षेत्र में बड़ी क्रांति: बिंजली जलाशय के कायाकल्प से 250 हेक्टेयर खेतों को मिला ‘संजीवनी जल’
- नारायणपुर के 6 गांवों में अब सालभर लहराएगी फसलें, खरीफ के बाद रबी की बंपर पैदावार की तैयारी
- जल संसाधन विभाग ने नहरों से हटाई गाद, सुचारू जल प्रवाह से क्षेत्र के ग्रामीण अर्थतंत्र को मिली नई रफ्तार
विशेष संवाददाता, रायपुर
जल संसाधन विभाग के समयबद्ध प्रयासों और बिंजली जलाशय की नहरों के जीर्णाेद्धार अभियान ने बस्तर अंचल के कृषि परिदृश्य को पूरी तरह बदलकर रख दिया है। विभाग द्वारा जल संसाधन संभाग, नारायणपुर के माध्यम से नहरों की मरम्मत और गाद सफाई का एक वृहद अभियान चलाया गया था। इस भगीरथ प्रयास का सीधा और बेहद सकारात्मक असर अब खेतों में हरियाली के रूप में दिखाई देने लगा है। इस व्यवस्था के सुचारू होने से नारायणपुर विकासखंड के 6 प्रमुख गांवों की लगभग 250 हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई की सुनिश्चित सुविधा प्राप्त हो गई है।
अवरोध दूर होते ही खेतों तक पहुँचा पानी
समय के साथ बिंजली जलाशय की नहरों में भारी मात्रा में गाद (कीचड़) जमा हो गई थी। इस मलबे और अन्य अवरोधों के कारण पानी का प्रवाह पूरी तरह बाधित हो चुका था, जिससे टेल एरिया (आखिरी छोर) के खेतों तक पानी पहुँचाना एक बेहद चुनौतीपूर्ण कार्य बन गया था। जल संसाधन विभाग ने इस समस्या को गंभीरता से लिया और युद्धस्तर पर सफाई व आवश्यक मरम्मत कार्य को अंजाम दिया। नतीजा यह है कि अब नहरों में पानी का प्रवाह पूरी तरह निर्बाध हो चुका है और अंतिम खेत तक पानी आसानी से पहुँच रहा है।
किसानों को मिली मानसून के भरोसे से मुक्ति, दोगुनी होगी आय
नहरों के इस कायाकल्प से नारायणपुर विकासखंड के खैराभाट, पालकी, तेलसी, करलखा, गुरिया और सुलेंगा गांवों के किसानों की मानसून पर निर्भरता काफी कम हुई है। इस सुनिश्चित जल सुरक्षा से न केवल खरीफ बल्कि रबी फसलों के उत्पादन और उनकी गुणवत्ता में भी भारी सुधार की संभावना बढ़ गई है।
जिन खेतों में पहले पानी की घोर किल्लत के कारण साल में सिर्फ एक बार खेती बड़ी मुश्किल से हो पाती थी, वहाँ अब किसान खुशी-खुशी दोहरी फसल (Double Crop) लेने की तैयारी कर रहे हैं। जल संसाधन विभाग की इस दूरदर्शी पहल से क्षेत्र के ग्रामीण अर्थतंत्र को एक नई गति मिली है, जिससे आदिवासी व ग्रामीण किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और उनके जीवन में एक सुखद व सकारात्मक बदलाव का नया सवेरा आया है।
