कालजयी धुनों से जीवंत हुई डॉ. भूपेन हजारिका की जीवन-यात्रा, लोक भवन में बिखरे संस्कृति के अनूठे रंग
भारत रत्न डॉ. भूपेन हजारिका की जन्मशताब्दी पर छत्तीसगढ़ मंडपम में भव्य सांस्कृतिक संध्या; राज्यपाल श्री रमेन डेका और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय रहे साक्षी

रायपुर, 9 सितंबर:
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर स्थित लोक भवन का छत्तीसगढ़ मंडपम आज एक ऐतिहासिक और भावपूर्ण सांस्कृतिक धरोहर का गवाह बना। अवसर था—भारत रत्न, प्रख्यात संगीतकार, गायक, गीतकार और महान फिल्मकार डॉ. भूपेन हजारिका की जन्मशताब्दी वर्ष का। इस गरिमामयी अवसर पर आयोजित ‘सांस्कृतिक संध्या’ में डॉ. हजारिका के कला, संगीत और सांस्कृतिक क्षेत्र में दिए गए अतुलनीय योगदान को याद करते हुए उन्हें सुरमई और संगीतमय श्रद्धांजलि अर्पित की गई। कार्यक्रम में राज्यपाल श्री रमेन डेका और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय मुख्य रूप से उपस्थित रहे, जिनकी मौजूदगी ने इस शाम को और भी खास बना दिया।

संगीत केवल मनोरंजन नहीं, राष्ट्रीय एकता का सूत्र: राज्यपाल
समारोह को संबोधित करते हुए राज्यपाल श्री रमेन डेका ने डॉ. भूपेन हजारिका के विराट व्यक्तित्व और उनकी कला पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, “डॉ. भूपेन हजारिका का संगीत केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं था, बल्कि उसमें समाज, संस्कृति, प्रकृति, मानवीय संवेदना और राष्ट्रीय एकता की गहरी अभिव्यक्ति छिपी थी।” राज्यपाल ने आगे कहा कि डॉ. हजारिका ने अपने गीतों और संगीत के माध्यम से भारत की विविध सांस्कृतिक परंपराओं को एक सूत्र में पिरोने का अभूतपूर्व कार्य किया। उनकी कालजयी रचनाएं आज के दौर में भी लोगों को सामाजिक समरसता, भाईचारे और उच्च मानवीय मूल्यों का जीवंत संदेश देती हैं।

नृत्य-नाटिका ने बांधा समां, सुरों से सजी शाम
सांस्कृतिक संध्या का मुख्य आकर्षण इंदिरा कला एवं संगीत विश्वविद्यालय, खैरागढ़ के प्रतिभावान कलाकारों द्वारा प्रस्तुत की गई शानदार नृत्य-नाटिका रही। कलाकारों ने डॉ. भूपेन हजारिका के जीवन, उनके संघर्षों और उनकी कालजयी रचनाओं को अपने नृत्य और अभिनय के माध्यम से रंगमंच पर इस तरह उतारा कि पूरा मंडपम तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। उनकी भावपूर्ण प्रस्तुति ने डॉ. हजारिका की जीवन-यात्रा को दर्शकों के सामने जीवंत कर दिया।
इसके साथ ही, महाकालीबाड़ी एवं विश्वनाथ मंदिर समिति, पंडरी (रायपुर) के कलाकारों ने डॉ. हजारिका द्वारा गाए गए सदाबहार और प्रसिद्ध गीतों की एक से बढ़कर एक प्रस्तुतियां दीं। गीतों के सुरों ने वहां मौजूद हर एक दर्शक को मंत्रमुग्ध कर दिया और लोग असम से लेकर छत्तीसगढ़ तक की सांस्कृतिक जुगलबंदी में डूब गए।
कलाकारों का हुआ सम्मान
कार्यक्रम के अंत में राज्यपाल श्री रमेन डेका ने सभी कलाकारों की उत्कृष्ट प्रस्तुतियों और उनकी कड़ी मेहनत की मुक्त कंठ से सराहना की। राज्यपाल ने मंच पर आकर कलाकारों को स्मृति चिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
वरिष्ठ जन रहे उपस्थित
इस भव्य और यादगार सांस्कृतिक शाम में प्रदेश की प्रथम महिला श्रीमती रानी डेका काकोटी, क्षेत्रीय विधायक श्री पुरंदर मिश्रा, प्रसिद्ध अभिनेता व विधायक श्री अनुज शर्मा विशेष रूप से मौजूद रहे। इसके अलावा प्रशासनिक स्तर पर नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के प्रमुख सचिव श्री सोनमणि बोरा, राज्यपाल के सचिव डॉ. सी. आर. प्रसन्ना, संस्कृति विभाग के सचिव डॉ. एस. भारती दासन सहित कला, साहित्य और समाज के कई गणमान्य अतिथि उपस्थित थे।
