रायपुर 11 सितम्बर : छत्तीसगढ़ में जल संरक्षण, भू-जल संवर्धन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने की दिशा में राज्य सरकार ने एक बड़ा और दूरदर्शी कदम उठाया है। मुख्य सचिव श्री विकासशील की अध्यक्षता में मंत्रालय महानदी भवन में राज्य जलग्रहण क्षेत्र प्रबंधन एजेंसी की शासी परिषद की नवमीं उच्चस्तरीय बैठक बेहद महत्वपूर्ण निर्णयों के साथ संपन्न हुई। बैठक में स्पष्ट किया गया कि अब जल संरक्षण के कार्यों को केवल सिंचाई तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि इसे ग्रामीण आजीविका, स्वरोजगार और सतत विकास का सबसे बड़ा माध्यम बनाया जाएगा।

बैठक के मुख्य आकर्षण और नीतिगत निर्देश
- केंद्र की गाइडलाइन का कड़ाई से पालन: मुख्य सचिव ने दो टूक शब्दों में अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि जलग्रहण क्षेत्र के तहत होने वाले तमाम कार्य भारत सरकार द्वारा निर्धारित नवीन और आधुनिक दिशा-निर्देशों के अनुरूप ही धरातल पर उतरने चाहिए।
- भू-जल स्तर में रिकॉर्ड सुधार: पिछले कुछ वर्षों (2021 से अब तक) में वाटरशेड विकास कार्यक्रमों के तहत बने चेकडेम, स्टापडेम, कुएं, फार्म पॉण्ड, अर्डन डेम, सिंचाई तालाब, डबरी और व्यापक वृक्षारोपण के कारण प्रदेश के कई इलाकों में भू-जल स्तर और अतिरिक्त सिंचाई रकबे में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।
- अमृत सरोवर और वाटर हार्वेस्टिंग: जल संग्रहण की पारंपरिक और आधुनिक दोनों पद्धतियों को मिलाकर गांवों को जल-समृद्ध बनाने पर जोर दिया गया है।
रोजगार और स्वरोजगार पर विशेष फोकस: प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना 3.0
बैठक में वाटरशेड विकास कार्यक्रम – प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना 3.0 के प्रारंभिक प्रस्ताव और क्षेत्रफल अनुमोदन पर व्यापक चर्चा हुई। सरकार का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि हर एक जल संरचना ग्रामीण परिवारों के लिए आय का जरिया बने।
इसके तहत निम्नलिखित आजीविका गतिविधियों को बड़े पैमाने पर बढ़ावा देने के निर्देश दिए गए हैं:
पशुपालन एवं कृषि क्षेत्र: डेयरी विकास, पोल्ट्री (मुर्गी पालन), मत्स्य पालन, बकरी पालन, सुअर पालन, बत्तख पालन और मधुमक्खी पालन। कृषि तकनीक और सिंचाई: किसानों के खेतों तक ड्रिप इरिगेशन (टपका सिंचाई), स्प्रिंकलर सिस्टम, और आधुनिक पंप-मोटर की सुगम उपलब्धता। ग्रामीण उद्योग और प्रसंस्करण: आटा चक्की, दाल पिसाई, मसाला पिसाई मशीन और ग्रामीण महिलाओं के लिए अगरबत्ती उत्पादन जैसी लघु इकाइयां।
इन प्रमुख विभागों की रही सहभागिता
इस अहम बैठक में विभिन्न विभागों के शीर्ष अधिकारी और विशेषज्ञ मौजूद रहे, जिन्होंने जल और आजीविका के इस मॉडल को और प्रभावी बनाने के लिए अपने बहुमूल्य सुझाव दिए। इनमें प्रमुख रूप से शामिल रहे:
- श्री अरुण पाण्डेय (प्रधान मुख्य वन संरक्षक – PCCF)
- श्री सिद्धार्थ कोमल परदेशी (सचिव, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग)
- वित्त, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (PHED), वन, और पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के वरिष्ठ प्रतिनिधि।
- नाबार्ड (NABARD), इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, छत्तीसगढ़ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (CSTP), और केन्द्रीय भूमि जल बोर्ड के तकनीकी विशेषज्ञ।
