छत्तीसगढ़ सरकार का सख्त रुख: “विकास कार्यों में लेटलतीफी और लापरवाही पर अब खैर नहीं, तय समयसीमा में चाहिए परिणाम” — मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

रायपुर 11 सितम्बर : छत्तीसगढ़ में डबल इंजन सरकार के मुखिया और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने विकास और निर्माण कार्यों की सुस्ती को लेकर अब कड़े तेवर अपना लिए हैं। मुख्यमंत्री ने दो टूक शब्दों में प्रशासनिक मशीनरी को चेतावनी दी है कि जनता के पैसों से आकार ले रहे जनसुविधा के प्रोजेक्ट्स में किसी भी स्तर पर कोताही या अनावश्यक देरी अब पूरी तरह अस्वीकार्य होगी। उन्होंने सभी जिला कलेक्टरों को मैदान में उतरकर नियमित निगरानी करने और हर हाल में तय समयसीमा के भीतर उच्च गुणवत्तापूर्ण कार्य सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
गरियाबंद के खामभाठा में लापरवाही पर मुख्यमंत्री का सीधा ‘हस्तक्षेप’
इस कड़े रुख की बानगी गरियाबंद जिले के मैनपुर विकासखंड स्थित खामभाठा में देखने को मिली। यहां एक निर्माणाधीन पुल की सुस्त रफ्तार के कारण छोटे-छोटे स्कूली बच्चों और स्थानीय ग्रामीणों को रोजाना अपनी जान जोखिम में डालकर आवागमन करना पड़ रहा था।
जैसे ही यह गंभीर मामला मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के संज्ञान में आया, उन्होंने बिना एक पल गंवाए त्वरित एक्शन लिया।
- कलेक्टर को सीधी फटकार और निर्देश: मुख्यमंत्री ने गरियाबंद कलेक्टर श्री रणबीर शर्मा से दूरभाष पर सीधे बात कर जमीनी हकीकत जानी और पुल निर्माण में हो रहे विलंब पर कड़ी नाराजगी जताई।
- तय समयसीमा और जवाबदेही: उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि एक निश्चित समयसीमा के भीतर पुल का निर्माण युद्धस्तर पर पूरा किया जाए। साथ ही, अब तक हुई लेटलतीफी के लिए जिम्मेदार अधिकारियों से तत्काल स्पष्टीकरण (जवाब तलब) लेने के भी निर्देश दिए गए हैं।
“बच्चों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं”: तत्काल वैकल्पिक मार्ग के निर्देश
मुख्यमंत्री श्री साय ने संवेदनशीलता का परिचय देते हुए दोतरफा निर्देश जारी किए हैं। उनका सबसे बड़ा जोर बच्चों और आम नागरिकों की सुरक्षा पर था:
- सुरक्षित वैकल्पिक मार्ग: जब तक मुख्य पुल का निर्माण पूरी तरह तैयार नहीं हो जाता, तब तक स्कूली बच्चों और ग्रामीणों के लिए प्रशासन तत्काल सुरक्षित और सुगम वैकल्पिक आवागम मार्ग की व्यवस्था सुनिश्चित करे।
- साइट पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम: निर्माणाधीन पुल के पास खुले हुए नुकीले सरिए, गहरे गड्ढे और अन्य जानलेवा जोखिमों को तत्काल दुरुस्त करने के आदेश दिए गए हैं। स्थल पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम और अनिवार्य रूप से बैरिकेडिंग करने को कहा गया है ताकि कोई अनहोनी न हो।
प्रदेशभर के कलेक्टरों को स्पष्ट संदेश: फाइलें नहीं, धरातल पर दिखना चाहिए काम
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने केवल एक जिले तक सीमित न रहकर प्रदेश के सभी जिला कलेक्टरों को वर्चुअल और प्रशासनिक बैठकों के माध्यम से कड़ा संदेश दिया है:
- मैदानी मॉनिटरिंग: कलेक्टर केवल कागजी बैठकों तक सीमित न रहें, बल्कि खुद निर्माण स्थलों का औचक निरीक्षण करें और प्रगति रिपोर्ट लें।
- बाधाओं का ऑन-द-स्पॉट समाधान: यदि भूमि अधिग्रहण, फंड या अन्य किसी तकनीकी कारण से प्रोजेक्ट धीमा पड़ा है, तो उसका तत्काल समाधान निकाला जाए।
- गुणवत्ता और समयबद्धता: सड़क, पुल-पुलिया, स्कूल भवन या अन्य बुनियादी ढांचे—हर जगह सर्वोच्च गुणवत्ता और समय की पाबंदी अनिवार्य होगी।
“जनता की गाढ़ी कमाई से बनने वाले विकास कार्यों का लाभ उन्हें सही समय पर मिलना चाहिए। जनसुविधा और नागरिकों की सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है, इसमें लापरवाही बरतने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।” — श्री विष्णु देव साय, मुख्यमंत्री, छत्तीसगढ़
विशेष टिप्पणी: प्रशासनिक गलियारों में मुख्यमंत्री के इस सख्त और त्वरित एक्शन के बाद से हड़कंप मच गया है। इस प्रकार के आक्रामक और जनहितैषी तेवर यह साबित करते हैं कि सरकार अब भ्रष्टाचार, सुस्ती और प्रशासनिक ढिलाई के प्रति ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति पर पूरी तरह से काम कर रही है।
