मिशन अमृत 2.0: छत्तीसगढ़ के 4 शहरों में जल क्रांति की शुरुआत, तालाबों के कायाकल्प के लिए 22.18 करोड़ मंजूर

रायपुर 11 सितम्बर।छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य के शहरी क्षेत्रों को जल-सुरक्षित, स्वच्छ और हरा-भरा बनाने की दिशा में एक और ऐतिहासिक कदम उठाया है। मिशन अमृत 2.0 के तहत प्रदेश के चार प्रमुख शहरों—बेमेतरा (अहिवारा), जशपुर, डोंगरगढ़ और कांकेर—के पारंपरिक तालाबों और जल स्रोतों के पुनर्जीवन के लिए 22 करोड़ 18 लाख रुपए की प्रशासकीय स्वीकृति जारी कर दी गई है।
उप मुख्यमंत्री तथा नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री श्री अरुण साव के अनुमोदन के बाद राज्य शहरी विकास अभिकरण (SUDA) ने इन विकास कार्यों का रास्ता साफ कर दिया है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के विजन के अनुरूप इस महत्वाकांक्षी योजना का मुख्य उद्देश्य विलुप्त हो रहे जल स्रोतों को बचाना और आने वाली पीढ़ियों के लिए भूजल स्तर को मजबूत करना है।
किन शहरों को मिली कितनी राशि? (परियोजनावार विवरण)
पारंपरिक जल संरचनाओं को नया जीवन देने के लिए स्वीकृत यह राशि निम्नलिखित चार प्रमुख परियोजनाओं पर खर्च होगी, जिसमें 5 वर्षों का संचालन और संधारण (O&M) भी शामिल है:
- अहिवारा (बेमेतरा): छटवा तालाब के पुनर्जीवन के लिए सबसे बड़ी राशि 9 करोड़ 60 लाख रुपए मंजूर की गई है।
- कांकेर: वार्ड क्रमांक-19 (अघननगर) स्थित ऐतिहासिक दुधावा तालाब के कायाकल्प के लिए 5 करोड़ 4 लाख रुपए स्वीकृत किए गए हैं।
- जशपुरनगर: वार्ड क्रमांक-9 स्थित सती तालाब के विकास और सौंदर्यीकरण हेतु 4 करोड़ 17 लाख रुपए आवंटित किए गए हैं।
- डोंगरगढ़: सिंघोला बांधा तालाब के पुनरुद्धार के लिए 3 करोड़ 38 लाख रुपए की राशि मंजूर की गई है।
परियोजना की मुख्य विशेषताएं और सुरक्षा मानक
“तालाब केवल पानी जमा करने के साधन नहीं हैं, बल्कि यह हमारे शहरों के पर्यावरणीय संतुलन और भूजल स्तर की रीढ़ हैं।” — श्री अरुण साव, उप मुख्यमंत्री
- पारदर्शिता और गुणवत्ता: कार्यों में किसी भी प्रकार की कोताही न हो, इसके लिए केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त थर्ड पार्टी इंडिपेंडेंट रिव्यू एंड मॉनिटरिंग एजेंसी (IRMA) द्वारा हर चरण की कड़ी निगरानी की जाएगी।
- दीर्घकालिक रखरखाव: स्वीकृत बजट में आगामी 5 वर्षों तक इन जल स्रोतों के रख-रखाव (O&M) का प्रावधान भी शामिल है, जिससे इनके लंबे समय तक संरक्षित रहने की गारंटी मिलती है।
- पर्यावरणीय संतुलन: प्रमुख सचिव श्री सोनमणि बोरा के अनुसार, इन योजनाओं के धरातल पर उतरने से न केवल भूजल संवर्धन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि शहरी क्षेत्रों की जलवायु और नागरिक सुविधाओं में भी अभूतपूर्व सुधार होगा।
यह पहल छत्तीसगढ़ के नगरीय निकायों को आत्मनिर्भर बनाने और पारंपरिक धरोहरों को सहेजने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगी।
