रायपुर/बलौदाबाजार 12 सितम्बर । छत्तीसगढ़ में ग्रामीण विकास और महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में एक क्रांतिकारी बदलाव देखने को मिल रहा है। राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (‘बिहान’) से जुड़ी महिलाएं अब सिर्फ पारंपरिक कार्यों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि तकनीकी क्षेत्र में कदम बढ़ाते हुए ‘सोलर दीदी’ के रूप में अपनी एक बेहद मजबूत और नई पहचान बना रही हैं। “सोलर दीदी हर घर रोशनी, हर हाथ को रोजगार” के सेवा संकल्प के साथ इन महिलाओं ने आर्थिक आज़ादी की ओर अपने कदम बढ़ा दिए हैं।

इस अनूठी पहल के तहत, बिहान के संकुल स्तरीय संगठन ने खुद को आधिकारिक सोलर वेंडर के रूप में पंजीकृत कराया है। इसके बाद, तकनीकी रूप से प्रशिक्षित ये ‘सोलर दीदियां’ अब सीधे ग्राउंड लेवल पर जाकर ग्रामीणों के घरों की छतों पर सोलर पैनल इंस्टॉल करने का बड़ा जिम्मा संभाल रही हैं।
🛠️ बलौदाबाजार के दसरमा गांव से हुई सफल शुरुआत
इस मुहिम के तहत बलौदाबाजार-भाटापारा जिले के विकासखंड बलौदाबाजार के ग्राम दसरमा में एक बड़ी सफलता मिली है। यहाँ हितग्राही तारनी घृतलहरे के घर पर सोलर दीदियों ने 3 किलोवाट क्षमता का सोलर पैनल सिस्टम सफलतापूर्वक स्थापित (Install) किया है।
यह पूरी कार्ययोजना कलेक्टर कुलदीप शर्मा एवं जिला पंचायत बलौदाबाजार के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) के कुशल मार्गदर्शन में संचालित की जा रही है। प्रशासन का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को केवल सरकारी योजनाओं के लाभ (Subsidy) तक सीमित न रखकर, उन्हें सौर ऊर्जा जैसे तकनीकी और व्यावसायिक कार्यों से जोड़कर सीधे उद्यमी (Entrepreneur) बनाना है।
⚡ एक तीर से कई निशाने: पर्यावरण, बचत और रोजगार
सोलर दीदियों की यह पहल ग्रामीण अर्थव्यवस्था और पर्यावरण के लिए गेम-चेंजर साबित हो रही है:
- आर्थिक सशक्तिकरण: महिलाओं में तकनीकी दक्षता (Technical Skills) और व्यावसायिक कौशल का विकास हो रहा है, जिससे उन्हें सीधे रोजगार और आमदनी मिल रही है।
- बिजली बिल से राहत: ‘पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना’ के तहत छतों पर सोलर पैनल लगने से ग्रामीण परिवारों को भारी-भरकम बिजली बिल से हमेशा के लिए मुक्ति मिल रही है।
- पर्यावरण संरक्षण: इस पहल से ग्रामीण अंचलों में स्वच्छ और हरित ऊर्जा (Clean & Green Energy) को बढ़ावा मिल रहा है, जो पर्यावरण को बचाने में बड़ा योगदान है।
छत्तीसगढ़ की ‘बिहान’ योजना से जुड़ी इन सोलर दीदियों ने यह साबित कर दिया है कि अगर सही अवसर और प्रशिक्षण मिले, तो ग्रामीण महिलाएं भी तकनीकी क्षेत्र में बड़े-बड़े वेंडर्स को टक्कर देकर आत्मनिर्भरता का नया इतिहास रच सकती हैं।
