कृषि क्रांति: छत्तीसगढ़ में विष्णु देव साय सरकार की नीतियों से बदली तकदीर, नगदी फसलों और आधुनिक तकनीक ने खेतों में लिख दी समृद्धि की नई इबारत

- धान के कटोरे से आधुनिक कृषि का हब: छत्तीसगढ़ का किसान अब सिर्फ पारंपरिक धान तक सीमित नहीं, बल्कि नगदी फसलों से लिख रहा तरक्की की नई कहानी।
- बंपर पैदावार: पिछले ढाई वर्षों में खरीफ फसलों के उत्पादन में 17% और रबी फसलों में 20% की ऐतिहासिक वृद्धि दर्ज।
- वित्तीय सुरक्षा की गारंटी: ‘कृषक उन्नति योजना’ के तहत किसानों के खातों में सीधे 35,892 करोड़ रुपये से अधिक की राशि ट्रांसफर।
- विविधीकरण पर बंपर बख्शीश: दलहन, तिलहन और मोटे अनाजों की खेती अपनाने वाले किसानों को 15,000 रुपये प्रति एकड़ प्रोत्साहन राशि।
- आधुनिक युग के किसान: ड्रोन तकनीक, ऑटोमैटिक रीपर, फार्म मशीनरी बैंक और ड्रिप इरिगेशन से बदल रही है ग्रामीण अर्थव्यवस्था की तस्वीर।

रायपुर, 12 सितंबर 2026
भारत के नक्शे पर लंबे समय से ‘धान के कटोरे’ के रूप में पहचानी जाने वाली छत्तीसगढ़ की माटी अब एक नए और अभूतपूर्व कृषि रूपांतरण की गवाह बन रही है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के दूरदर्शी नेतृत्व और सरकार की किसान-हितैषी नीतियों ने राज्य के कृषि परिदृश्य को पूरी तरह बदलकर रख दिया है। पारंपरिक खेती की सीमाओं को लांघकर छत्तीसगढ़ का अन्नदाता अब आधुनिक तकनीकों, फसल विविधीकरण, बागवानी और नगदी फसलों के जरिए ग्रामीण अर्थव्यवस्था के व्यापक बदलाव का नया नायक बन गया है। खेत से लेकर बाजार तक फैली इस सकारात्मक लहर ने यह साबित कर दिया है कि यदि सही दिशा और मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति हो, तो किसानी केवल जीवनयापन का जरिया नहीं, बल्कि मुनाफे का एक बेहतरीन सौदा बन सकती है।

1. परम्परा से हटकर: नगदी फसलों और बागवानी से लहलहा रहे हैं खेत
राज्य के गांवों में अब सिर्फ धान की बालियां ही नहीं झूमतीं, बल्कि अदरक, गेंदा फूल, विदेशी सब्जियों और मसालों की महक भी फैल रही है। छत्तीसगढ़ के किसान अब धान के पारंपरिक चक्र से बाहर निकलकर ऐसी नगदी फसलों की ओर रुख कर रहे हैं जो उन्हें प्रति एकड़ लाखों रुपये का मुनाफा दे रही हैं।
युवा किसान अब पशुपालन, मत्स्य पालन और बागवानी को एक साथ समेकित कृषि (Integrated Farming) के रूप में अपनाकर अपनी आमदनी को कई गुना बढ़ा रहे हैं। आंकड़ों पर गौर करें तो पिछले ढाई वर्षों में राज्य में बागवानी का रकबा 8.42 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 8.91 लाख हेक्टेयर के प्रभावशाली आंकड़े को पार कर गया है। फल, सब्जी, मसाले, फूल, तेल पाम और बांस की खेती ने किसानों के लिए संभावनाओं के नए द्वार खोल दिए हैं। सरकार अब इस उत्पादन को सीधे बड़े बाजारों, फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स और पैक हाउस से जोड़ने की दिशा में तेजी से काम कर रही है।

2. वित्तीय सुरक्षा और ‘कृषक उन्नति योजना’: किसानों के खातों में बरसे पैसे
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि किसान को केवल बेहतर फसल ही न मिले, बल्कि उसकी उपज का पूरा और सुरक्षित आर्थिक मूल्य भी मिले। सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाएं इस दिशा में मील का पत्थर साबित हो रही हैं:
- कृषक उन्नति योजना का महा-अनुदान: खरीफ 2023 से 2025 के बीच छत्तीसगढ़ के लगभग 25.52 लाख किसानों के बैंक खातों में सीधे 35,892.90 करोड़ रुपये की सहायता राशि ट्रांसफर की जा चुकी है। अकेले खरीफ धान के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से जुड़ी आदान सहायता के रूप में 24,73,762 किसानों को 13,289 करोड़ रुपये का रिकॉर्ड भुगतान किया गया है।
- गन्ना किसानों को सीधा लाभ: गन्ना प्रोत्साहन योजना के तहत 1 करोड़ 3 लाख 34 हजार क्विंटल से अधिक गन्ने की बंपर खरीदी कर 32,955 किसानों के खातों में 64.95 करोड़ रुपये पहुंचाए गए हैं।
- पीएम किसान सम्मान निधि: केंद्र और राज्य के सहयाेग से प्रदेश के 24.63 लाख किसानों को 23वीं किस्त के रूप में 493 करोड़ रुपये सहित अब तक 11,000 करोड़ रुपये से अधिक की राशि सीधे उनके खातों में डाली जा चुकी है।
- फसल बीमा का मजबूत सुरक्षा कवच: प्राकृतिक आपदाओं के जोखिम से बचाने के लिए खरीफ सीजन में 15.92 लाख से अधिक और रबी सीजन में 2.99 लाख किसानों को फसल बीमा के सुरक्षा चक्र में लाया गया है।
3. फसल विविधीकरण की क्रांति: दलहन-तिलहन पर मिल रही 15,000 रुपये की प्रोत्साहन राशि
धान के आधिक्य वाले छत्तीसगढ़ में अब जमीन की सेहत सुधारने और भूजल स्तर को बचाने के लिए फसल विविधीकरण (Crop Diversification) को राष्ट्रीय स्तर पर एक मॉडल के रूप में लागू किया जा रहा है।
राज्य सरकार किसानों को दलहन और तिलहन की खेती के लिए प्रेरित करने हेतु 15,000 रुपये प्रति एकड़ की आकर्षक प्रोत्साहन राशि दे रही है। इस योजना के तहत किसानों को अरहर, मूंग, उड़द और चना जैसी दलहन फसलों के साथ-साथ सोयाबीन, मूंगफली, सूरजमुखी और तील जैसी तिलहन फसलों की खेती के लिए विशेष रूप से प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसके अलावा मक्का, कपास और छत्तीसगढ़ के पारंपरिक एवं पौष्टिक मोटे अनाजों (कोदो, कुटकी, रागी और बाजरा) की खेती करने वाले किसानों को भी इस योजना का अभूतपूर्व लाभ मिल रहा है। इसका प्रत्यक्ष परिणाम यह रहा कि राज्य में खरीफ फसलों के उत्पादन में लगभग 17 प्रतिशत और रबी फसलों में करीब 20 प्रतिशत की ऐतिहासिक वृद्धि दर्ज की गई है।
4. तकनीकी का कमाल: ड्रोन से लेकर ड्रिप इरिगेशन तक अपना रहे हैं किसान
छत्तीसगढ़ का किसान अब तकनीक के मामले में किसी से पीछे नहीं है। गांवों में हो रहे तकनीकी बदलाव ने खेती को बेहद आसान और किफायती बना दिया है:
- फार्म मशीनरी बैंक: ग्रामीण स्तर पर स्थापित इन बैंकों के जरिए छोटे और सीमांत किसानों को बेहद कम किराए पर आधुनिक कृषि यंत्र और महंगी मशीनें मिल रही हैं, जिससे उनकी मेहनत और लागत में भारी कमी आई है।
- सूक्ष्म सिंचाई (Micro Irrigation): ‘प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना’ के अंतर्गत ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई प्रणालियों के विस्तार से पानी की भारी बचत हो रही है और फसल की गुणवत्ता सुधर रही है।
- प्राकृतिक खेती की ओर कदम: पर्यावरण संरक्षण और रासायनिक खादों के दुष्प्रभावों से बचने के लिए पिछले एक साल में राज्य के 57 हजार से अधिक किसानों ने प्राकृतिक खेती को अपनाया है, जो छत्तीसगढ़ के कृषि क्षेत्र के एक टिकाऊ और हरित भविष्य की सबसे बड़ी गारंटी है।
: आज छत्तीसगढ़ की कृषि केवल एक पारंपरिक व्यवसाय नहीं, बल्कि एक आधुनिक, आत्मनिर्भर और लाभ का सौदा बन चुकी है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की दूरदर्शी सोच, पारदर्शी नीतियां और अन्नदाताओं का अथक परिश्रम मिलकर राज्य को देश के सबसे अग्रणी और समृद्ध कृषि राज्यों की पंक्ति में ला खड़ा कर दिया है। छत्तीसगढ़ का किसान अब सिर्फ ‘अन्नदाता’ नहीं, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था को नई मजबूती देने वाला एक सशक्त ‘कृषि उद्यमी’ बन चुका है।
