📰 विशेष रिपोर्ट: छत्तीसगढ़ का ‘समाज कल्याण मॉडल’—सामाजिक सुरक्षा, सम्मान और आत्मनिर्भरता की नई मिसाल
ढाई वर्षों में योजनाबद्ध बदलाव से 21.73 लाख से अधिक जिंदगियों में उजियारा; डिजिटल पारदर्शिता और मानवीय संवेदना का बेजोड़ संगम

रायपुर | 07 अगस्त 2026 भारत जब 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है, तब छत्तीसगढ़ ने यह साबित कर दिखाया है कि वास्तविक प्रगति वही है जिसमें समाज का अंतिम व्यक्ति भी गरिमा और आत्मनिर्भरता के साथ मुख्यधारा में शामिल हो। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय और समाज कल्याण मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े के नेतृत्व में राज्य सरकार ने पिछले ढाई वर्षों (दिसंबर 2023 से जून 2026) में सामाजिक न्याय को कागजी योजनाओं से निकालकर जमीनी धरातल पर उतारा है।
📊 मुख्य उपलब्धियाँ: एक नज़र में (दिसंबर 2023 बनाम जून 2026)
| क्षेत्र / योजना | स्थिति (दिसंबर 2023) | स्थिति (जून 2026) | प्रमुख प्रभाव |
|---|---|---|---|
| मुख्यमंत्री पेंशन योजना | 7.10 लाख हितग्राही | 7.56 लाख हितग्राही | 46,000+ नए परिवारों को आर्थिक सुरक्षा |
| कुल नियमित पेंशनभोगी | – | 21.73 लाख+ नागरिक | वृद्धावस्था, दिव्यांग, विधवा व सहारा योजनाओं का लाभ |
| डीबीटी (DBT) भुगतान | – | 96% कवरेज | बिचौलियों का खात्मा, पारदर्शी सीधा अंतरण |
| यूडीआईडी (UDID) कार्डधारक | 2.44 लाख | 2.77 लाख | दिव्यांगजनों को अधिकारों की आसान पहुँच |
| सहायक उपकरण वितरण | 1,161 लाभार्थी | 17,038 लाभार्थी | 14 गुना से अधिक की ऐतिहासिक वृद्धि |
| दिव्यांग छात्रवृत्ति | ~7,000 छात्र | 14,000+ छात्र | शैक्षणिक अवसरों में दोगुनी बढ़ोतरी |
| सियान हेल्पलाइन (155326) | 1.14 लाख कॉल | 2.87 लाख कॉल | वरिष्ठ नागरिकों का बढ़ता प्रशासनिक विश्वास |
| नशामुक्ति केंद्र (भारत माता वाहिनी) | 11 केंद्र (1,967 लाभार्थी) | 29 केंद्र (5,220 लाभार्थी) | पुनर्वास और मुख्यधारा में वापसी का दायरा 2.5 गुना |
| विभाग का वार्षिक बजट | ₹1,512 करोड़ (2023-24) | ₹1,600 करोड़ (2025-26) | मानव पूंजी में दीर्घकालिक सुदृढ़ निवेश |
💳 1. पारदर्शी पेंशन व्यवस्था: DBT और e-KYC से मजबूत हुआ भरोसा
राज्य में वृद्धावस्था, विधवा, दिव्यांगजन, सामाजिक सुरक्षा और सुखद सहारा जैसी कल्याणकारी पेंशन योजनाओं से आज 21.73 लाख से अधिक नागरिक आच्छादित हैं।
- 96% सीधा भुगतान (DBT): शत-प्रतिशत पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए 96% पेंशन राशि सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में भेजी जा रही है।
- डिजिटल शुद्धि (e-KYC): ई-केवाईसी और आधार सीडिंग के माध्यम से अपात्र और फर्जी प्रविष्टियों को हटाकर प्रणाली को पूरी तरह जवाबदेह बनाया गया है।
♿ 2. दिव्यांगजन सशक्तीकरण: दान नहीं, अधिकार और अवसरों का सृजन
छत्तीसगढ़ ने दिव्यांग कल्याण को केवल वित्तीय मदद तक सीमित न रखकर अधिकार आधारित मॉडल में परिवर्तित किया है:
- 17 हजार से अधिक को सहायक उपकरण: कृत्रिम अंग व सहायक उपकरण योजना के तहत लाभार्थियों की संख्या 1,161 से बढ़ाकर 17,038 तक पहुँचाना राज्य की सक्रियता को दर्शाता है।
- शिक्षा को प्राथमिकता: दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए छात्रवृत्ति प्राप्त करने वालों की संख्या 14 हजार के पार पहुँच चुकी है।
- सुगम्य छत्तीसगढ़ अभियान: ‘एक्सेसिबल इंडिया’ की तर्ज पर सभी सरकारी परिसरों, शैक्षणिक संस्थानों और सार्वजनिक भवनों को दिव्यांग-अनुकूल बनाया जा रहा है।
- प्रशासनिक दूरदर्शिता: अधिकारों की समयबद्ध निगरानी हेतु ‘आयुक्त राज्य’ के नए पद का सृजन किया गया है।
👴 3. वरिष्ठ नागरिकों की देखरेख: सियान हेल्पलाइन बनी संबल
बढ़ती वृद्धजन आबादी के लिए राज्य ने सुरक्षात्मक वातावरण तैयार किया है:
- टोल-फ्री सियान हेल्पलाइन (155326): हेल्पलाइन पर प्राप्त कॉल की संख्या 1.14 लाख से बढ़कर 2.87 लाख हो जाना यह साबित करता है कि बुजुर्गों को संकट के समय त्वरित सहायता मिल रही है।
- आश्रय गृहों का विस्तार: वृद्धाश्रमों और देखरेख संस्थाओं की बुनियादी सुविधाओं व क्षमता में गुणात्मक सुधार किया गया है।
🚭 4. नशामुक्ति से सामाजिक पुनरुत्थान: युवा शक्ति का पुनर्वास
नशे के दलदल से युवाओं को बाहर निकालने के लिए समाज कल्याण विभाग ने स्वास्थ्य और सामाजिक पुनर्वास को एक साथ जोड़ा है:
- भारत माता वाहिनी योजना: नशामुक्ति केंद्रों की संख्या 11 से बढ़ाकर 29 की गई है।
- 5,220 लोगों को नया जीवन: केंद्रों में केवल इलाज ही नहीं, बल्कि व्यावसायिक परामर्श, पुनर्वास और समाज में पुनः स्थापित करने का कार्य किया जा रहा है।
🏗️ 5. मजबूत संस्थागत ढाँचा और ₹1,600 करोड़ का बजट
किसी भी नीति की सतत सफलता उसके मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर पर निर्भर करती है। राज्य सरकार ने निम्नलिखित क्षेत्रों में बड़ा निवेश किया है:
- माना कैंप (रायपुर): विशेष विद्यालय और फिजिकल रिहैबिलिटेशन सेंटर का अत्याधुनिक निर्माण।
- दृष्टि व श्रवण बाधित स्कूल: प्रदेशभर के विशेष विद्यालयों का उन्नयन और विशेष पाली क्लिनिक की स्थापना।
- वित्तीय संबल: दिव्यांगजन वित्त विकास निगम के माध्यम से स्वरोजगार हेतु रियायती ऋण वितरण।
- बजट में वृद्धि: समाज कल्याण का बजट ₹1,512 करोड़ से बढ़ाकर ₹1,600 करोड़ (प्रस्तावित 2025-26) किया गया है।
🎯 निष्कर्ष: तकनीक और मानवीय संवेदना का अनुपम मॉडल
छत्तीसगढ़ का समाज कल्याण मॉडल इस बात का जीवंत प्रमाण है कि जब संवेदनशील नेतृत्व, पारदर्शी तकनीक (DBT/e-KYC) और दूरदर्शी बजट एक साथ मिलते हैं, तो बदलाव का दायरा कितना व्यापक हो सकता है। यह मॉडल केवल राज्य की उपलब्धि नहीं, बल्कि एक समावेशी और संवेदनशील भारत के निर्माण में छत्तीसगढ़ का ऐतिहासिक योगदान है।
