‘बैलेट पेपर से भी ‘जीरो’ पर सिमटी कांग्रेस को जनता ने दिखाया आईना, अब ईवीएम पर दोष मढ़ना बंद करे विपक्ष’
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का कांग्रेस पर करारा हमला; कहा— “हार-जीत का फैसला चुनाव आयोग नहीं, जनता का आशीर्वाद तय करता है”

रायपुर 29 अक्टूबर /विशेष संवाददाता।
चार राज्यों में हुए विधान परिषद (MLC) चुनावों के नतीजों के बाद देश भर में सियासी पारा गरमाया हुआ है। बैलेट पेपर से हुए इन चुनावों में कांग्रेस की करारी शिकस्त पर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने बेहद आक्रामक और तीखा रुख अख्तियार किया है। मुख्यमंत्री साय ने कांग्रेस को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि ईवीएम (EVM) का रोना रोने वाली कांग्रेस को अब देश की जनता ने बैलेट पेपर के जरिए असल आईना दिखा दिया है। उन्होंने नसीहत दी कि कांग्रेस को अपनी हार स्वीकार करनी चाहिए और बेवजह चुनाव आयोग या संवैधानिक संस्थाओं पर ठीकरा फोड़ना बंद करना चाहिए।
चार राज्यों के नतीजों ने खोली पोल: मुख्यमंत्री साय
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने एक आधिकारिक बयान जारी करते हुए कहा कि, “अभी जो एमएलसी के चुनाव संपन्न हुए, वे देश के चार बड़े राज्यों में ईवीएम से नहीं बल्कि कांग्रेस की मांग वाले बैलेट पेपर से कराए गए थे। इसके बावजूद कांग्रेस एक भी सीट जीतने में नाकाम रही। चारों राज्यों में कांग्रेस का सूपड़ा साफ हो गया है।”
मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि इस करारी हार से कांग्रेस का वह झूठ पूरी तरह बेनकाब हो गया है, जिसके सहारे वे हर चुनाव में अपनी नाकामी छुपाने के लिए ईवीएम को जिम्मेदार ठहराते थे। अब जब चुनाव पूरी तरह कागजी मतपत्रों (बैलेट पेपर) से हुआ, तब भी जनता ने कांग्रेस को पूरी तरह नकार दिया।
“जनता जनार्दन का आशीर्वाद ही तय करता है भाग्य”
कांग्रेस की ‘एंटी-ईवीएम’ रणनीति पर तंज कसते हुए मुख्यमंत्री साय ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि लोकतंत्र में सबसे बड़ी ताकत मतदाता होते हैं। उन्होंने कहा, “हम कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व से साफ तौर पर कहना चाहेंगे कि लोकतंत्र में हार या जीत किसी मशीन या प्रक्रिया से नहीं, बल्कि जनता के आशीर्वाद से तय होती है। जनता का झुकाव और उनका भरोसा ही किसी दल की जीत की इबारत लिखता है।”
साय ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर जनता लगातार अपना अटूट विश्वास जता रही है क्योंकि हमारी सरकारें विकास और अंत्योदय के संकल्प के साथ काम कर रही हैं, जबकि कांग्रेस सिर्फ बहानेबाजी और नकारात्मक राजनीति में उलझी हुई है।
संवैधानिक संस्थाओं पर दोष लगाना ठीक नहीं
अखबारों के लिए जारी अपने इस कड़े बयान में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने कांग्रेस को देश के लोकतंत्र और उसकी साख का सम्मान करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि चुनाव हारने के बाद हर बार चुनाव आयोग जैसी निष्पक्ष और संवैधानिक संस्था की साख पर सवाल उठाना या ईवीएम पर दोष लगाना भारतीय लोकतांत्रिक परंपराओं का अपमान है। कांग्रेस को अब यह समझ लेना चाहिए कि समस्या चुनाव की व्यवस्था में नहीं, बल्कि उनकी खुद की नीतियों, नीयत और जनता के बीच खो चुके उनके जनाधार में है।
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- बैलेट पेपर का सच: उत्तर प्रदेश, बिहार, कर्नाटक और महाराष्ट्र की 28 एमएलसी सीटों पर बैलेट पेपर से हुए चुनावों में कांग्रेस के हाथ पूरी तरह खाली रहे।
- बहानेबाजी का अंत: सीएम साय ने कहा कि बैलेट पेपर के नतीजों ने कांग्रेस के ‘ईवीएम हैकिंग’ के दावों की हवा निकाल दी है।
- जनता ही सर्वोपरि: लोकतंत्र में हार-जीत का फैसला जनता का आशीर्वाद करता है, चुनाव आयोग या मशीनें नहीं।
- साय की नसीहत: कांग्रेस अपनी कमियों को तलाशे, संवैधानिक संस्थाओं को बदनाम करना बंद करे।
राजनीतिक गलियारों में हलचल
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के इस बयान के बाद राज्य और देश की सियासत में नई बहस छिड़ गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चार राज्यों के इन एमएलसी नतीजों ने भाजपा को विपक्ष के खिलाफ एक बहुत बड़ा और अचूक हथियार दे दिया है, जिसे मुख्यमंत्री साय ने छत्तीसगढ़ की धरती से बेहद धारदार तरीके से कांग्रेस के पाले में फेंक दिया है। अब देखना यह होगा कि कांग्रेस इस ‘बैलेट पेपर के आईने’ पर क्या सफाई पेश करती है।
