‘दिमागी नक्सली’ बस्तर और समाज के लिए सबसे बड़ा नासूर: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय
– हिड़मा जैसे खूंखार हत्यारे को आदर्श मानने वालों पर सीएम का अब तक का सबसे तीखा प्रहार
– दो टूक बोले- खून से सने हाथ वाले कभी नायक नहीं हो सकते, हिंसा का महिमामंडन किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं
– सुरक्षाबलों के पराक्रम और सरकार की इच्छाशक्ति से अपने अंतिम सांसें गिन रहा है नक्सलवाद

रायपुर, सितंबर 2026: छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने एक निजी चैनल को दिए गए आक्रामक और बेबाक साक्षात्कार में नक्सलवाद और उसकी वैचारिक जड़ें सींचने वालों को आड़े हाथों लिया है। मुख्यमंत्री ने दो टूक शब्दों में कहा है कि सैकड़ों निर्दोषों के खून से हाथ रंगने वाले कुख्यात नक्सली हिड़मा को अपना आदर्श मानने वाले और उसके समर्थन में खड़े होने वाले लोग और कोई नहीं, बल्कि ‘दिमागी नक्सली’ हैं। उन्होंने चेताया कि हिंसा का महिमामंडन करने वाली यह विकृत मानसिकता पूरे सभ्य समाज के लिए एक गंभीर खतरा है।
भय के साए से निकलकर विकास की नई सुबह देख रहा बस्तर
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ अब नक्सलवाद के उस खौफनाक और काले दौर से पूरी तरह बाहर आ चुका है, जिसने दशकों तक बस्तर को जख्म दिए। आज वही बस्तर भय, बारूदी सुरंगों और माओवादी आतंक के अंधेरे को चीरकर शांति, जन-विश्वास और आधुनिक विकास की रोशनी की ओर तेजी से कदम बढ़ा चुका है।
उन्होंने इस ऐतिहासिक बदलाव का श्रेय हमारे वीर सुरक्षाबलों के अदम्य साहस, डबल इंजन सरकार की अटूट राजनीतिक इच्छाशक्ति और सबसे बढ़कर बस्तर की शांतिप्रिय जनता के अटूट सहयोग को दिया। मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि अब नक्सलवाद अपने खात्मे के अंतिम पड़ाव पर है।
शहीदों के बलिदान और पीड़ितों के जख्मों पर सीधा प्रहार
नक्सलियों के वैचारिक आकाओं पर करारा कटाक्ष करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह बेहद शर्मनाक और दुर्भाग्यपूर्ण है कि आज भी कुछ तत्व ऐसे खूंखार और बेरहम नक्सलियों को अपना हीरो बताते हैं जिनके हाथों में मासूमों और जवानों का खून लगा है।
हिड़मा जैसे कमांडरों ने आतंक और क्रूरता के बलबूते बस्तर की कई पीढ़ियों को पिछड़ेपन और अंधेरे में धकेला। ऐसे अपराधियों का महिमामंडन करना, उनके समर्थन में खड़े होना या उन्हें नायक के रूप में पेश करना बस्तर के उन हजारों पीड़ित परिवारों और शहीद वीर जवानों के बलिदान का खुला अपमान है, जिन्होंने अपनों को खोया है।
बंदूक से ज्यादा खतरनाक है ‘दिमागी नक्सलवाद’ की सोच
मुख्यमंत्री ने आगाह किया कि नक्सलवाद सिर्फ जंगलों में चलने वाली बंदूकों और गोलियों तक सीमित समस्या नहीं है। लोकतंत्र की व्यवस्था पर अविश्वास पैदा करने वाली सोच, हिंसा को वैचारिक जामा पहनाने की प्रवृत्ति और खूंखार अपराधियों को महिमामंडित करने वाला ‘दिमागी नक्सलवाद’ उससे भी ज्यादा खतरनाक है। उन्होंने स्पष्ट किया कि लोकतंत्र में असहमति का अधिकार है, लेकिन इंसानियत का कत्ल करने वालों का समर्थन करने की छूट किसी को नहीं दी जा सकती।
अब हाथों में बंदूक नहीं, कलम और टैबलेट थाम रहा बस्तर का युवा
बस्तर की बदलती हुई तस्वीर का जीवंत चित्रण करते हुए मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि जिन इलाकों में कभी सिर्फ गोलियों की गूंज और बारूदी धमाके सुनाई देते थे, वहां आज सरकारी स्कूलों में बच्चों की किलकारियां गूंज रही हैं। गांवों तक पक्की सड़कें पहुंच रही हैं, स्वास्थ्य सुविधाएं मिल रही हैं और आधुनिक शिक्षा के द्वार खुल रहे हैं।
आज का बस्तरिया युवा और छात्र हिंसा के रास्ते को ठुकराकर किताब, कलम, उच्च शिक्षा, कौशल और रोजगार के जरिए अपने सपनों की नई इबारत लिख रहा है। सरकार की नीति साफ है कि बस्तर के हर युवा को आगे बढ़ने के समान अवसर मिलने चाहिए।
नया छत्तीसगढ़: शांति, प्रगति और सुशासन का नया अध्याय
मुख्यमंत्री ने अंत में यह हुंकार भरी कि छत्तीसगढ़ अब पूरी तरह से शांति, लोकतंत्र और प्रगति के स्वर्णिम मार्ग पर आगे बढ़ चुका है। नए छत्तीसगढ़ में हिंसा, आतंक और अराजकता के लिए रत्तीभर भी जगह नहीं है।
बस्तर की नई पीढ़ी के सच्चे और प्रेरणादायी आदर्श वे लोग होने चाहिए जो शिक्षा, सेवा, श्रम, नवाचार और राष्ट्र निर्माण के जरिए समाज को संवार रहे हैं, न कि वे जिन्होंने आतंक के सहारे मासूमों की सांसें छीनीं। बस्तर की यह स्थायी शांति वहां के नागरिकों के साहस की जीत है, जिसे समृद्धि की नई ऊंचाइयों पर ले जाना सरकार का परम ध्येय है।
