छत्तीसगढ़ के बस्तर-सरगुजा के बाद अब जशपुर में गूंजेगी तरक्की की नई इबारत: जनजातीय पर्यटन को मिला ऐतिहासिक महा-अध्याय

रायपुर / 15 सितम्बर जशपुर — भारत के नक्शे पर अपनी अनोखी प्राकृतिक विरासत, कलकल बहते झरनों और समृद्ध आदिवासी संस्कृति के लिए पहचाने जाने वाले जशपुर जिले में आज विकास का एक नया सूरज उगा है। छत्तीसगढ़ की विष्णु देव साय सरकार ने राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने और जनजातीय अंचलों में समृद्धि के नए द्वार खोलने के लिए एक अभूतपूर्व व क्रांतिकारी निर्णय लिया है।
प्रधानमंत्री जनजातीय उन्नत ग्राम अभियान (PM-JUGA) के अंतर्गत जशपुर जिले के अत्यंत रमणीय ‘बगीचा-मयाली-जशपुर’ क्लस्टर में क्लस्टर आधारित होमस्टे परियोजना को आधिकारिक और पूर्ण प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान कर दी गई है। यह सिर्फ कुछ कमरों के निर्माण की योजना नहीं है, बल्कि छत्तीसगढ़ के आदिवासी भाइयों-बहनों के जीवन स्तर को ऊंचा उठाने, उनकी लोक संस्कृति को वैश्विक फलक पर स्थापित करने और उन्हें आर्थिकी की मुख्यधारा से जोड़ने का एक अकाट्य एवं दूरदर्शी ब्लूप्रिंट है।
परियोजना का विस्तृत वित्तीय और संरचनात्मक खाका (Blueprint)
इस बहुप्रतीक्षित महा-परियोजना के तहत जशपुर जिले के उन विशिष्ट जनजातीय गांवों का चयन किया गया है, जो प्राकृतिक सौंदर्य और सांस्कृतिक विविधता के मामले में बेजोड़ हैं। परियोजना के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
- चयनित गौरवशाली गांव: इस क्लस्टर के अंतर्गत किंकेल, कमतरा, डंगरी, महनई, सरुधाप और पंडरापाठ सहित कुल 6 प्रमुख जनजातीय गांवों को शामिल किया गया है।
- आवास का महा-विस्तार: योजना के तहत प्रत्येक चयनित गांव में 5 आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित और पारंपरिक आदिवासी वास्तुकला पर आधारित होमस्टे बनाए जाएंगे, जिससे पूरे क्षेत्र में एक साथ 30 नए होमस्टे विकसित होंगे।
- बजट का प्रावधान: इस महत्वाकांक्षी क्लस्टर के संपूर्ण विकास और बुनियादी ढांचे के सृजन पर लगभग 1.80 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि खर्च की जाएगी।
- सामुदायिक सुदृढ़ीकरण: पर्यटकों को बेहतरीन अनुभव देने और गांवों में सामूहिक सुविधाओं का विस्तार करने के लिए प्रत्येक गांव में 5 लाख रुपये तक के अतिरिक्त सामुदायिक विकास कार्य भी कराए जाएंगे।
कम्युनिटी बेस्ड टूरिज्म: होटल नहीं, अब ‘परिवार का आतिथ्य’ अनुभव करेंगे पर्यटक
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल के ओजस्वी और विजनरी नेतृत्व में इस पूरी परियोजना को इस प्रकार डिजाइन किया गया है कि यह पारंपरिक और महंगे होटलों की अवधारणा को पीछे छोड़ते हुए ‘कम्युनिटी बेस्ड टूरिज्म’ (समुदाय आधारित पर्यटन) को बढ़ावा दे।
अब देश-विदेश से आने वाले पर्यटक जशपुर को सिर्फ बाहर से देखकर नहीं लौटेंगे, बल्कि वे स्थानीय आदिवासी परिवारों के साथ उनके घरों में रहकर उनके जीवन को जिएंगे। चूल्हे पर बनी पारंपरिक ऑर्गेनिक छत्तीसगढ़ी रसोई, बांस के शिल्पों की खनक, पारंपरिक लोक नृत्य और जशपुर की आबोहवा को पर्यटक अपनी सांसों में महसूस कर सकेंगे। इस अनूठी पहल से पर्यटन से होने वाली कमाई का एक-एक रुपया सीधे सीधे स्थानीय आदिवासी परिवारों की झोली में पहुंचेगा।
विश्वस्तरीय पर्यटन सर्किट से जुड़ाव: बढ़ेगी पर्यटकों की ‘स्टे-ड्यूरेशन’
जशपुर का यह होमस्टे क्लस्टर क्षेत्र के उन तमाम पौराणिक, प्राकृतिक औररहस्यमयी पर्यटन स्थलों के बिल्कुल करीब स्थित है, जो सैलानियों को बरबस अपनी ओर खींचते हैं:
क्लस्टर के समीप प्रमुख आकर्षण:
- आदिवासियों की आस्था का केंद्र कैलाश गुफा
- रहस्यों से भरी खुड़ियारानी गुफा
- वन्यजीवों से समृद्ध बादलखोल अभयारण्य
- कलकल बहता और मनमोहक रानीदाह जलप्रपात
- बादलों को छूता देशदेखा पहाड़
- ऐतिहासिक और घुमावदार लोरोघाट
इन सभी स्थलों के पास होमस्टे विकसित होने से पर्यटकों का जशपुर में रुकने का समय (Stay Duration) बढ़ेगा। जब पर्यटक यहां ज्यादा दिन ठहरेंगे, तो स्थानीय परिवहन, गाइड सेवाओं, खान-पान और हस्तशिल्प की मांग में भी बेतहाशा वृद्धि होगी।
रोजगार और महिला सशक्तिकरण का नया सूर्योदय
छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के प्रबंध संचालक श्री सौमिल रंजन चौबे के कुशल मार्गदर्शन में यह परियोजना ग्रामीण युवाओं और महिलाओं के लिए वरदान साबित होगी। इसके दूरगामी प्रभाव कुछ इस प्रकार होंगे:
- युवाओं के लिए स्वरोजगार: स्थानीय युवाओं को प्रोफेशनल टूरिस्ट गाइड, ड्राइवर और हॉस्पिटैलिटी एक्सपर्ट के रूप में प्रशिक्षित किया जाएगा।
- हस्तशिल्प और लोकल आर्ट की मांग: जशपुर के पारंपरिक आदिवासी हस्तशिल्प और कलाकृतियों को राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय बाजार मिलेगा।
- महिला स्व-सहायता समूहों की मजबूती: ग्रामीण महिलाओं द्वारा तैयार किए जाने वाले पारंपरिक व्यंजन और जैविक उत्पाद सीधे पर्यटकों को परोसे जाएंगे, जिससे महिलाओं की आर्थिक आत्मकेंद्रितता मजबूत होगी।
नीति-निर्माताओं की दो टूक: विरासत का संरक्षण और आर्थिक स्वावलंबन ही हमारी प्राथमिकता
पर्यटन मंत्री श्री राजेश अग्रवाल का स्पष्ट संदेश: “छत्तीसगढ़ की जनजातीय संस्कृति हमारी रूह और पहचान है। हमारी सरकार का स्पष्ट विजन है कि हम अपनी इस थाती को सहेजते हुए जशपुर के स्थानीय परिवारों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाएं। यह क्लस्टर होमस्टे प्रोजेक्ट जशपुर को देश के पर्यटन मानचित्र पर एक नया मुकाम दिलाएगा और हमारे आदिवासी भाई-बहनों के जीवन में खुशहाली के नए रंग भरेगा।”
प्रबंध संचालक श्री सौमिल रंजन चौबे का दृष्टिकोण: “पर्यटन का लाभ केवल बड़े शहरों और फाइव-स्टार होटलों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। जशपुर का यह प्रोजेक्ट एक ऐसा जीवंत मॉडल है जो प्रकृति, संस्कृति और आजीविका को एक सूत्र में पिरोता है। इससे पर्यटकों को असली छत्तीसगढ़ी संस्कृति का दीदार होगा और स्थानीय स्तर पर रोजगार के टिकाऊ रास्ते खुलेंगे।”
जशपुर बनेगा देश का नया ‘प्राइम ट्राइबल टूरिज्म हब’
बगीचा-मयाली-जशपुर क्लस्टर में शुरू होने जा रही यह परियोजना आने वाले दिनों में छत्तीसगढ़ को देश के सबसे पसंदीदा जनजातीय एवं ग्रामीण पर्यटन गंतव्य (Tribal & Rural Tourism Destination) के रूप में स्थापित करने में मील का पत्थर साबित होगी। यह पहल महज़ एक योजना नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ के जनजातीय अंचल की तकदीर और तस्वीर बदलने का एक स्वर्णिम अध्याय है।
