छत्तीसगढ़ में ‘मोदी के 25 वर्ष’: सीएम विष्णु देव साय की अगुवाई में मनेगा महा-उत्सव, डेढ़ करोड़ ‘आशीर्वाद के दीयों’ से जगमगाएगा वनांचल से मैदान तक का कोना-कोना

विशेष राजनीतिक व प्रशासनिक महा-रिपोर्ताज
रायपुर 16 सितम्बर ।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मुख्य जनसेवक और सार्वजनिक जीवन के गौरवशाली 25 वर्ष (सुशासन, गरीब कल्याण और राष्ट्र निर्माण) पूर्ण होने के ऐतिहासिक उपलक्ष्य में छत्तीसगढ़ एक अभूतपूर्व और ऐतिहासिक जन-आंदोलन का गवाह बनने जा रहा है। आगामी 17 सितंबर 2026 को देश के प्रधानमंत्री के जन्मदिन के पावन अवसर पर शाम ठीक 7:00 बजे समूचा छत्तीसगढ़ ‘आशीर्वाद का दीया’ की दिव्य और भव्य रोशनी से सराबोर हो उठेगा। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस महा-अभियान की कमान पूरी तरह अपने हाथों में ले ली है। मुख्यमंत्री की रणनीतिक सूझबूझ और संवेदनशील नेतृत्व के चलते यह आयोजन महज एक सरकारी कार्यक्रम न रहकर छत्तीसगढ़ की सवा तीन करोड़ जनता की कृतज्ञता अभिव्यक्ति का ‘महा-उत्सव’ बन चुका है।

1. संवेदनशील सुशासन की मिसाल: ‘मीरा के पसरे से सीएम साय ने खरीदा पहला आशीर्वाद का दीया’
इस अभियान की शुरुआत ही मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने एक ऐसी मिसाल के साथ की जिसने पूरे प्रदेश के जनमानस को झकझोर कर रख दिया है। बीते 15 सितंबर 2026 की शाम राजधानी रायपुर के तेलीबांधा मरीन ड्राइव पर उस वक्त सुरक्षाकर्मी और आम जनता हैरान रह गए, जब मुख्यमंत्री का काफिला अचानक रुका और सीएम साय सीधे फुटपाथ पर दीया बेच रही एक बेहद गरीब और स्वावलंबी महिला ‘मीरा बाई’ के पसरे (दुकान) पर जा बैठे।
मुख्यमंत्री ने बेहद आत्मीयता से मीरा के सिर पर हाथ रखा, उसकी आजीविका का हाल जाना और केंद्र व राज्य सरकार की गरीब कल्याण योजनाओं (जैसे उज्ज्वला योजना, राशन कार्ड और महतारी वंदन योजना) के क्रियान्वयन की जमीनी हकीकत पूछी। इसके बाद मुख्यमंत्री ने ₹1,000 देकर मीरा से ‘आशीर्वाद का दीया’ खरीदा। मुख्यमंत्री के इस जमीनी और संवेदनशील कदम ने न केवल माटी शिल्पियों (कुम्हारों) का मान बढ़ाया, बल्कि यह संदेश भी दिया कि साय सरकार में ‘अंत्योदय’ (आखरी पंक्ति के व्यक्ति का उदय) ही शासन का मूल मंत्र है। मुख्यमंत्री की इस पहल के बाद पूरे प्रदेश में स्थानीय कुम्हारों से ही दीये खरीदने की एक अभूतपूर्व लहर चल पड़ी है।
2. अभूतपूर्व रणनीतिक ब्लूप्रिंट: 1.5 करोड़ दीपों का महा-लक्ष्य और रूट मैप
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के कुशल और दमदार मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ सरकार और संगठन ने मिलकर एक ऐसा व्यापक ब्लूप्रिंट तैयार किया है, जिसकी गूंज पूरे देश में सुनाई देगी। प्रदेश भर में 1 करोड़ 50 लाख (डेढ़ करोड़) से अधिक मिट्टी के दीये जलाने का विशाल और ऐतिहासिक लक्ष्य रखा गया है।
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| 'आशीर्वाद का दीया' महा-अभियान: एक नजर में |
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| कुल अनुमानित दीप प्रज्वलन | 1.5 करोड़ + (संपूर्ण छत्तीसगढ़) |
| राजधानी रायपुर का विशेष लक्ष्य | 25 लाख दीये |
| बूथ स्तर पर जनभागीदारी | ~28,000 बूथ (प्रति बूथ 100 दीये) |
| मुख्य नारा (थीम) | "जिसने जीवन संवारा, उसे आशीर्वाद हमारा" |
| आधिकारिक महा-आयोजन समय | 17 सितंबर 2026, शाम 07:00 बजे |
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- राजधानी रायपुर में 13 किलोमीटर की ‘दीप-श्रृंखला’: अकेले रायपुर में 25 लाख दीये जलाने की तैयारी पूरी हो चुकी है। मुख्यमंत्री निवास से लेकर शहर के प्रमुख चौक-चौराहों और मुख्य मार्गों को जोड़ते हुए लगभग 13 किलोमीटर लंबी एक अटूट मानव एवं दीप श्रृंखला बनाई जाएगी। इस ऐतिहासिक पल के साक्षी स्वयं मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री और हजारों की संख्या में आम नागरिक बनेंगे।
- 28 हजार बूथों पर महा-अभियान: भाजपा संगठन के समन्वय से राज्य के सभी 28,000 से अधिक मतदान केंद्रों (बूथों) पर यह अभियान सीधे जनता से जुड़ेगा। प्रत्येक बूथ पर न्यूनतम 100 दीये अनिवार्य रूप से जलाए जाएंगे, जिसमें स्थानीय ग्रामीणों, महिलाओं और युवाओं की सीधी भागीदारी सुनिश्चित की गई है।
3. पावर सेंटर एक्टिव: साय कैबिनेट के दिग्गजों ने संभाली संभागों की कमान
इस महा-अभियान को शत-प्रतिशत असरदार और परिणामोन्मुखी बनाने के लिए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सत्ता और संगठन के शीर्ष चेहरों को मैदानी मोर्चे पर उतार दिया है। मुख्यमंत्री ने स्वयं सभी संभागों की वर्चुअली समीक्षा की है और साफ निर्देश दिए हैं कि आयोजन में किसी भी प्रकार की शिथिलता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
- डिप्टी सीएम विजय शर्मा (बस्तर और दुर्ग संभाग): उप-मुख्यमंत्री विजय शर्मा बस्तर के अंदरूनी और संवेदनशील क्षेत्रों में इस अभियान को लेकर विशेष रूप से सक्रिय हैं। उन्होंने सुकमा, बीजापुर और दंतेवाड़ा जैसे क्षेत्रों में भी ‘सुशासन के 25 वर्ष’ के संदेश को पहुंचाने के लिए विशेष चौपालों का खाका खींचा है। उनका कहना है कि बस्तर का हर आदिवासी परिवार प्रधानमंत्री मोदी की नीतियों से लाभान्वित हुआ है और वहां ‘आशीर्वाद का दीया’ विकास की नई सुबह का प्रतीक बनेगा।
- डिप्टी सीएम अरुण साव (बिलासपुर संभाग): बिलासपुर और सरगुजा संभाग में उप-मुख्यमंत्री अरुण साव ने खुद मोर्चा संभाल रखा है। उन्होंने नगर निगमों, नगर पालिकाओं और पंचायतों के माध्यम से शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में इस दीप उत्सव को एक भव्य सांस्कृतिक मोड़ दे दिया है।
- कैबिनेट मंत्रियों की तैनाती: राज्य के अन्य कद्दावर मंत्री जैसे बृजमोहन अग्रवाल, रामविचार नेताम, केदार कश्यप और ओ.पी. चौधरी को उनके प्रभार वाले जिलों में इस महा-आयोजन की पल-पल की मॉनिटरिंग और क्रियान्वयन की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
4. “जिसने जीवन संवारा, उसे आशीर्वाद हमारा” — पोस्टर और दो विशेष थीम सॉन्ग का विमोचन
इस महा-अभियान को वैचारिक रूप से जनता के दिलों तक उतारने के लिए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने अपने निवास कार्यालय से आधिकारिक पोस्टर और दो अत्यंत कर्णप्रिय व ओजस्वी थीम सॉन्ग का विमोचन किया।
इस अभियान की मुख्य थीम लाइन है: “जिसने जीवन संवारा, उसे आशीर्वाद हमारा”। पोस्टर विमोचन के अवसर पर एक बेहद प्रभावशाली वक्तव्य देते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा:
“आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने अपने जीवन के 25 वर्ष बिना एक दिन थमे, बिना एक दिन झुके, सिर्फ और सिर्फ भारत माता की सेवा और समाज के अंतिम छोर पर बैठे गरीब, पीड़ित और शोषित व्यक्ति के उत्थान में लगा दिए हैं। छत्तीसगढ़ की यह पावन धरा, जो माता कौशल्या की भूमि है, वहां की जनता 17 सितंबर की शाम को करोड़ों दीये जलाकर प्रधानमंत्री जी को यह संदेश देगी कि छत्तीसगढ़ का एक-एक नागरिक उनके साथ चट्टान की तरह खड़ा है और उनका आशीर्वाद सदैव प्रधानमंत्री जी के साथ है।”
विमोचित किए गए थीम सॉन्ग्स में प्रधानमंत्री मोदी के 25 वर्षों के सुशासन के सफरनामे, जैसे—गरीबों को पक्का मकान, मुफ्त राशन, आयुष्मान भारत कार्ड, और छत्तीसगढ़ में साय सरकार द्वारा दी जा रही मोदी की गारंटियों (जैसे 3100 रुपये क्विंटल धान खरीदी और महतारी वंदन योजना) को बेहद खूबसूरती से पिरोया गया है। यह गाने वर्तमान में सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं और राज्य के कोने-कोने में गूंज रहे हैं।
5. धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक स्थलों पर ‘महोत्सव’ का स्वरूप
मुख्यमंत्री साय के निर्देश पर संस्कृति और लोक कला विभाग ने इस आयोजन को छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक संस्कृति से जोड़ दिया है। 17 सितंबर की शाम न केवल घरों के सामने, बल्कि छत्तीसगढ़ के अत्यंत पूजनीय और ऐतिहासिक स्थलों पर महा-आरती और दीपदान का आयोजन होगा:
- दंतेवाड़ा का मां दंतेश्वरी मंदिर, रतनपुर का मां महामाया मंदिर, और डोंगरगढ़ का मां बमलेश्वरी मंदिर विशेष रूप से हजारों दीपों से जगमगाएंगे।
- महानदी, शिवनाथ और अरपा नदी के प्रमुख घाटों पर ‘बनारस की तर्ज पर महा-आरती’ और दीपदान का भव्य आयोजन किया जाएगा।
- वनांचल क्षेत्रों में रहने वाले विशेष रूप से पिछड़ी जनजातियों (बैगा, बिरहोर, पहाड़ी कोरवा) के मजरों-टोलों में भी साय सरकार के प्रतिनिधि स्वयं जाकर दीये और तेल वितरित कर रहे हैं ताकि कोई भी घर इस सुशासन के उजाले से वंचित न रहे।
राजनीतिक और सामाजिक मायने: साय सरकार की बड़ी धमक
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय द्वारा ‘सेवा के 25 वर्ष’ और ‘आशीर्वाद का दीया’ अभियान को इस आक्रामकता, भव्यता और संवेदनशीलता के साथ जमीन पर उतारना यह साबित करता है कि छत्तीसगढ़ में Double Engine की सरकार अत्यंत आक्रामक और जन-हितैषी गति से काम कर रही है। मुख्यमंत्री ने इस आयोजन को सीधे तौर पर स्थानीय अर्थव्यवस्था (लोकल फॉर वोकल) से जोड़कर राज्य के लाखों गरीब कुम्हारों के घरों में भी दिवाली से पहले दिवाली ला दी है। 17 सितंबर 2026 की शाम को छत्तीसगढ़ से उठने वाली यह रोशनी देश की राजनीति में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के कुशल सांगठनिक और प्रशासनिक नेतृत्व की एक नई और बेहद दमदार इबारत लिखेगी।
