झीरम घाटी नरसंहार के दोषियों को फांसी: छत्तीसगढ़ के इतिहास में न्याय का ऐतिहासिक मील का पत्थर

रायपुर, 16 सितंबर 2026 — छत्तीसगढ़ के इतिहास के सबसे काले और पीड़ादायक अध्याय माने जाने वाले झीरम घाटी हत्याकांड में जगदलपुर एनआईए (NIA) कोर्ट द्वारा सभी दस दोषी माओवादियों को मृत्युदंड (फांसी) की सजा सुनाए जाने के बाद राज्य की राजनीतिक और सामाजिक फिजा में न्याय की गूंज गूंज उठी है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने इस फैसले को “न्याय की बड़ी जीत” करार देते हुए इसे आतंकवाद के खिलाफ निर्णायक मोड़ बताया है।
झीरम घाटी: छत्तीसगढ़ का नासूर और अमर पीड़ा
25 मई 2013 को बस्तर की झीरम घाटी में नक्सलियों द्वारा किए गए उस खूनी तांडव ने पूरे देश को दहला दिया था। इस जघन्य हमले में छत्तीसगढ़ ने अपने कई दिग्गज राजनीतिक दिग्गजों, जांबाज सुरक्षाकर्मियों और आम नागरिकों को खो दिया था।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर अपनी भावनाएं व्यक्त करते हुए लिखा कि इस बर्बर हत्याकांड की कटु स्मृतियां छत्तीसगढ़वासियों के मन में लंबे समय तक पीड़ा देती रहेंगी। उन्होंने इस मामले की तह तक जाकर न्याय सुनिश्चित करने के लिए एनआईए की जांच टीम की भूरी-भूरी प्रशंसा की है।
डबल इंजन सरकार का ‘लौह संकल्प’: माओवाद के खात्मे की ओर बस्तर
मुख्यमंत्री साय ने इस ऐतिहासिक फैसले का श्रेय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह के मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति और ‘लौह संकल्प’ को दिया है।
- शांति और विकास का उदय: दशकों तक खौफ और गोलियों की गड़गड़ाहट के साए में जीने वाला बस्तर अब विकास, विश्वास और स्थायी शांति के एक नए युग की ओर कदम बढ़ा रहा है।
- सशस्त्र माओवाद से मुक्ति: केंद्रीय और राज्य सुरक्षा बलों के समन्वित अभियानों ने माओवाद के चंगुल से छत्तीसगढ़ को लगभग पूरी तरह मुक्त करा लिया है।
“दिमागी नक्सलियों” और विचार समर्थकों पर कड़ा प्रहार
यह फैसला केवल प्रत्यक्ष हत्यारों को सजा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उन ताकतों के लिए भी एक गंभीर चेतावनी है जो परोक्ष रूप से आतंक को बढ़ावा देते हैं। मुख्यमंत्री साय ने दो टूक शब्दों में कहा कि यह निर्णय जनजाति समाज की लाश पर राजनीति करने वालों और आतंक को बौद्धिक एवं वैचारिक समर्थन देने वालों (Urban Naxals / दिमागी नक्सल) के लिए आत्मचिंतन का सबसे बड़ा अवसर है।
मुख्यमंत्री ने कड़े शब्दों में चेतावनी दी कि निहित स्वार्थों के लिए आतंक को प्रश्रय देने का अंजाम अंततः विनाशकारी ही होता है। लोकतंत्र और संविधान के विरुद्ध काम करने वाले आतंक का भस्मासुर किसी के लिए सुरक्षित नहीं है, इसलिए वैचारिक मुखौटे पहनने वालों को भी अपनी हरकतों से बाज आना चाहिए।
दिवंगत आत्माओं को अश्रुपूरित श्रद्धांजलि
इस ऐतिहासिक न्याय के अवसर पर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने झीरम घाटी के क्रूर हमले में अपने प्राणों की आहुति देने वाले सभी दिवंगत नेताओं, सुरक्षाबलों के जवानों और नागरिकों को अपनी विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की है।
: जगदलपुर एनआईए कोर्ट का यह फैसला इस बात का प्रमाण है कि कानून के हाथ लंबे होते हैं और देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था के खिलाफ अपराध करने वालों को अंततः अपने अंजाम तक पहुंचना ही पड़ता है।
