सुप्रीम कोर्ट की मुहर: सीजीएमएससी (CGMSC) की टेंडर प्रक्रिया को क्लीन चिट, 1 लाख का जुर्माना रद्द

रायपुर, 14 अगस्त 2026: छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन (CGMSC) की कार्यप्रणाली और टेंडर प्रक्रियाओं की पारदर्शिता पर सुप्रीम कोर्ट ने अपनी मुहर लगा दी है। देश की सर्वोच्च अदालत ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के उस फैसले को पूरी तरह पलट दिया है, जिसके तहत CGMSC पर 1 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया था। सुप्रीम कोर्ट के इस ऐतिहासिक फैसले से यह स्पष्ट हो गया है कि निगम द्वारा अपनाई जाने वाली हर टेंडर प्रक्रिया पूरी तरह नियमों के अनुकूल, पारदर्शी और निष्पक्ष है।
क्या था पूरा मामला?
यह पूरा कानूनी विवाद एक टेंडर प्रक्रिया से जुड़ा हुआ था। प्रक्रिया के दौरान एक ठेकेदार द्वारा हाईकोर्ट में शिकायत दर्ज कराई गई थी, जिसके आधार पर हाईकोर्ट ने CGMSC पर 1 लाख रुपये का हर्जाना (जुर्माना) लगा दिया था।
निगम प्रबंधन ने इस फैसले के खिलाफ मजबूती से पक्ष रखते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। सर्वोच्च अदालत में चली सुनवाई के दौरान यह बात दूध के दूध और पानी के पानी की तरह साफ हो गई कि इसमें CGMSC की तरफ से कोई भी चूक या लापरवाही नहीं बरती गई थी।
सुप्रीम कोर्ट की मुख्य टिप्पणियाँ और फैसला
- ईमेल पर सही समय पर भेजी गई जानकारी: सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि ठेकेदार ने फॉर्म में जो अपनी आधिकारिक ईमेल आईडी (Official Email ID) दर्ज कराई थी, निगम द्वारा उसी पते पर समय रहते सभी जरूरी सूचनाएं और संदेश भेज दिए गए थे।
- नियमों के तहत की गई कार्रवाई: अदालत ने माना कि ठेकेदार की ओर से तय समय सीमा के भीतर जवाब या प्रतिक्रिया नहीं दी गई। ऐसी स्थिति में नियमों का पालन करते हुए ही उसे टेंडर प्रक्रिया से बाहर किया गया था।
- निगम की ईमानदारी साबित: सर्वोच्च अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि CGMSC का कार्य पूरी तरह विधि-सम्मत था और निगम पर लगाया गया 1 लाख रुपये का जुर्माना पूरी तरह अनुचित था।
आगे की राह और निगम का संकल्प
इस अदालती फैसले ने यह साबित कर दिया है कि छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन (CGMSC) अपने सभी टेंडरों, खरीदी और प्रशासनिक कार्यों में पूर्ण पारदर्शिता, ईमानदारी और नियमों का कड़ाई से पालन करता है।
फैसले के बाद निगम प्रबंधन ने संतोष व्यक्त करते हुए कहा है कि वह राज्य के नागरिकों और मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए भविष्य में भी पूरी पारदर्शिता, निष्पक्षता और ऊर्जा के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करता रहेगा। यह फैसला राज्य में स्वास्थ्य अधोसंरचना को गति देने वाले कार्यों के लिए एक मजबूत मिसाल बनकर सामने आया है।
