छत्तीसगढ़ में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव की धूम: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा- “सामूहिकता की शक्ति से ही तय होती है सफलता की ऊंचाई”

छत्तीसगढ़ में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव की धूम: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा- “सामूहिकता की शक्ति से ही तय होती है सफलता की ऊंचाई”
रायपुर, 06 सितंबर: राजधानी रायपुर के गुढ़ियारी स्थित अवधपुरी मैदान में शनिवार को आयोजित विशाल दही हांडी उत्सव ने पूरे छत्तीसगढ़ को कृष्णमय कर दिया। पारंपरिक हर्षोल्लास और अद्भुत उमंग के बीच आयोजित इस भव्य समारोह में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने शिरकत कर गोविंदाओं का उत्साह बढ़ाया। मुख्यमंत्री के पहुंचते ही पूरा मैदान “गोविंदा आला रे” और पारंपरिक जयकारों से गूंज उठा।
“दही हांडी सिर्फ उत्सव नहीं, एकता और टीम वर्क का प्रतीक है”
जनसैलाब को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाएं जहां मन को आनंदित करती हैं, वहीं दही हांडी का यह पर्व हमें एकता, अटूट सहयोग और टीम भावना का अमूल्य पाठ पढ़ाता है।
“हांडी तक पहुंचने वाला गोविंदा अकेले उस ऊंचाई तक नहीं पहुंचता। उसके नीचे खड़े हर साथी का विश्वास और सहयोग उसे शिखर तक पहुंचाता है। जब सामूहिक प्रयास होते हैं, तो पहाड़ जैसी बड़ी चुनौतियां भी छोटी पड़ जाती हैं।”
मुख्यमंत्री ने गीता के संदेश को याद करते हुए कहा कि श्रीकृष्ण का जीवन कर्मयोग और कर्तव्यनिष्ठा की सबसे बड़ी पाठशाला है। ग्वालबालों के सखा, द्वारका के कुशल मार्गदर्शक और कुरुक्षेत्र के सारथी के रूप में उन्होंने हर भूमिका को पूरी निष्ठा से निभाकर मानवता को सही राह दिखाई।
छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को नई ऊंचाइयां
मुख्यमंत्री ने छत्तीसगढ़ की पावन धरा को प्रभु श्रीराम का ननिहाल बताते हुए राज्य सरकार की सांस्कृतिक प्राथमिकताओं को प्रमुखता से रखा:
- श्री रामलला दर्शन योजना: अब तक 50 हजार से अधिक श्रद्धालुओं को अयोध्याधाम की मुफ्त यात्रा कराकर रामलला के दर्शन कराए जा चुके हैं।
- मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना: इसके अंतर्गत 10 हजार से अधिक बुजुर्गों को देश के विभिन्न प्रतिष्ठित तीर्थों के दर्शन का सौभाग्य मिला है।
- गौवंश संरक्षण: ‘सुरभि गोधाम योजना’ के जरिए छत्तीसगढ़ की संस्कृति के केंद्र बिंदु गौमाता के संरक्षण व संवर्धन का कार्य तेजी से हो रहा है।
- ऐतिहासिक व धार्मिक धरोहर: भोरमदेव, राजिम के कुलेश्वर महादेव, दुनिया के सबसे बड़े प्राकृतिक शिवलिंग ‘मधेश्वर पहाड़’ (जशपुर) और मां बम्लेश्वरी, दंतेश्वरी व महामाया जैसे शक्तिपीठों के संरक्षण का संकल्प दोहराया गया।
बी प्राक और लखबीर सिंह लक्खा की प्रस्तुतियों ने बांधा समां
इस ऐतिहासिक आयोजन में भक्ति, संस्कृति और आधुनिक संगीत का अद्भुत संगम देखने को मिला। गोविंदाओं की टोलियों ने मानव पिरामिड बनाकर जब हांडी फोड़ी, तो दर्शकों का उत्साह चरम पर पहुंच गया। इसके बाद मंच पर देश के माने-जाने भजन सम्राट श्री लखबीर सिंह लक्खा और लोकप्रिय गायक श्री बी प्राक ने अपनी सुरीली आवाज़ से ऐसा समां बांधा कि पूरा अवधपुरी मैदान कृष्ण भक्ति में झूम उठा।
दिग्गजों की रही गरिमामयी मौजूदगी
इस भव्य आयोजन में कौशल विकास मंत्री गुरु खुशवंत साहेब, राज्यसभा सांसद श्रीमती लक्ष्मी वर्मा, विधायक श्री मोतीलाल साहू, श्री अनुज शर्मा, श्री ईश्वर साहू, नागरिक आपूर्ति निगम के अध्यक्ष श्री संजय श्रीवास्तव, गौसेवा आयोग के उपाध्यक्ष श्री राजीव लोचन महाराज, रायपुर नगर निगम की अध्यक्ष श्रीमती मीनल चौबे सहित हजारों की संख्या में राजधानीवासी और युवा गोविंदा उपस्थित रहे।
